मोर्शी में संतरा उत्पादक किसानों को सिर्फ 6 घंटे बिजली
सरकार पर किसानों के साथ क्रूर मजाक का आरोप

* हजारों किसानों को करोड़ों के नुकसान की आशंका, आंदोलन की चेतावनी
मोर्शी/दि.28- संतरा उत्पादन के लिए राज्यभर में प्रसिद्ध मोर्शी तहसील के किसानों को भीषण गर्मी के दौरान कृषि पंपों के लिए केवल 6 घंटे बिजली आपूर्ति किए जाने पर राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस ने सरकार और महावितरण पर तीखा हमला बोला है. राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस के मोर्शी तालुका अध्यक्ष रुपेश वालके ने आरोप लगाया कि सरकार संतरा उत्पादक किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रही है.
उन्होंने कहा कि बढ़ते तापमान के बीच संतरा बागानों को समय पर और पर्याप्त पानी देना बेहद जरूरी है, लेकिन 27 मई से किसानों को सिर्फ 6 घंटे बिजली मिल रही है. इससे हजारों एकड़ में फैली संतरा बागानें संकट में आ गई हैं. कई किसानों के लिए पूरी बाग को पानी देना संभव नहीं हो पा रहा, जिसके कारण फल गिरने, पेड़ों पर तनाव बढ़ने, उत्पादन घटने और आगामी सीजन प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है. इस समय तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. ऐसे में नियमित सिंचाई नहीं होने से संतरा फसल को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है. किसानों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर तैयार किए गए बागानों को बचाने के लिए अब उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है.
रुपेश वालके ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ किसानों की आय बढ़ाने की बातें की जाती हैं, जबकि दूसरी तरफ खेती के लिए जरूरी बिजली ही उपलब्ध नहीं कराई जा रही. उन्होंने इसे किसान विरोधी नीति बताया. किसानों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि इतने बड़े संकट के बावजूद कोई भी उनकी समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दे रहा, जिससे किसानों में भारी नाराजगी है.
राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस ने मांग की है कि संतरा उत्पादक किसानों को तत्काल दिन में कम से कम 10 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति दी जाए. रुपेश वालके ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द मांग पूरी नहीं हुई तो महावितरण कार्यालय पर तीव्र जनआंदोलन किया जाएगा. उन्होंने कहा, मोर्शी के किसान भीषण गर्मी में अपनी फसल बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि मूकदर्शक बने हुए हैं. 10 घंटे की जगह केवल 6 घंटे बिजली देना किसानों को बर्बाद करने जैसा है. अगर प्रशासन ने तुरंत निर्णय नहीं लिया तो किसानों के रोष का सामना करना पड़ेगा.





