मनपा में तकनीकी प्रकरणों को अतिरिक्त आयुक्त के पास भेजने के आदेश पर उठे सवाल

एडीईपी विभाग की भूमिका कम करने का आरोप, आदेश पर पुनर्विचार की मांग तेज

* क्रेडाई अमरावती ने आयुक्त वर्षा लढ्ढा को सौंपा ज्ञापन, त्वरीत कदम उठाने की मांग
अमरावती/दि.15- अमरावती महानगरपालिका में तकनीकी स्वरूप के मामलों को अतिरिक्त आयुक्तों के माध्यम से भेजने संबंधी नए प्रशासनिक आदेश को लेकर मनपा के तकनीकी विभागों में असंतोष और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है. इस संबंध में अमरावती क्रेडाई द्बारा मनपा आयुक्त वर्षा लढ्ढा को एक विस्तृत निवेदन सौंपकर आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है.
अमरावती क्रेडाई के अध्यक्ष राजन पाटिल की अध्यक्षता के तहत आयुक्त वर्षा लढ्ढा से मिलने गए प्रतिनिधि मंडल द्बारा सौंपे गए निवेदन में कहा गया है कि महानगरपालिका में नगर रचना तथा तकनीकी मामलों के लिए शासन द्वारा सहाय्यक संचालक, नगर रचना (एडीटीपी) पद उपलब्ध कराया गया है, जो तकनीकी सलाहकार एवं विभाग प्रमुख के रूप में कार्य करता है. महाराष्ट्र शासन के नगर विकास विभाग के वर्ष 2010 के शासन निर्णय के अनुसार विकास नियंत्रण, बांधकाम अनुमति, विकास प्रारूप, एमआरटीपी एक्ट अंतर्गत तकनीकी परीक्षण तथा अभिप्राय जैसी जिम्मेदारियां तकनीकी अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आती हैं. निवेदनकर्ताओं का यह भी कहना रहा कि महाराष्ट्र प्रादेशिक व नगर रचना अधिनियम (एमआरटीपी एक्ट) में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि तकनीकी अधिकारियों द्वारा परीक्षण और हस्ताक्षर के बाद संबंधित प्रकरण अतिरिक्त आयुक्तों को भेजे जाएं. अमरावती महानगरपालिका की स्थापना के बाद वर्ष 1982-83 से अब तक सभी तकनीकी प्रकरण एडीटीपी विभाग द्वारा जांचकर सीधे आयुक्त के समक्ष मंजूरी अथवा नामंजूरी के लिए प्रस्तुत किए जाते रहे हैं.
इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि हाल ही में जारी प्रशासनिक आदेश में विभिन्न विभागों को अतिरिक्त आयुक्तों के नियंत्रण में बांटा गया है, जिसके तहत नगर रचना, अतिक्रमण, बाजार व परवाना, उद्यान, शिक्षण व क्रीड़ा जैसे विभागों को भी अतिरिक्त आयुक्त स्तर से जोड़ा गया है. इसी व्यवस्था के अंतर्गत तकनीकी मामलों को अतिरिक्त आयुक्तों के माध्यम से भेजने की प्रक्रिया लागू होने की चर्चा है. इस नए आदेश को लेकर तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच आश्चर्य और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है. निवेदन में कहा गया है कि आयुक्त यदि चाहें तो एमआरटीपी एक्ट के तहत तकनीकी अधिकार संबंधित तकनीकी अधिकारी को सौंप सकते हैं, लेकिन तकनीकी परीक्षण के बाद उन अधिकारों को किसी गैर-तकनीकी अधिकारी के माध्यम से संचालित करने का स्पष्ट कानूनी प्रावधान अधिनियम में उपलब्ध नहीं है.
निवेदनकर्ताओं ने यह भी कहा कि वर्तमान कार्यप्रणाली में एडीटीपी विभाग तकनीकी परीक्षण और हस्ताक्षर करने के बाद प्रकरण सीधे अंतिम प्राधिकृत अधिकारी अर्थात आयुक्त के समक्ष भेजता रहा है. ऐसे में नई व्यवस्था न केवल परंपरागत प्रशासनिक प्रणाली से अलग है, बल्कि इससे निर्णय प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब और तकनीकी जवाबदेही प्रभावित होने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है. इस समय मनपा प्रशासन से यह मांग भी की गई कि तकनीकी प्रकरणों को अतिरिक्त आयुक्तों के पास भेजने संबंधी आदेश का पुनर्विचार कर पूर्ववत व्यवस्था बहाल की जाए, ताकि तकनीकी मामलों की प्रक्रिया सीधे एडीटीपी विभाग से आयुक्त तक जारी रह सके.
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मनपा के तकनीकी और प्रशासनिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. अब निगाहें मनपा आयुक्त के निर्णय पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मांग पर क्या रुख अपनाता है.

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