‘माउली’ की मानस पुत्री शिवानी का हुआ शाही अंदाज में विवाह

हाथी पर सवार दुल्हन की निकली भव्य-दिव्य बारात

* ढोल-ताशों की गुंज व आतिशबाजी की रही जबरदस्त धूम
अमरावती/दि.8- इस समय पूरे शहर में विगत विवाह 6 मई की रात हुए एक बेहद आलीशान व शाही विवाह समारोह की चर्चा हैं. विगत बुधवार को कौंडण्यपुर स्थित श्री रूक्मिणी विदर्भपीठ के पिठाधिश्वर अनंत श्री विभूषित जगदगुरू रामानंदाचार्य श्री रामराजेश्वराचार्य (माउली सरकार) की मानस कन्या शिवानी देशमुख का बेहद पारंपरिक व राजसी अंदाज में विवाह हुआ. जिसके लिए रंग बी रंगी रोशनी, ढोल ताशे की गुंज और जबरदस्त आतिशबाजी के बीच दुल्हन बनी शिवानी को सुसज्जीत हाथी पर बिठाकर शाही बारात निकाली गई. यह बेहद अद्भुत व दुर्लभ नजारा देखकर हर कोई कुछ पल के लिए अपनी ही जगह पर ठिठककर रह गया और कई लोगों ने इस ऐतिहासिक दृष्य को अपने मोबाईल कैमरो के जरिए फोटो व वीडियो के तौर पर कैद किया.
बता दें कि जगदगुरू माउली सरकार की मानस पुत्री शिवानी देशमुख का विवाह यवतमाल निवासी गौरव मोर के साथ विगत बुधवार 6 मई को नागपुर रोड स्थित मणिरत्नम रिसोर्ट में हुआ. जिसके लिए बेहद भव्यदिव्य तैयारियां की गई थी. साथ ही इस विवाह समारोह में विभिन्न क्षेत्रों से वास्ता रखनेवाले कई नामांकित व्यक्तियों एवं बडी-बडी हस्तियों की उपस्थिति रही. इस विवाह समारोह में सबसे बडा आकर्षण दुल्हन बनी शिवानी की शाही बारात रही. जिसमें पारंपारिक वेशभूषा के साथ सजी दुल्हन शिवाजी देशमुख किसी राज घराने की राजकुमारी की तरह प्रतिक हो रही थी. जिसे रंगीन वस्त्र, सुनहरी सजावट व आकर्षित आभूषणों से हाथी पर आसिन कराया गया था और हाथी पर स्थापित राजसी हौद के साथ एक विशालकाय छत्र भी लगाया गया था. जिसके चलते हाथ के साथ निकली दुल्हन की बारात को देखकर ऐसा लग रहा था मानो अमरावती की सडकों पर सदियों पुरानी शाही परंपरा जीवित हो उठी हैं.
* दक्षिण भारतीय बैंड व शहनाई के मंगल स्वर
दुल्हन शिवानी की शाही बारात के आगे दक्षिण भारतीय बैंड अपनी विशेष छटा बिखेर रहा था. साथ ही वातावरण में शहनाई की मधूर धुन अध्यात्मिकता घोल रही थी. इसके साथ ही रंग-बिरंगी रोशनी तथा आतिशबाजी से पूरा परिसर रोशन था. इस विवाह समारोह में भारतीय संस्कृति की परंपरा एवं आध्यात्मिक आस्था का विशेष संगम दिखाई दिया. खास बात यह भी रही कि इस विवाह समारोह में विभिन्न क्षेत्रों से वास्ता रखने वाले विशिष्ट व अतिविशिष्ट गणमान्यों के साथ ही अलग-अलग शहरों से आए साधू-संतो व महंतों की भी उपस्थिति रही. हाथी पर निकली दुल्हन की बारत ने शहरवासियों को जबरदस्त ढंग से आकर्षित किया. जिसे देखने हेतु सडक के दोनों ओर लोगबाग अपने परिवारों व बच्चों के साथ कई घंटों तक खडे रहे तथा इस उद्भुत द़ृष्य को देखकर आनंदीत होते रहे. इस समय मौके पर उपस्थित कई बुजूर्गों ने इसे कई वर्षों बाद देखा गया अद्भुत नजारा बताया.
कुल मिलाकर इस शाही विवाह समारोह के जरिए अमरावती ने एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक विरासत व परंपराओं की झलक देखी तथा यह आयोजन शहर के इतिहास में एक यादगार पल बनकर दर्ज हो गया.

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