पुस्तक के प्रकाशक प्रशांत आंबी गिरफ्तार
‘शिवाजी कोण होता?’ केस में

* विधायक गायकवाड ने की थी गालीगलौज
* बुलढाणा में गायकवाड के घर के सामने मोर्चा आयोजित
बुलढाणा /दि.28- कॉमरेड गोविंद पानसरे द्वारा लिखित ‘शिवाजी कौन था?’ इस पुस्तक के प्रकाशक प्रशांत आंबी को मंगलवार को बुलढाणा में संजय गायकवाड के घर के सामने जाकर पुस्तक का वाचन करना था. लेकिन उससे पहले ही बुलढाणा पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. पुलिस ने प्रशांत आंबी को बुलढाणा जिले की सीमा में प्रवेश करते ही स्थानबद्ध कर दिया. फिलहाल उन्हें अज्ञात स्थान पर रखा गया है, ऐसी जानकारी बुलढाणा पुलिस की ओर से दी गई है.
हाल ही में विधायक संजय गायकवाड ने ‘शिवाजी कौन था?’ इस पुस्तक में शिवाजी महाराज के एकेरी उल्लेख को लेकर प्रशांत आंबी को गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी थी. इसके विरोध में रोहित पवार के नेतृत्व में आज बुलढाणा में मोर्चा निकाला जाने वाला था. साथ ही संजय गायकवाड के घर के सामने ‘शिवाजी कौन था?’ इस पुस्तक का सार्वजनिक वाचन भी किया जाना था.
इस पूरे कार्यक्रम में प्रकाशक प्रशांत आंबी, अजित नवले, बी. जी. कोलसे पाटील तथा कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता और विभिन्न जिलों के पदाधिकारी शामिल होने वाले थे. फिलहाल विभिन्न जिलों से 500 से अधिक प्रगतिशील विचारधारा के कार्यकर्ता बुलढाणा पहुंच चुके हैं. लेकिन पुलिस ने अब प्रशांत आंबी को स्थानबद्ध कर कार्रवाई शुरू कर दी है. किसान नेता अजित नवले ने इस घटना का विरोध किया है. ‘शिवाजी कौन था?’ पुस्तक के मुद्दे पर आयोजित सभा का मंडप ठेकेदार से हटवाया गया है. पीने के पानी के जार भी वापस ले जाए गए हैं. राज्य में क्या अब लोकतांत्रिक तरीके से सभा भी नहीं होगी?, ऐसा सवाल उन्होंने उठाया.
* संजय गायकवाड की फिर धमकी
संजय गायकवाड ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर एक बार फिर अपनी भूमिका रखी. इस दौरान उनका आक्रामक रुख कायम दिखाई दिया. उन्होंने कहा कि हम आज उस पुस्तक वाचन में जाएंगे. हम वहां जाकर नीचे बैठेंगे और विनम्रता से सब कुछ सुनेंगे. अगर पुस्तक वाचन के दौरान उन्होंने महाराज का उचित सम्मान किया तो हम तालियां बजाकर उनका स्वागत करेंगे. उस पुस्तक में 300-400 बार शिवाजी, शिवाजी ऐसा लिखा गया है, वाचन के दौरान हर जगह शिवाजी महाराज कहना चाहिए. अगर हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई और शिवभक्तों की भावनाएं भड़क गईं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पुस्तक वाचन के आयोजक और पढ़ने वाले की होगी, ऐसा इशारा संजय गायकवाड ने दिया.





