भीषण गर्मी में ठंडे पेय पदार्थों की मांग बढ़ी

हेल्दी ड्रिंक्स बने पहली पसंद

अमरावती/दि.30- शहर में लगातार बढ़ते तापमान ने लोगों की दिनचर्या बदल दी है. पिछले कुछ दिनों से अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने के कारण नागरिक तेज गर्मी से राहत पाने के लिए ठंडे पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं. खासकर नींबू पानी, छाछ और लस्सी जैसे पारंपरिक पेय सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं, जबकि आम, संतरा और गन्ने का जूस भी लोगों को खूब आकर्षित कर रहा है.
गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर के रसवंती गृह, जूस सेंटर, लस्सी की दुकानों, मटका कुल्फी स्टॉल और आइसक्रीम पार्लरों पर ग्राहकों की भारी भीड़ देखी जा रही है. विक्रेताओं के अनुसार, सॉफ्ट ड्रिंक्स और ठंडे पेय की मांग में करीब तीन गुना तक वृद्धि हुई है.
* बिक्री में बड़ा उछाल
दुकानदारों का कहना है कि जहां पहले रोजाना 100 से 200 गिलास पेय बिकते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 300 से 600 गिलास तक पहुंच गया है. सुबह 10 बजे से ही ग्राहकों की भीड़ शुरू हो जाती है, जो देर रात तक बनी रहती है.
* प्राकृतिक पेय की ओर झुकाव
तेज धूप के बावजूद दोपहर में सड़कें भले ही सूनी नजर आती हों, लेकिन नींबू पानी, गन्ने का रस और छाछ के स्टॉल पर लोगों की कतारें लगी रहती हैं. खास बात यह है कि लोग अब आर्टिफिशियल सॉफ्ट ड्रिंक्स के बजाय प्राकृतिक और ताजे पेय को प्राथमिकता दे रहे हैं.
* फलों के दाम बढ़े, फिर भी मांग बरकरार
डिमांड बढ़ने से फलों के दामों में हल्की बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन इसके बावजूद लोग रिफ्रेशमेंट पर खर्च करने से पीछे नहीं हट रहे हैं. आमरस, तरबूज, अंगूर और अनानेस के जूस की बिक्री में भी तेजी आई है.
* विशेषज्ञों की सलाह
डाइटीशियन डॉ. उज्ज्वला बेवाले के अनुसार, गर्मियों में शरीर में पानी की कमी से बचने के लिए घर पर बने प्राकृतिक पेय पदार्थों का सेवन करना अधिक फायदेमंद है. उन्होंने नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी और कच्चे आम का जूस लेने की सलाह दी है. साथ ही बाहर के पेय में इस्तेमाल होने वाली बर्फ से सावधानी बरतने को कहा है.
* हेल्थ पर फोकस
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग अब कम शक्कर वाले फलों के जूस, फ्लेवर्ड छाछ और घरेलू पेय को अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं. इससे न केवल शरीर हाइड्रेट रहता है, बल्कि गर्मी से भी राहत मिलती है. भीषण गर्मी के बीच लोगों का रुझान अब हेल्दी और नेचुरल ड्रिंक्स की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से भी एक सकारात्मक संकेत है.

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