राज्य के गांवों को मिलेंगे ‘डिजिटल पंख’

88 फीसद ग्रामपंचायतों में इंटरनेट सेवा

* कनेक्टीविटी को दी जा रही जबरदस्त गति
* गुजरात व हरियाणा को पीछे छोडने का लक्ष्य
अमरावती/दि.22- शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रहनेवाले डिजिटल फर्क को कम करने की दृष्टि से केंद्र सरकार द्वारा शुरु किए गए ‘भारतनेट’ प्रकल्प ने अब महाराष्ट्र में उल्लेखनीय बदलाव लाना शुरु कर दिया है. ग्रामपंचायत स्तर तक हाईस्पीड इंटरनेट पहुंचानेवाले इस उपक्रम के चलते राज्य की 88 फीसद ग्रामपंचायतों को अब डिजिटल कनेक्टीविटी का आधार मिल रहा है.
इस संदर्भ में मिली जानकारी के मुताबिक देश की कुल 2.69 लाख ग्रामपंचायतों में से करीब 2.18 लाख ग्रामपंचायतें इंटरनेट की दृष्टि से ‘सर्विस रेडी’ की गई है. जिसके तहत महाराष्ट्र की कुल 28,002 ग्रामपंचायतों में से 24,778 यानि 88 फीसद ग्रामपंचायतों में इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराई गई है. इस प्रतिशत को राज्य की डिजिटल प्रगति का द्योतक माना जा सकता है. जिसके चलते ग्रामपंचायत कार्यालय, शाला, स्वास्थ्य केंद्र एवं नागरिक सेवा केंद्र को अखंड इंटरनेट सेवा का लाभ मिल रहा है. साथ ही कुछ ग्रामपंचायतों में एक से अधिक ‘सर्विस पॉइंट’ भी है.

* ऑप्टीकल फायबर के हाईस्पीड इंटरनेट
‘भारतनेट’ प्रकल्प अंतर्गत ऑप्टीकल फायबर के जरिए ग्रामपंचायतों को इंटरनेट से जोडने पर जोर दिया जा रहा है. ‘फायबर टू द होम’ तकनीक के चलते अब ग्रामीण क्षेत्रों में हाईस्पीड इंटरनेट सेवा उपलब्ध हो रही है. साथ ही निजी इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के जरिए भी कनेक्टीविटी को बढाया जा रहा है. जिसके चलते नागरिकों को ई-सेवा, ऑनलाइन शिक्षा, टेलिमेडिसीन व डिजिटल पेमेंट जैसी सुविधाएं सहज रुप से उपलब्ध हो रही है.

* डिजिटल उडान के लिए सर्वाधिक निधि महाराष्ट्र को
इस प्रकल्प के अंतर्गत महाराष्ट्र को बडे पैमाने पर निधि उपलब्ध कराई गई है. जिसके तहत कोविड के उपरांत अगले पांच वर्षों के दौरान महाराष्ट्र को करीब 3400.60 करोड रुपए वितरित किए गए है. यह अन्य राज्यों को दी गई निधि की तुलना में सबसे अधिक है. जिसके चलते मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गतिमान करनेवाले कई उपक्रमों को साकार करना भी संभव हो पाया है.

* नेटवर्क को स्थिर रखने की चुनौती कायम
डिजिटल महाराष्ट्र के सामने अब भी कई चुनौतिया कायम है. इंटरनेट सुविधा उपलब्ध रहने के बावजूद उसकी गुणवत्ता, सातत्य एवं प्रयोग क्षमता पर और अधिक काम करने की जरुरत है. सुछ दुर्गम एवं आदिवासी क्षेत्रों में नेटवर्क की स्थिरता पर अब भी सवालिया निशान लगे हुए है. साथ ही डिजिटल साक्षरता का अभाव भी एक बडी समस्या साबित हो रहा है.

* गुजरात व हरियाणा 100 फीसद डिजिटल होने की ओर
महाराष्ट्र में इंटरनेट का काफी हद तक प्रसार हुआ है. वहीं गुजरात व हरियाणा में ग्राम पंचायतें कहीं अधिक डिजिटल हुई है. गुजरात में 14 हजार 621 में से 14 हजार 563 यानि 99.60 फीसद ग्राम पंचायतें इंटरनेट की दृष्टि से सर्विस रेडी है. वहीं हरियाणा की 6 हजार 230 में से 6 हजार 204 यानि 99.58 फीसद ग्राम पंचायते डिजिटल हो चुकी है.

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