रोहणखेडा पर्वतापुर ग्रामवासियों का भुसंपादन कार्यालय में ठिया
उपजिलाधिकारी से पुनर्वसन बाबत उचित कानूनी पक्ष न्यायालय में प्रस्तुत करने की मांग

अमरावती/दि.3– रोहनखेड़ा-पर्वतपुर गांव के नागरिकों ने उपजिलाधिकारी (भूमि अधिग्रहण) कार्यालय में हल्लाबोल कर ठीया जमा लिया. इस अवसर पर नागरिकों ने उपजिलाधिकारी को एक निवेदन सौंपकर अपने पुनर्वास से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय में प्रभावी और समयबद्ध कानूनी पक्ष रखने की मांग की है.
निवेदन में ग्रामीणों ने कहा है कि रोहनखेड़ा-पर्वतपुर गांव के पुनर्वास के लिए रामगांव क्षेत्र में भूमि चयनित की गई थी. इसके तहत गुट क्रमांक 43 की भूमि का अधिग्रहण कर उसका हस्तांतरण भी किया जा चुका है. साथ ही गुट क्रमांक 119 के अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण कानून की विभिन्न धाराओं के तहत अधिसूचनाएं प्रकाशित की गई थीं. ग्रामीणों का आरोप है कि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद मुआवजे संबंधी नोटिस जारी करना आवश्यक था, लेकिन प्रशासन ने इसमें जानबूझकर विलंब किया. इसके कारण संबंधित भूमि धारक किसान को न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का अवसर मिला. ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन का रवैया संबंधित भूमि धारक के पक्ष में दिखाई देता है, जिससे पुनर्वास प्रक्रिया प्रभावित हो रही है.
निवेदन में कहा गया है कि पेढ़ी बैराज परियोजना के लिए रोहनखेड़ा-पर्वतपुर के नागरिकों ने लगभग 850 एकड़ भूमि दी है. भूमि अधिग्रहण के कारण ग्रामीणों की खेती, रोजगार और आजीविका पर गंभीर असर पड़ा है. कई परिवारों के सामने जीवनयापन का संकट उत्पन्न हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के कारण विस्थापित होने वाले परिवारों को गुणवत्तापूर्ण और उचित पुनर्वास उपञ्च्लब्ध कराना उनका वैधानिक तथा संवैधानिक अधिकार है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण पुनर्वास की प्रक्रिया लंबित है और प्रभावित परिवारों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. रोहनखेड़ा-पर्वतपुर के नागरिकों ने मांग की है कि उनके पुनर्वास से जुड़े मामले में जिला प्रशासन उच्च न्यायालय में मजबूत, तथ्यात्मक और समय पर कानूनी पक्ष प्रस्तुत करे, ताकि पुनर्वास प्रक्रिया में आ रही बाधाएं दूर हों और विस्थापित परिवारों को शीघ्र न्याय मिल सके. ग्रामीणों ने प्रशासन से पुनर्वास कार्य में तेजी लाने तथा प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है.





