बागेश्वर महाराज ने शिवाजी संबंधी बयान पर माफी मांगी

नागपुर आता हूं तो कुछ विवाद हो जाता है

* कहा मेरे शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया
नागपुर /दि.28- बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक बार फिर शिवप्रेमियों से माफी मांगी है. नागपुर में आयोजित राम कथा कार्यक्रम में सार्वजनिक मंच से उन्होंने महाराष्ट्र और जनता से माफी मांगी. उन्होंने कहा कि जब भी मैं नागपुर आता हूं, कुछ न कुछ विवाद जरूर हो जाता है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की संकल्पना से भारत दुर्गा मंदिर का भूमिपूजन हुआ, वहां पहुंचने पर बड़े संतों की उपस्थिति थी. वहां मुझे कुछ बोलने का अवसर मिला, लेकिन मेरे शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया. मेरे शब्दों से आपको पीड़ा हुई, दुख हुआ, इसके लिए मैं माफी मांगता हूं, ऐसा बागेश्वर बाबा ने कहा.
* नागपुर आता हूं तो विवाद होता है
बागेश्वर बाबा ने कहा कि मैं जब नागपुर आता हूं तो कुछ न कुछ विवाद जरूर होता है. गुरु-शिष्य परंपरा के बारे में एक स्वाभाविक बात मैंने कही थी. जब मैं महाराष्ट्र आया था तब मैंने छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में बोला. उस दिन मैंने गुरु-शिष्य महिमा पर एक कथा सुनाई थी. गुरु के प्रति छत्रपति शिवाजी महाराज की कितनी ऊंची विचारधारा थी, उसे मैंने अपने शब्दों में बताया. लेकिन उन शब्दों का गलत अर्थ निकालकर यह समझा गया कि मैंने उनका अपमान किया. उन्होंने कहा कि जिन छत्रपति शिवाजी महाराज की स्वराज्य की संकल्पना सुनकर हिंदू राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया गया, उनका अपमान मैं कैसे कर सकता हूं? उन्हें पढ़कर ही मैंने हिंदू राष्ट्र का सपना देखा है. उन्हें देखकर और पढ़कर ही मैंने पदयात्रा की है. उनका अपमान करना तो दूर, मैं ऐसा सोच भी नहीं सकता.
* धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का माफीनामा
उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों से इस बात को कुछ लोगों ने बहुत बढ़ा दिया. यदि मेरे शब्दों से किसी को दुख पहुंचा है तो मैं दिल से खेद व्यक्त करता हूं. मैं भी छत्रपति शिवाजी महाराज को मानता हूं और आप भी मानते हैं. अगर हम आपस में ही खींचतान करते रहेंगे तो हिंदू राष्ट्र कैसे बनेगा? फिर भी अगर आपको लगता है कि मैंने गलत कहा, तो मैं माफी मांगता हूं. महाराष्ट्र बड़ा है, भारत बड़ा है और शिवाजी महाराज हम सबके हैं. उन्होंने मराठा समाज और संभाजी ब्रिगेड से भी माफी मांगी और कहा कि हम तोड़ने नहीं, जोड़ने आए हैं.
* बयान से सफाई
चार बच्चों वाले बयान पर उन्होंने कहा कि मेरा अभी विवाह नहीं हुआ है, लेकिन मैं विवाह करूंगा. मेरा मतलब था कि चार बच्चों में से एक को राष्ट्र के लिए समर्पित करें. इसका मतलब यह नहीं कि उसे केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भेजें, बल्कि उसे इंजीनियर, कलेक्टर, सैनिक बनाकर देश सेवा के लिए तैयार करें. उन्होंने कहा कि नागपुर में मुझे हमेशा आशीर्वाद मिलता है. इस बार मैं पांच दिन के लिए आया हूं और पूरी कथा करूंगा. 29 तारीख को दरबार लगेगा और अगर गुरुजी ने अनुमति दी तो 30 अप्रैल को भी दरबार लगाया जाएगा.

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