शिंदे सेना के नेता व महायुति में भाजपा कहां तक स्विकार करेंगे बच्चू कडू को?
‘सामाजिक’ प्रहार से राजनीति कैसे होगी अलग

अमरावती/दि.1- प्रहार जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व राज्यमंत्री बच्चू कडू का शिंदे गुट वाली शिवसेना में प्रवेश भले ही ‘सरप्राईज’ नहीं हैं. परंतु विदर्भ की राजनीति में इस प्रवेश के दुरगामी परिणाम दिखाई देंगे, ऐसा माना जा रहा हैं. यद्यपी अब बच्चू कडू की प्रहार जनशक्ति पार्टी द्बारा सामाजिक संगठन के तौर पर काम करने की बात कहीं गई हैं. परंतु सबसे बडा सवाल यह हैं कि राजनीति से सामाजिक प्रहार अलग कैसे रहेगा और इससे भी बडा सवाल यह है कि शिंदे सेना के स्थानीय से लेकर राज्यस्तर के नेताओं सहित महायुति का नेतृत्व कर रहीं भाजपा द्बारा बच्चू कडू को कैसे स्विकार किया जाएगा.
उल्लेखनीय हैं कि मुलत: शिवसैनिक रहनेवाले बच्चू कडू ने प्रहार संगठन के जरिए अपनी स्वतंत्र पहचान तैयार की और अब एक बार फिर शिवसेना में वापीस आते हुए उन्होंने एक राजनीतिक वर्तुल को पूरा कर लिया. महायुति के भीतर चल रही शह और मात वाली राजनीति में बच्चू कडू के तौर पर भाजपा का मजबुत गढ रहनेवाले विदर्भ क्षेत्र में एकनाथ शिंदे को एक मजबूत मोहरा मिल गया हैं. परंतु यह भी संदेह हैं की बच्चू कडू एवं प्रहार की आक्रामक शैली की वजह से महायुति में तनाव भी पैदा हो सकता हैं.
अमरावती जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक का अध्यक्ष पद हो या फिर अचलपुर के विधायक प्रवीण तायडे के भाई की हत्या का षडयंत्र रचने का आरोप हो, बच्चू कडू को घेरने का एक भी मौका भाजपा नहीं छोड रही. साथ ही राणा दंपति व बच्चू कडू के बीच चल रहे संघर्ष में राणा दंपति भी भाजपा की ओर से ताकद व मदद दी जाती हैं. इसी कारण के चलते बच्चू कडू ने एकनाथ शिंदे को नजदीक करने एवं इसके लिए प्रहार के राजनीति शस्त्र को म्यान करने का निर्णय लिया. यह स्पष्ट हैं.
ज्ञात रहे की भाजपा में विधान परिषद की उम्मीदवारी देते समय पूर्वी विदर्भ से संजय भेंडे का चयन किया. परंतु पश्चिम विदर्भ की अनदेखी की गई. वहीं एकनाथ शिंदे ने बच्चू कडू के रूप में इसी मौके को साधा और एक तरह से भाजपा के सामने चुनौती खडी की. ऐसे समय महायुति का हिस्सा बनने के चलते यदि बच्चू कडू की आक्रामकता कम होती है तो वे भाजपा द्बारा स्विकार किए जाएंगे, लेकिन बच्चू कडू अपने मुल स्वभाव को बदलेंगे इसकी संभावना कम हैं. ऐसे में बच्चू कडू महायुति के साथ ताल-मेल बिठाते है या फिर महायुति को झटके देते हैं, इस बात की ओर सभी की निगाहे लगी हुई हैं.
* शिंदे सेना के नेताओं में अस्वस्थता
चार बार विधायक, एक बार राज्यमंत्री रह चुके बच्चू कडू ने किसानों व खेतीहर मजदूरों की समस्याओं को हल करने के लिए खडे किए गए अपने प्रहार संगठन की ताकत और अपने द्बारा किए गए आंदोलनों के दम पर सरकार को कई निर्णय लेने पर मजबूर किया हैं और जमीन से जुडे नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई हैं. परंतु अब यही बात उनके लिए शिंदे सेना में दिक्कत और मुसीबत साबित हो सकती हैं.
*शिंदे सेना के नेताओं को जबरदस्त बेचैनी
एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के विदर्भ से विधानसभा में चार व विधानपरिषद में दो विधायक हैं. जिसमें से संजय राठोड व एड. आशीष जयस्वाल को मंत्री पद मिला हैं. परंतु इसमें से किसी भी नेता को वैदर्भीय चेहरा नहीं कहा जा सकता और इसमें से किसी भी नेता की पहचान सडक पर संघर्ष करनेवाले नेता के तौर पर नहीं रही. शिंदे सेना से वास्ता रखनेवाले केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव को अपना ‘प्रतापगढ’ अभेद्य रखने में ही ज्यादा रूची हैं. साथ ही इन सभी नेता को अब कही न कही यह डर भी सता रहा है कि बच्चू कडू के शिंदे सेना में आ जाने की वजह से अब उनके जिले में बच्चू कडू के प्रहारियों का वर्चस्व बढेगा और उन्हें प्रहार संगठन की चुनौतियों का सामना करना पडेगा. संभवता यही वजह है कि शिंदे सेना के नेताओं में इस समय जबरदस्त बेचैनी हैं.
* अचलपुर में भी नए संघर्ष के संकेत
उल्लेखनीय हैं कि अचलपुर निर्वाचन क्षेत्र से लगातार चार बार विधायक निर्वाचित हुए बच्चू कडू को पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रवीण तायडे ने पराजीत किया था तथा बच्चू कडू लगातार पांचवी बार विधायक बनने से चुक गए. भाजपा के स्थानीय पदाधिकारियों एवं बच्चू कडू के बीच तब से लेकर अब तक लगातार संघर्ष चल रहा हैं. वहीं अब बच्चू कडू का शिंदे सेना में प्रवेश होने तथा उन्हें विधान परिषद में उम्मीदवारी मिलने के चलते बच्चू कडू का एक बार फिर विधायक बनना तय हैं. साथ ही यह भी माना जा रहा हैं कि संभवत: उन्हें शिंदे सेना के कोटे से मंत्री भी बनाया जा सकता हैं. जिसे देखते हुए अब अचलपुर निर्वाचन क्षेत्र में विधायक प्रवीण तायडे तथा बच्चू कडू के बीच वर्चस्व को लेकर नई लढाई छिडने के भी पूरे आसार हैं.
ज्ञात रहे कि महायुति में शिंदे सेना व भाजपा भले ही एक साथ हैं, परंतु अचलपुर में स्थिति पूरी तरह से अलग हैं. इस निर्वाचन क्षेत्र में बच्चू कडू के तौर पर एक समान अंतर सत्ता केंद्र बनने के बाद स्थानीय स्वायत्त निकायों के आगामी चुनावों में महायुति केे भीतर जबरदस्त खिचतान होना अटल माना जा रहा हैं.
ध्यान देनेवाली बात यह हैं कि विगत कुछ दिनों से अचलपुर निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक संघर्ष व्यक्तिगत स्तर तक जा पहुंचा हैं. विधायक तायडे के चचेरे भाई ने पूर्व मंत्री बच्चू कडू पर खुद को जान से मार देने की साजीश रचने का आरोप लगाया था और सबुत के तौर पर एक ऑडियो क्लिप भी प्रस्तुत की गई और इसके बाद बच्च्ाू कडू के खिलाफ अपराधिक मामला भी दर्ज किया गया. इस गंभीर आरोप के बाद भाजपा विधायक प्रवीण तायडे और बच्चू कडू के बीच दरार और अधिक बडी हो गई. वहीं अब बच्चू कडू ने शिवसेना में प्रवेश कर लिया हैं तथा वे एक तरह से महायुति में शामिल हो गए हैं. इसके चलते अब विधायक प्रवीण तायडे व बच्चू कडू एक ही पाले में हैं. ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इन दोनों नेताओं के बीच आपसी सामंजस्य किस तरह का रहता हैं.





