महावितरण की कार्यप्रणाली को लेकर नागरिकों में रोष
घंटों बिजली खंडित रहने से जनता बेहाल

* शहर में अपशब्दों में महावितरण का जताया जा रहा निषेध
अमरावती /दि.29 – शहर में पहली ही बारिश में फेल हुई महावितरण की व्यवस्था घंटों बिजली गुल रहने से जनता बेहाल है. हालात ऐसे बन चुके है कि, जनता अब अपने मुंह से तीखें और अपशब्दों में महावितरण कंपनी का निषेध व्यक्त कर रही है. महावितरण कंपनी को निर्लज्ज, नाकारा इन शब्दों से संबोधित किया जा रहा है.
गुरुवार 28 मई की शाम को शहरवासियों के मुंह से जो निकल रहा था, वह यहां लिखा नहीं जा सकता. महावितरण कंपनी अब महावितरण कम और महाविपत्तिकारक ज्यादा दिखाई देने लगी है.
* उमस से हुई हालत खराब
एक ओर घंटों बिजली खंडित होने से और दूसरी ओर बारिश केे बाद चिपचिप करती गर्मी और उमस से लोगों की हालत खराब हुई. लो वोल्टेज के कारण पंखे केवल औपचारिकता निभा रहे है. वहीं एसी, कूलर ने तो जैसे काम करने से इंकार कर दिया है. छोटे बच्चे, बुजुर्ग और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पडा. वहीं सभी लोग बिजली आने का इंतजार करते-करते महावितरण व्यवस्था को कोसते रहे.
* बारिश आई और बिजली गूल!
गुरुवार 28 मई की शाम जैसे ही शहर में मानसूनपूर्व बारिश ने दस्तक दी, वैसे ही महावितरण की लचर कार्यप्रणाली सामने आई. महावितरण की व्यवस्था ने घुटने टेक दिए. राजापेठ, रुक्मिणी नगर सहित शहर के कई इलाकों में अचानक बिजली गुल हो गई. लोग घंटों बिजली का इंतजार करते रहे. शायद अभी बिजली आ जाएगी, लेकिन बिजली के दर्शन तक नहीं हुए. बीच-बीच में कुछ मिनटों के लिए बिजली आई भी तो इतनी लो वोल्टेज के साथ की उसका आना और न आना बराबर ही रहा.
* मानसूनपूर्व मेंटेंनस के दावों की खुली पोल
कुछ ही दिनों पहले महावितरण कंपनी ने बडे-बडे दावे किए थे. जिसमें कहा गया था कि, मानसूनपूर्व सभी मेंटेंनस के कार्य पूर्ण कर लिए गए है. भारी बारिश में भी बिजली की व्यवस्था सुचारु रहेगी. लेकिन पहली ही बारिश ने महावितरण के सारे दावों की पोल खोल दी है. मानसून अभी शुरु भी नहीं हुआ और व्यवस्था की हालत ऐसी है, तो आगे मानसून में क्या होगा, ऐसा प्रश्नचिन्ह उपस्थित हो रहा है.
* आखिर कब तक सिर्फ दावे किए जाएंगे?
महावितरण कंपनी द्वारा आखिर कब तक सिर्फ दावे किए जाएंगे? हर वर्ष मानसून से पहले वहीं बयान, वहीं प्रेसनोट, वहीं आश्वासन और पहली बारिश आते ही वहीं अंधेरा, वहीं लो वोल्टेज और वहीं फोन बंद. स्थिति यह हो चुकी है कि, अब जनता को महावितरण के दावों पर भरोसा नहीं, बल्कि शक होने लगा है. अगर पहली ही बारिश में व्यवस्था चरमरा जाती है, तो फिर करोडों रुपए के मेंटेंनस और विकास कार्य आखिर कागजों में ही हो रहे है क्या? क्या सिर्फ बिल वसुलने के लिए ही महावितरण कंपनी सजग है और उसे जनता की परेशानियों से कोई लेना-देना नहीं है? शहर की जनता अब सिर्फ बयान नहीं, परिणाम चाहती है. क्योंकि बिजली अब सुविधा नहीं, बल्कि जिंदगी की बुनियादी जरुरत बन चुकी है.
* 2024 में निधि मंजूर, काम शुरु हुआ 2026 में
शहर की बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए फीडर और ट्रांसफार्मर हेतु साल 2024 में ही निधि मंजूर होने का दावा किया गया था. लेकिन जमिनी हकीकत यह है कि, काम अब 2026 में शुरु हो रहा है. आखिर दो वर्ष तक महावितरण करता क्या रहा? क्या सिर्फ फाइले घुमाता रहा? बैठकों में दावे करता रहा? या फिर जनता को अंधेरे में रखने की तैयारी करता रहा? यही वजह है कि, अब महावितरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे है. जनता पूछ रही है कि, बिजली विभाग लापरवाह है या पूरी तरह नाकारा?
* किसी का फोन बंद, तो कोई नॉट रिचेबल
स्थिति और भी हास्यस्पद तब हो गई, जब नागरिकों द्वारा शिकायत के लिए महावितरण के अधिकारियों और कर्मचारियों को फोन लगाया जाता है, तो किसी का फोन बंद, किसी का फोन नॉट रिचेबल और जो फोन लग भी गया, तो वहां से कोई सकारात्मक जवाब नहीं आता. अब सवाल यह उठ रहा है कि, जब बिजली विभाग जरुरत के समय फोन नहीं उठाता, तो फिर संपर्क नंबर जारी क्यों किए जाते है? क्या सिर्फ दिखावे के लिए? क्या जनता को यह एहसास दिलाने के लिए की व्यवस्था मौजूद है, जबकि हकीकत में सबकुछ भगवान के भरोसे चल रहा है.





