जब प्रगणक बने देवदूत, वृद्ध महिला की बचाई जान

स्वस्तिक नगर की घटना

* वृद्ध पति के शव के पास बेहोश पडी थी महिला
* दोनों बेटे करते हैं अन्य शहरों में जॉब
अमरावती/दि.26 – देश की जनगणना का पहला चरण प्रारंभ हो गया है. घरों की गणना कर वहां चिन्हीत किया जा रहा हैं. ऐसे ही प्रगणक गत शनिवार स्थानीय स्वस्तिक नगर में एक वृद्धा के प्राण बचाने में सफल हुए है. हालांकि वृद्धा अभी भी वालकट कम्पाउंड के अस्पताल में मृत्यु से संघर्ष कर रही है. किंतु उससे भी बडी विपदा यह थी कि, वृद्धा के यजमान की घर में ही अचानक मृत्यु हो गई और उनके पार्थिव के पास वृद्ध महिला बेहोश पडी थी. प्रगणकों ने समय-सूचकता, तत्परता व मानवीयता का परिचय दिया. जिससे वृद्ध महिला के प्राणों की रक्षा हो सकी.
जानकारी के अनुसार प्रगणक गत शनिवार सुबह के सत्र में घर चिन्हीत करने निकले थे. उनमें केशव पंचारिया, मनोज वाकोडे, वैशाली नालसे का समावेश था. वैशाली नालसे ने स्वस्तिक नगर में घर को चिन्हीत किया, तब उन्हें खिडकी से भीतर सभी पंखे और लाइट जलते नजर आए. उन्होंने पडोस के लोगों को सूचित किया. बताया गया कि, वृद्ध दंपति रहते हैं. आनन-फानन में घर का दरवाजा तोडकर प्रगणक और पास-पडोसी घर में गए, तो गृहस्वामी वृद्ध मृतावस्था में गिरे दिखाई दिए. पास ही वृद्ध महिला अचेत पडी थी.
* हो गया था ऑक्सीजन कम
दौडकर दोनों को चेक किया, तो महिला की सांसे चल रही थी. जबकि वृद्ध की मृत्यु हो गई थी. इतना ही नहीं तो वृद्ध की जान गए दो दिन के करीब बीत गए थे. पार्थिव खराब होना शुरु हो गया था. महिला की दशा बडी गंभीर थी. उनके शरीर में ऑक्सीजन कम हो गया था. डिहाईड्रेशन भी हो गया था. तुरंत बगैर समय गंवाए अस्पताल में भर्ती किया गया. वहां उपचार शुरु करते ही चिकित्सकों ने बताया कि, थोडा और विलंब हो जाता, तो महिला की जान भी बच न पाती.
इधर वृद्ध दंपति के दोनों बेटों को खबर की गई. एक पुत्र पुणे में जॉब करते है. दूसरे अमेरीका में कार्यरत होने की जानकारी मिले. पुणे स्थित पुत्र को आनन-फानन में बुलाया गया. रविवार को वृद्ध का अंतिम संस्कार किया गया. जबकि वृद्धा को अस्पताल में दाखिल किया गया है. जहां उनकी दशा अभी भी गंभीर बताई जा रही है.
प्रगणक की इस तत्परता पर सर्वत्र सराहना हो रही है. साथ ही अमरावती शहर के एक बडे प्रश्न की ओर यह घटना इंगित कर रही है. जिसके अनुसार अमरावती में कई घरों में वृद्ध दंपति यहां निवास करते हैं, उनकी संताने सुदूर बडे शहरों में रहती है. जॉब के लिए उन्हें घर से दूर रहना पडता है. अमरावती में आईटी पार्क और उद्योगों के आगमन की बडी लफ्फाजी हो रही है. न जाने और कितने वर्ष यहां औद्योगिकीकरण को लगेंगे.

Back to top button