हथकडी पहनाना पडा महंगा
अमरावती में पूर्व सैनिक और वकील को

* हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार देगी मुआवजा
अमरावती/दि.24- नागपुर स्थित बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने नागरिक अधिकारों और मानवीय गरिमा की रक्षा करते हुए एक अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अमरावती पुलिस द्वारा सार्वजनिक रुप से अपमानित किए गए एक वकील और एक पूर्व सैनिक को 50-50 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश महाराष्ट्र सरकार को दिया है. यह आदेश न्यायमूर्ति उर्मिला फालके-जोशी और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता की खंडपीठ ने सुनाया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि, कानून लागू करने वाली एजेंसियों का दायित्व केवल अपराधियों को पकडना नहीं, बल्कि समाज के प्रति मर्यादा और संवेदनशीलता बनाए रखना है.
यह घटना अगस्त 2010 की है. याचिकाकर्ता योगेश्वर कावडे (वकील) और अविनाश दाते (पूर्व सैन्य कर्मी) अपनी कार को नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने तलेगांव पुलिस थाना, अमरावती पहुंचे थे. लेकिन इसी दौरान आरोपी ने उनके खिलाफ मारपीट और धमकी देने की जवाबी शिकायत दर्ज करवा दी. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि, पुलिस ने उन्हें आधी रात के बाद अवैध रुप से हिरासत में लिया और थाने में उन्हें केवल अंतर्वस्त्रों में बैठने को मजबूर किया. जो मानवीय गरिमा का गंभीर उल्लंघन है.
आरोप है कि, अगले दिन पुलिस ने दोनों को हथकडी पहनाकर राज्य परिवहन निगम (एसटी) की बस से तहसीलदार कार्यालय ले जाया. जब तहसीलदार ने स्थित देखी तो उन्होंने तुरंत हथकडी हटाने के निर्देश दिए और दोनों को जमानत दे दी.
* 8 सप्ताह में भुगतान का आदेश
अमरावती के पुलिस अधीक्षक ने कोर्ट को बताया कि, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच कर कार्रवाई की जा चुकी हैं. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि, केवल विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, पीडितों की प्रतिष्ठा को जो ठेस पहुंची है उसकी भरपाई मुआवजे के माध्यम से होनी चाहिए. कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया है कि, वह 8 सप्ताह के भीतर दोनों याचिकाकर्ताओं को 50-50 हजार रुपए का भुगतान करें.





