महाराष्ट्र सरकार ने एआई नीति को दी मंजूरी
लंदन में बनेगा डॉ. आंबेडकर अध्यासन केंद्र

* कैबिनेट बैठक में हुए 7 बडे फैसले
मुंबई /दि.29- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता के तहत मंत्रालय में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 7 बड़े और महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई. इन निर्णयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), हरित ऊर्जा, वन, सामाजिक न्याय, दिव्यांग सशक्तिकरण, महसूल और आदिवासी विकास से जुड़े अहम विषय शामिल रहे. सरकार ने इन फैसलों को राज्य के दीर्घकालीन विकास, तकनीकी सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशन की दिशा में निर्णायक कदम बताया.
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की पहली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) नीति 2026 को मंजूरी दे दी है. इस नीति के तहत राज्य में 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने और करीब डेढ़ लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार राज्यभर में एआई क्षेत्र के संतुलित विकास के लिए 6 एआई उत्कृष्टता केंद्र और 5 एआई नवाचार शहर स्थापित करेगी. यह नीति विशेष रूप से एआई आधारित अधोसंरचना, अनुसंधान, नवउद्यम और औद्योगिक नवाचार को गति देने पर केंद्रित होगी.
इसके साथ ही सामाजिक न्याय विभाग के तहत मंत्रिमंडल ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस में भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नाम पर स्थायी अध्यासन स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया. इस अध्यासन के माध्यम से डॉ. आंबेडकर के विचारों पर वैश्विक स्तर पर अकादमिक अध्ययन को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही उनके नाम पर डॉक्टरेट स्तर की छात्रवृत्ति भी दी जाएगी.
कैबिनेट बैठक में वन विभाग के अंतर्गत राज्य सरकार ने हरित महाराष्ट्र आयोग की स्थापना को मंजूरी दी है. यह आयोग राज्य में 300 करोड़ वृक्षारोपण के महत्वाकांक्षी अभियान की निगरानी करेगा. आयोग पायाभूत सुविधाओं से जुड़े हरित विकास, पर्यावरणीय संतुलन और वृक्षारोपण योजनाओं के नियोजन, क्रियान्वयन और नियंत्रण का काम करेगा. वहीं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने एवं मैजेस्टिक योजना लागू करने के लिए ऊर्जा विभाग के तहत राज्य में हरित ऊर्जा के उपयोग और पारेषण क्षमता को मजबूत करने के लिए मैजेस्टिक योजना लागू की जाएगी. इसका पूरा नाम ‘महाराष्ट्र एक्सेलेरेटिंग ग्रीन एनर्जी एंड स्टोरेज टेक्नोलॉजीज इंटीग्रेशन इन कनेक्टेड ग्रिड’ है. इस योजना के लिए राज्य सरकार विश्व बैंक से कर्ज लेगी. इसके लिए प्राथमिक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने की मंजूरी दी गई है.
इसके अलावा दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग के तहत उच्च माध्यमिक के बाद पढ़ाई करने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति में 12 वर्षों बाद बड़ी बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई. अब दिव्यांग विद्यार्थियों को प्रवेश शुल्क, शिक्षण शुल्क, परीक्षा शुल्क, पंजीयन शुल्क, पुस्तकालय शुल्क, नियतकालिक शुल्क और चिकित्सा जांच शुल्क जैसी शैक्षणिक मदों का लाभ मिलेगा. वहीं महसूल विभाग के तहत रत्नागिरी जिले के मौजे नाचणे में केंद्रीय विद्यालय के लिए अढ़ाई हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया. इससे कोकण क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण केंद्रीय शिक्षा सुविधा उपलब्ध होगी.
इसके साथ ही आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित अनुदानित आश्रमशालाओं के शिक्षकेतर कर्मचारियों के लिए सुधारित सेवांतर्गत आश्वासित प्रगति योजना लागू करने को मंजूरी दी गई. इसके तहत 12 और 24 वर्ष की नियमित सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को पदोन्नति-समान वित्तीय लाभ दिए जाएंगे. मंत्रिमंडल के ये फैसले राज्य में तकनीकी निवेश, पर्यावरणीय संतुलन, सामाजिक न्याय और शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.





