मोबाइल के ज़माने में देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा ज़रूरी
सुसंस्कार शिविर में लोक कलाकार प्रमोद पोकले का कथन

तिवसा/दि.14- अगर बच्चों को मोबाइल फ़ोन से दूर रखना चाहते, तो उन्हें अनुशासन दो और अगर उनको मोबाइल गेम खेलने से दूर रखना चाहते, तो उन्हें सुसंस्कार दो इस सोच को अपनाते हुए, तालुका के गुरुकुंज-मोझरी निकटस्थ राष्ट्रसंत अध्यात्म केंद्र, दासटेकडी में स्टूडेंट्स को न स़िर्फ धार्मिक शिक्षा दी जा रही है. बल्कि साइंस पर आधारित संस्कृति की शिक्षा भी दी जा रही है, जो उन्हें ज़िंदगी में सही दिशा देती है. आज सही मायने में सुसंस्कारों के साथ-साथ नई पीढ़ी में आध्यात्मिकता, नैतिक मूल्यों, अनुशासन, शारीरिक, मानसिक, सांस्कृतिक विकास और सामाजिक प्रतिबद्धता पर खास ज़ोर देकर देश, धर्म और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देना अत्यंत जरूरी है, ऐसा कथन दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो के लोक कलाकार प्रमोद पोकले गुरुजी ने भजनों के ज़रिए कहा.
श्री गुरुदेव राष्ट्रधर्म प्रचार संस्था द्वारा आयोजित इस शिविर में विदर्भ के अलग-अलग जिलों से 103 कैंपर्स ने हिस्सा लिया और प्रमोद पोकले गुरुजी ने भजनों के ज़रिए नशा-मुक्त जीवन, राष्ट्रीय एकता, स्वच्छता और संस्कृति के बारे में मार्गदर्शन किया. इस निवासी कैंप में सुबह 4:30 बजे से रात 9:30 बजे तक, सेवाभावी शिक्षकों द्वारा सूर्य नमस्कार, योगासन, प्राणायाम और भजन-संगीत की बेसिक शिक्षा दी जा रही है. साथ ही आदर्श दिनचर्या, महापुरुषों के चरित्र अध्ययन, आत्मनिर्भरता, देशभक्ति, सेवा, अनुशासन, अंतर्निहित कला का दर्शन, नशा-मुक्त जीवन, धार्मिक ग्रंथों की पहचान, व्यक्तित्व विकास, गलत रीति-रिवाजों और अंधविश्वासों को खत्म करना, बौद्धिक और ताकत के विकास के लिए योगासन, सूर्य नमस्कार, श्रमदान जैसे कई विषयों पर मार्गदर्शन दिया जा रहा है. आचार्य हरिभाऊ वेरुलकर गुरुजी के नेतृत्व में लगभग 21 दिनों तक चलने वाले इस कैंप की सफलता के लिए शिक्षक रवींद्र ढवले, रूपेश मोरे, कुणाल खडसे, गणेश दरवरे, मयूर इंगले, सागर मेहकरे, देवागुरु जांभुले, नयन प-हाड, पुष्कर गुडधे, चेतन पारधी, कुलदीप बोधाने, कुंदन गुडधे, छगनराव मोरे, जबकि व्यवस्थापन रवींद्र वानखड़े संभाल रहे हैं.





