एक तीर से कई निशाने साधने की तैयारी कर रहे डेप्युटी सीएम शिंदे

बच्चू कडू को विधान परिषद में भेजकर विदर्भ को साधने की चाहत

* शिंदे सेना की विदर्भ में फिलहाल कोई विशेष ताकत व मौजूदगी नहीं
* बच्चू कडू के साथ आने से विदर्भ में मजबूत होगी शिंदे सेना
अमरावती/मुंबई/दि.27 – राज्य के आगामी विधान परिषद चुनाव को ध्यान में रखते हुए शिंदे गुट वाली शिवसेना के मुखिया एवं राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा बडे सुनियोजित तरीके से फूंक-फूंककर अपने कदम आगे बढाए जा रहे है. जिसके तहत डेप्युटी सीएम एकनाथ शिंदे द्वारा शिवसेना के हिस्से में आनेवाली विधान परिषद की दो सीटों में से एक सीट के लिए प्रहार जनशक्ति पार्टी के मुखिया व पूर्व मंत्री बच्चू कडू को दावेदार बनाए जाने पर विचार किया जा रहा है. अपनी इस एक चाल के जरिए डेप्युटी सीएम एकनाथ शिंदे द्वारा एक तीर से कई निशाने साधने की योजना बनाई गई है. जिसके तहत जहां एक ओर वे पिछली मविआ सरकार से लेकर ‘गुवाहाटी एपीसोड’ तक अपना साथ देनेवाले प्रहार जनशक्ति पार्टी के मुखिया व पूर्व मंत्री बच्चू कडू को मौका देते हुए पुराने एहसानों का बदला चुका सकते है. साथ ही साथ पूर्व मंत्री बच्चू कडू का साथ लेते हुए अमरावती शहर व जिले सहित समूचे विदर्भ क्षेत्र में अपनी पार्टी को भी मजबूत कर सकते है. क्योंकि पांच वर्ष पहले शिवसेना में हुई दोफाड के बाद से लेकर अब तक विदर्भ क्षेत्र में शिंदे गुट वाली शिवसेना अपनी ताकत को अपेक्षित तरीके से बढा नहीं पाई है. जिसके चलते अब विदर्भ क्षेत्र में अपने पुराने भरोसेमंद साथी व सहयोगी रहे पूर्व मंत्री बच्चू कडू का साथ व सहयोग लेते हुए पार्टी को संगठनात्मक रुप से मजबूत करने के बारे में डेप्युटी सीएम एकनाथ शिंदे द्वारा राजनीतिक दांव खेला जा रहा है.
बता दें कि, राज्य विधान परिषद की 9 सीटों के लिए चुनाव तथा एक सीट के लिए उपचुनाव होना है. इन 10 सीटों में से 9 सीटें महायुति द्वारा आसानी के साथ जीती जा सकती है. जिसमें से 2 सीटें महायुति में शामिल शिवसेना के हिस्से में आनेवाली है. इस बात को देखते हुए शिंदे गुट वाली शिवसेना में कई नेता विधान परिषद सदस्य बनने के हेतु बडी आतुरता के साथ प्रयास में जुटे हुए है. परंतु अब यह जानकारी भी सामने आई है कि, शिंदे गुट वाली शिवसेना के मुखिया व डेप्युटी सीएम एकनाथ शिंदे द्वारा 2 में से 1 सीट पर ही अपनी पार्टी के किसी इच्छूक को मौका दिया जाएगा, तथा वे दूसरी सीट के लिए प्रहार पार्टी के मुखिया एवं पूर्व मंत्री बच्चू कडू के नाम पर विचार कर रहे है. हालांकि इस निर्णय का पार्टी के नेताओं व पदाधिकारियों द्वारा भीतर ही भीतर दबे स्वर में विरोध किया जा रहा है. लेकिन पार्टी नेतृत्व के तौर पर डेप्युटी सीएम एकनाथ शिंदे का निर्णय ही अंतिम रहनेवाला है.
ज्ञात रहे कि, अचलपुर निर्वाचन क्षेत्र से लगातार चार बार विधायक रह चुके पूर्व मंत्री बच्चू कडू ने वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव पश्चात महाविकास आघाडी को अपना समर्थन दिया था. जिसके चलते मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्ववाली महाविकास आघाडी सरकार में बच्चू कडू को राज्यमंत्री बनाया गया था. हालांकि जब आगे चलकर तत्कालीन नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के 40 विधायकों व 13 सांसदों को अपने साथ लेते हुए पार्टी के खिलाफ बगावत की थी और शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी, तब अपने राज्यमंत्री पद की फिक्र किए बिना बच्चू कडू ने एकनाथ शिंदे का साथ दिया था और वे शिंदे गुट के साथ गुवाहाटी भी गए थे. जिसके चलते राज्य में सत्ता परिवर्तन होने के बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में महाविकास आघाडी की सरकार के बनने के उपरांत भले ही बच्चू कडू को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई थी. लेकिन तत्कालीन सीएम एकनाथ शिंदे ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त रहनेवाला दिव्यांग कल्याण मंत्रालय का अध्यक्षपद दिया था. हालांकि कुछ समय बाद पूर्व मंत्री बच्चू कडू ने राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एवं महायुति सरकार का नेतृत्व कर रही भाजपा के खिलाफ जमकर मोर्चा खोलते हुए अपनी नाराजगी जाहीर करनी शुरु की थी. साथ ही साथ पूर्व मंत्री बच्चू कडू को आगे चलकर वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना भी करना पडा था. जिसके चलते वे लगभग राजनीतिक हाशिए पर चले गए थे. लेकिन उनकी डेप्युटी सीएम एकनाथ शिंदे के साथ नजदिकियां और घनिष्ठता लगातार बनी रही. साथ ही साथ विधान परिषद के आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए विगत कुछ समय के दौरान पूर्व मंत्री बच्चू कडू एवं डेप्युटी सीएम एकनाथ शिंदे के बीच कई बार चर्चा एवं बातचीत होने के साथ ही कई दौर की चर्चा भी हुई. जिसके चलते इस बात की जबरदस्त संभावनाएं जताई जा रही है कि, डेप्युटी सीएम एकनाथ शिंदे द्वारा पूर्व मंत्री बच्चू कडू को विधान परिषद के चुनाव में मौका दिया जा सकता है. साथ ही ऐसा करते हुए डेप्युटी सीएम शिंदे द्वारा एक तीर से कई निशाने भी साधे जा सकते है.
उल्लेखनीय है कि, शिंदे गुट वाली शिवसेना की विदर्भ में कोई विशेष ताकत एवं संगठनात्मक मजबूती नहीं है. जबकि पूर्व शिवसैनिक रह चुके बच्चू कडू द्वारा वर्ष 1999 में प्रहार जनशक्ति पार्टी का गठन करने के साथ ही अपने पार्टी व संगठन को पूरे विदर्भ क्षेत्र में जबरदस्त तरीके से स्थापित व मजबूत किया गया. जिसकी बदौलत जहां बच्चू कडू खुद चार बार अचलपुर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए, वहीं वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव पश्चात विधानसभा में प्रहार पार्टी के दो विधायक निर्वाचित हुए थे. साथ ही साथ वर्ष 2024 के चुनाव में प्रहार जनशक्ति पार्टी ने 38 सीटों पर अपने प्रत्याशी खडे किए थे. जिसमें यद्यपि बच्चू कडू सहित सभी उम्मीदवार पराजित हुए थे, परंतु उस चुनाव में प्रहार पार्टी को 3.07 लाख यानि 1.55 प्रतिशत सीटें मिली थी. जिसे ध्यान में रखते हुए डेप्युटी सीएम एकनाथ शिंदे द्वारा प्रहार पार्टी के मुखिया व पूर्व मंत्री बच्चू कडू को अपनी ‘गुड बुक’ में रखते हुए उनके जरिए अमरावती जिले सहित पूरे विदर्भ क्षेत्र को साधने का प्रयास किया जा रहा है.

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