मेलघाट के ‘कोर एरिया’ में 11 वन्यजीवों की मौत

जल स्त्रोतों पर किया गया भयानक विष प्रयोग !

* ‘एनटीसीए’का विशेष केन्द्रीय पथक पहुंचा मौके पर
* पशु शल्य चिकित्सक ने किया विष प्रयोग का दावा
अमरावती/दि.29 – व्याघ्र संरक्षण की दृष्टि से बेहद नामांकित स्थान रहनेवाले मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प के सिपना वन्यजीव विभाग अंतर्गत आनेवाले चौराकुंड वन परिक्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज खबर सामने आयी है. जहां पर विगत एक सप्ताह के दौरान अति सरंक्षित ‘कोर एरिया’ में करीब 11 वन्यजीवों की संदेहास्पद मौत हुई है. यह नैसर्गिक मामला नहीं है. बल्कि बाघों का शिकार करने हेतु दर्ज स्त्रातों पर घातक विष प्रयोग किए जाने के चलते हुई घटना है. ऐसा संदेह वन्यजीव विशेषज्ञों द्बारा व्यक्त किया गया है. इसी बीच राष्ट्रीय व्याघ्र संवर्धन प्राधिकरण ने इस संवेदनशील घटना की अत्यंत गंभीर दखल ली है और बुधवार 27 मई को विशेष केन्द्रीय पथक ने सीधे मेलघाट पहुंचकर घटनास्थल का सुक्ष्म मुआयना किया.
* दो गर्भवती काकड सहित गर्भस्थ जीवों का अंत, खवल्या मांजर की भी शिकार
चौराकुंड वन परिक्षेत्र के बेहद दुर्गम इलाके में मृत पाए गये वन्यजीवों का मौके पर ही पोस्टमार्टम किया गया. इस समय पशु वैद्यकीय अधिकारियों के सामने आयी हकीकत काफी हृदयविदारक थी. मृत वन्यप्राणियों में चार जंगली भैसे, चार काकड (भेकर) व दो बंदरों का समावेश था. जिसमें से दो मादा काकड यानी भेकर पूरे दिन की गर्भवती पायी गई. जिनके गर्भ से शिशुओं की मौत हो गई थी.
मृत प्राणियों में बेहद दुर्लभ माने जाते खवल्या मांजर यानी पैंगोली का भी समावेश पाया गया है. उल्लेखनीय है कि पैंगोलिंग की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में करोडों रूपयों के लिए तस्करी की जाती है. साथ ही काकड यानी भेकर को बार्किंग डियर यानी भौंकने वाला हिरण कहा जाता है. ऐसी दुर्लभ प्रजातियों वाले कई प्राणी मेलघाट के जंगलाेंं में है. जिसमें से एक सप्ताह के दौरान 11 वन्यजीवों के मृत पाए जाने के चलते इस समय वन विभाग में अच्छा खासा हडकंप व्याप्त है.
* विष प्रयोग का अंदेशा, लेकिन रिपोर्ट लटकी
वन्यजीवों के शवों का पंचनामा करते समय और प्राथमिक जांच के दौरान ही पशु शल्य चिकित्सकों ने उन वन्यप्राणियों के शरीर एवं अंगों पर घातक जहर का प्रयोग होने की जानकारी को अधिकृत तौर पर दर्ज किया है तथा इन वन्यप्राणियों की मृत्यु अंतर्गत विषबाधा से ही होने की बात भी स्पष्ट तौर पर दिखाई दी है. ऐसे में अपराधियों द्बारा निश्चित तौर पर कौन से रासायनिक या जैविक जहर पर प्रयोग किया गया. यह जानने हेतु मृत वन्यप्राणियों के विसरा सेम्पल को फॉरेन्सिक प्रयोगशाला में भेजा गया है. लेकिन एक सप्ताह का समय बीत जाने के बावजूद प्रयोगशाला ही अंतिम रासायनिक रिपोर्ट अब तक वनविभाग को प्राप्त नहीं हुई है. उसके चलते उन वन्यप्राणियों की मौत की वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो पायी है.
चौराकुंड वन परिक्षेत्र में उजागर हुई घटना बेहद गंभीर है. हमने 22 जून व 23 मई को दो अपराधिक मामले दर्ज किए है. साथ ही एनटीसीए के पथक ने भी इस परिसर का दौरा किया है. फॉरेन्सिक क्लब की रिपोर्ट आते ही दोषियों के खिलाफ कडी कार्रवाई की जायेगी. एनटीसीए द्बारा जंगल परिसर के आसपास स्थित गांवों पर बारीकी के साथ नजर रखने के निर्देश दिए गये हैं.
– रविन्द्र खेरडे,
आरएफओ, चौराकुंड

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