पूर्व इंजीनियर प्रशांत वाघमारे की बढ़ी मुश्किलें
2000 करोड़ के भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका

पुणे/दि.22- पुणे महानगरपालिका के पूर्व शहर अभियंता प्रशांत वाघमारे की मुश्किलें बढ़ गई हैं. सुप्रीम कोर्ट ने 2000 करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है. अदालत के इस फैसले के बाद अब महाराष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा वाघमारे के खिलाफ जांच का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है.
न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने वाघमारे की विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुंबई उच्च न्यायालय के पूर्व फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है. उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में तत्कालीन नगर आयुक्त के उस निर्णय को रद्द कर दिया था, जिसमें उन्होंने वाघमारे को क्लीन चिट दी थी.
अदालत ने टिप्पणी की थी कि तत्कालीन आयुक्त ने एक तरह से मिनी ट्रायल चलाया और सार्वजनिक सेवक को बचाने का प्रयास किया. प्रशांत वाघमारे पर आरोप है कि उन्होंने 1994 में पुणे महानगरपालिका में अभियंता के तौर पर काम शुरू करने के बाद, विशेष रूप से 2003 से शहर अभियंता के पद पर रहते हुए अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया.
सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट तानाजी बालासाहेब गंभीर ने 2016 में शिकायत दर्ज कराई थी कि वाघमारे ने अपनी पत्नी प्रज्ञा वाघमारे, भाई प्रमोद वाघमारे और विभिन्न निर्माण कंपनियों के माध्यम से 2000 करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति जमा की है. प्रशांत वाघमारे जनवरी 2026 में शहर अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं. सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय के बाद अब वाघमारे के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की सघन जांच होगी.





