कहीं कुत्ता नसबंदी के नाम पर फिर शुरू न हो भ्रष्टाचार का खेल

मनपा में 5 हजार आवारा कुत्तों के निर्बीजीकरण का बनाया मेगा प्लान

* शहर के 5 जोन से 5 हजार कुत्तों को पकडकर किया जाएगा निर्वीलीकरण
* कुत्ता नसबंदी के लिए नई निविदा प्रक्रिया शुरू, कई इच्छूक संस्थाएं ठेके की कतार में
* पुराने अनुभवों को देखते हुए नए ठेके को देखा जा रहा संदेह की दृष्टी से
अमरावती/ दि.7- विगत कुछ माह से अमरावती शहर में आवारा कुत्तों का जबरदस्त उत्पात व हैदोस चल रहा हैं. साथ ही श्वानदंश की घटनाओंं में भी काफी अधिक वृध्दि हो चली हैं तथा शहर के कई क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के झूंड घुमते दिखाई देना आम बात हो गई हैं. जिसके चलते आम शहरवासी की सुरक्षा खतरे में हैं. इसी बात के मद्देनजर आवारा कुत्तो की संख्या को नियंत्रित करने एवं शहरवासियों को आवारा कुत्तों की समस्या से छुटकारा दिलाने की मांग जोर पकड रही थी. जिसे ध्यान में रखते हुए अब अमरावती महानगरपालिका द्बारा आवारा कुत्तों को पकडकर उनका निर्बीजीकरण करने हेतु नए सीरे से निविदा जारी की गई हैं. इसके जरीए शहर के पांच जोन से 5 हजार आवारा कुत्तों को पकडकर उनकी निर्बीजीकरण शल्यक्रिया करने हेतु 82 लाख 50 हजार रुपए का लागत मूल्य तय किया गया हैं. जिसे देखते हुए कई इच्छूक एजेंसीया इस काम का ठेका हासिल करने हेतू स्पर्धा में हैं. लेकिन यहां पर इस बात की भी अनदेखी नहीं की जा सकती कि शहर में इससे पहले भी मनपा द्बारा आवारा कुत्तों को पकडने हेतु लाखों रुपए मूल्य का ठेका दिया गया था. जिसका शहर में आवारा कुत्ता की संख्या पर कोई असर नहीं पडा. उल्टे आवारा कुत्तो की संख्या घटने की बजाय पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ गई. जिसका सीधा मतलब है कि कुत्ता नसबंदी का काम ऑपरेशन टेबल पर करने की बजाय केवल कागजी खानापूर्ति करते हुए दस्तावेजों पर ही किया गया. ऐसे में इस बात को लेकर भी संदेह जताया जा रहा हैं कि कही पिछले ठेके की तरह ही नए ठेके में काम न हो और कागजी खानापूर्ति के नाम पर जनता की गाढी कमाई से मिले टैक्स के पैसों में से 82 लाख 50 हजार रुपए की नाहक बर्बादी न हो.
बता दें कि मनपा द्बारा इससे पहले भी शहर की सडकों पर आवारा घुमनेवाले कुत्तों को पकडकर उनकी नसबंदी करने का काम ठेके पर एक निजी एजेंसी को दिया गया था. परंतु उक्त एजेंसी द्बारा संबंधित महकमे के अधिकारियों के साथ मिली भगत करते हुए प्रत्यक्ष काम करने की बजाय आपस में मिलजूलकर जबरदस्त ढंग से चांदी काटी गई थी. यही वजह रही की शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित होने की बजास साल-दरसाल आवारा कुत्तों की जमकर पैदावार होने के साथ ही उनकी संख्या में जबरदस्त बढोत्तरी भी होती चली गई और आज आलम यह हैं कि शहर के तमाम गली मोहल्लों व चौक चौराहो में आवारा कुत्तों के झुंड के झुंड घुमते दिखाई देते हैं. जो इस बात का भी सबुत है कि कुत्ता नसबंदी के लिए इससे पहले निविदा जारी होने के बावजूद शहर में कुत्ता नसबंदी को लेकर प्रभावी तरीके से कोई भी काम नहीं हुआ हैं. वहीं विगत आमसभा में आवारा कुत्तों की समस्याकों लेकर पार्षदों द्बारा मनपा प्रशासन को जबरदस्त ढंग से आडे हाथ लिए जाने के बाद अब मनपा प्रशासन द्बारा कुत्ता नसबंदी के काम हेतु नए सीरे से निविदा जारी की गई हैैं और इस काम के लिए 82 लाख 50 हजार रुपए की निधि का प्रावधान भी किया गया हैं.
जाहीर सी बात है कि कुत्ता नसबंदी का ठेका प्राप्त करनेवाली संस्था या एजेंसी को मोटे तौर पर लगभग 1 करोड रुपयो की आय होना तय हैं. जिसे ध्यान में रखते हुए कई इच्छूक संस्थाएं इस काम का ठेका हासिल करने के लिए निविदा प्रक्रिया के तहत प्रतिस्पर्धा में हैैं. जिनके भाग्य का फैसला आगामी 18 मई को हो जाएगा. क्योंकि 18 मई तक निविदा दाखिल करने की अंतिम मुदद हैं. जिसके बाद निविदा हेतु चयनीत संस्था को प्रत्यक्ष काम शुरू करना होगा.
* पांच जोन से उठाए जाएंगे 5 हजार कुत्ते
आवारा कुत्तो के निर्बीजीकरण हेतु मनपा द्बारा बनाए गए मेगा प्लान के मुताबिक शहर के अलग-अलग पांचो जोन से करीब 5 हजार आवारा कुत्तों को पकडकर उनकी वंध्यत्व शल्यक्रिया की जाएगी. साथ ही उन्हें एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाते हुए शल्यक्रिया पश्चात उनके औषधोपचार व आहार की व्यवस्था भी चयनीत एजेंसी को करनी होगी. यह पूरी प्रक्रिया सुप्रिम कोर्ट की ओर से आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने हेतु तय की गई गाईडलाईन के अनुसार पूरी करनी होगी.
* सुप्रीम कोर्ट की गाईडलाईन का ही लिया जाता सहारा
यहां यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि शहर में आवारा कुत्तो की बढती संख्या को लेकर जब भी मनपा प्र्रशासन को जनप्रतिनिधियों द्बारा घेरने का प्रयास किया गया, तब-तब मनपा प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय गाईडलाईन की आड लेकर खुद को यह कहते हुए बचाने का प्रयास किया कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से बंधे हुए हैं तथा आवारा कुत्तों के साथ किसी भी तरह की क्रुरता नहीं कर सकते. हालांकि ऐसा कहते समय मनपा के स्थानीय अधिकारी बडे ही सुविधाजनकर ढंग से इस बात की अनदेखी कर देते है कि कुछ समय पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले की सुनवाई के दौरान श्वानदंश के लगातार बढते मामलों पर चिंता जताई थी और इनसानों की जान को किमती बताया था.
* मनपा में कुत्तों के नाम पर चल रहा बंदरबांट का खेल
यहां यह कहना कतई अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं होगा कि अमरावती महानगर पालिका में कुत्ता नसबंदी के नाम पर आपसी मिलीभगत और पैसों की बंदरबांट का जमकर खेल चलता आया हैं. जिसके तहत कोई काम न करते हुए केवल कागजों पर ही काम पूरा दिखाकर लाखों रुपए के देयकों का भुगतान भी जारी किया गया. इसके लिए निश्चित रूप से संबंधित अधिकारी को भी लक्ष्मीदर्शन कराए गए और संबंधित अधिकारियों ने भी बहती गंगा में जमकर अपने हाथ धोएं.
* भ्रष्टाचार की रकम का भी एडवांस पेमेंट
बेहद विश्वसनीय सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक शहर में आवारा कुत्तो की संख्या को नियंत्रित रखने और शहर को आवारा कुत्तों की समस्या से मुक्त कराने की जिम्मेदारी रहनेवाले एक अधिकारी द्बारा इससे पहले वाले ठेकेदार से ठेका दिलाने की एवज में अपने हिस्से की रकम का एडवांस पेमेंट मांगा गया था और जब संबंधित ठेकेदार ने उस समय अपनी आर्थिक स्थिति ठिकठाक नहीं रहने की बात कहते हुए पैसो को इंतजाम हेतु कुछ अतिरिक्त मोहलत मांगी थी. तो उस जिम्मेदार अधिकारी ने उक्त ठेकेदार से यहां तक कहा था कि तुम अपने बच्चे की किडनी बेचकर पैसे लाओ लेकिन मुझे मेरा हिस्सा टाईम पर चाहिए, इससे ज्यादा और इससे आगे मुझे नहीं मालूम. उक्त अधिकारी के मुह से यह बात सुनकर वह ठेकेदार सन्न रह गया और उसने उसकी शिकायत तत्कालीन मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा से भी की थी. जिसके चलते उक्त अधिकारी की तत्कालीन आयुक्त शर्मा के सामने पेशी भी हुई थी, ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मनपा द्बारा कुत्ता नसबंदी के लिए अमल में लाई जा रही नई निविदा प्रक्रिया में उक्त अधिकारी द्बारा क्या भूमिका निभाई जाती हैं.

* काम करने का दम हो, तो ही निविदा उठाएं, कोई पैसे मांगे तो तुरंत मुझे सुचित करें
इस पूरे मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मनपा के स्विकृत पार्षद अनिल अग्रवाल ने कहां कि खुद उन्होंने ही पिछली आमसभा में आवारा कुत्तो की लगातार बढती संख्या व समस्या का मुद्दा उठाया था तथा उनके द्बारा पूछे गए सवालों पर मनपा प्रशासन की ओर से बेहद टालमटोल वाले जवाब दिए गए थे. जिसके चलते उन्होंने व उनके साथी पार्षदों ने मनपा प्रशासन को जबरदस्त ढंग से आडे हाथ लिया था. यही वजह है कि अब मनपा द्बारा कुत्ता नसबंदी के लिए नए सिरे से निविदा जारी की जा रही हैं. लेकिन वे अपनी ओर से स्पष्ट कर देना चाहते है कि जिस एजेंसी या संस्था के पास वाकई काम करने की क्षमता व इच्छा है, उसी एजेंसी या संस्था में इस काम का ठेका हासील करना चाहिए, क्योंकि उनकी जनसुरक्षा से जुडे इस काम पर पूरी नजर रहेगी और वे इस काम में कोई भी कोताही बर्दाश्त नहीं करेंगे, ऐसे में जिसकी काम करने की मानसिकता हो केवल वही व्यक्ति या संस्था इस काम के ठेके में अपना हाथ डाले.
इसके साथ ही पार्षद अनिल अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कुत्ता नसबंदी का ठेका दिलाने हेतु मनपा के किसी अधिकारी द्बारा किसी व्यक्ति या एजेंसी से पैसों की मांग की जाती हैं तो ऐसे व्यक्ति या एजेंसी ने तुरंत उनके आकर संपर्क करना चाहिए और इस काम के लिए किसी को कोई पैसा नहीं देना चाहिए. क्योंकि अगर किसी ने गलत मार्ग का अवलंब कर यदि बिना काम किए पैसा कमाने की नियत से यह ठेका हासिल किया तो उसे यह याद रखना होगा कि इस काम पर पार्षद अनिल अग्रवाल की बेहद पैनी नजर बनी रहेगी और इस काम में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त भी नहीं किया जाएगा.

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