मॉसिकॉल की 25 एकड़ जमीन निजी बिक्री से बची, सरकारी उपयोग के लिए होगी आरक्षित
राजस्व मंत्री बावनकुले के निर्देश; नई मनपा इमारत, न्यायालयीन संकुल और सरकारी कार्यालयों के लिए बनेगा प्रस्ताव

* विधायक सुलभा खोडके और विधान परिषद सदस्य संजय खोडके के प्रयासों को मिली सफलता
मुंबई/अमरावती/ दि. 4 – अमरावती शहर के मध्य स्थित मॉसिकॉल (महाराष्ट्र राज्य तिलहन वाणिज्य एवं औद्योगिक महामंडल) की लगभग 25 एकड़ बहुमूल्य भूमि को निजी डेवलपर्स को बेचने की प्रक्रिया पर राज्य सरकार ने रोक लगा दी है. राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस जमीन को शासन के अधीन लेकर सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित करने के निर्देश दिए हैं. इस संबंध में 3 जून को मुंबई स्थित मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. अब इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा. यह निर्णय अमरावती की विधायक सुलभा खोडके तथा विधान परिषद सदस्य संजय खोडके द्वारा लगातार किए गए प्रयासों के बाद सामने आया है. दोनों जनप्रतिनिधियों ने शहर के मध्य स्थित इस महत्वपूर्ण भूमि को निजी हाथों में जाने से रोकने और जनहित के लिए सुरक्षित रखने की मांग प्रमुखता से उठाई थी.
* शहर के विकास के लिए महत्वपूर्ण है यह भूमि
अमरावती के मध्यवर्ती क्षेत्र में स्थित मॉसिकॉल की लगभग 22.92 एकड़ से 25 एकड़ भूमि वर्तमान में कपास पणन महासंघ के अधीन है. शहर के तेजी से बढ़ते विस्तार और भविष्य की प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए इतनी बड़ी भूमि शहर के केंद्र में उपलब्ध नहीं है. इसी कारण इस जमीन को सरकारी उपयोग और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए संरक्षित रखने की मांग लंबे समय से की जा रही थी. विधायक सुलभा खोडके ने 22 अप्रैल 2026 को राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को पत्र लिखकर इस भूमि को निजी बिक्री से बचाने और सार्वजनिक आरक्षण के लिए सुरक्षित रखने की मांग की थी. उन्होंने सुझाव दिया था कि इस जमीन का उपयोग जिला स्तर के सरकारी कार्यालयों, न्यायालयीन संकुल, प्रशासनिक भवनों और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए किया जा सकता है.
* मंत्रालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक
इस विषय पर 3 जून को मंत्रालय में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में विधायक सुलभा खोडके, विधान परिषद सदस्य संजय खोडके, विभागीय आयुक्त नयना गुंडे, जिलाधिकारी आशिष येरेकर, मनपा आयुक्त वर्षा लढ्ढा तथा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे. बैठक में भूमि की प्रस्तावित निजी बिक्री, शहर की भविष्य की आवश्यकताओं तथा सार्वजनिक उपयोग के विभिन्न विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की गई. जनप्रतिनिधियों द्वारा रखे गए सुझावों और जनहित के मुद्दों को स्वीकार करते हुए राजस्व मंत्री ने इस जमीन को शासन के अधीन लेने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए.
* नई मनपा इमारत के लिए 7 एकड़ भूमि
बैठक में भूमि के उपयोग की प्रारंभिक रूपरेखा भी तैयार की गई. इसके अनुसार सर्वे क्रमांक 57, प्लॉट क्रमांक 17 की लगभग 7 एकड़ (2.80 हेक्टेयर) भूमि अमरावती महानगरपालिका की नई प्रशासनिक इमारत के लिए आरक्षित किए जाने का प्रस्ताव रखा गया. शहर के मध्य और मुख्य मार्ग से सटी इस जगह पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त नई मनपा इमारत का निर्माण किया जा सकेगा. बताया गया कि जिलाधिकारी ने 14 मई 2026 को ही इस संबंध में प्रस्ताव शासन को भेज दिया था.
* न्यायालयीन संकुल और सरकारी कार्यालयों का मार्ग होगा प्रशस्त
नई मनपा इमारत के लिए भूमि आरक्षित किए जाने के बाद शेष भूखंड का उपयोग विभिन्न सरकारी कार्यालयों, न्यायालयीन संकुल, प्रशासनिक भवनों तथा अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के विकास के लिए किया जाएगा. इससे भविष्य में कई महत्वपूर्ण विभागों को एक ही परिसर में स्थापित करना संभव हो सकेगा और नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगी.
* 75 करोड़ रुपये के खर्च का भी उठा मुद्दा
बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि इस भूमि पर कपास पणन महासंघ द्वारा लगभग 75 करोड़ रुपये का खर्च किया गया है. हालांकि भूमि की बिक्री को लेकर महासंघ के संचालक मंडल द्वारा कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया था. इस तकनीकी पहलू को ध्यान में रखते हुए राजस्व मंत्री ने विभागीय आयुक्त को भूमि का कब्जा शासन को सौंपने संबंधी विस्तृत प्रस्ताव तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं.
* विधायक संजय खोडके के ध्यानाकर्षण के बाद रुकी बिक्री
गौरतलब है कि वर्ष 1993 में यह भूमि कॉटन फेडरेशन को हस्तांतरित किए जाने के बाद इसे बेचने के लिए दो बार निविदा प्रक्रिया शुरू की गई थी. इस मुद्दे को विधान परिषद सदस्य संजय खोडके ने 13 मार्च 2026 को बजट सत्र में लक्षवेधी सूचना के माध्यम से जोरदार तरीके से उठाया था. उन्होंने सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा था कि अमरावती शहर के केंद्र में स्थित इतनी महत्वपूर्ण भूमि को निजी हाथों में सौंपना जनहित के खिलाफ होगा और इससे नागरिकों में असंतोष पैदा होगा. इसके बाद सरकार ने जनवरी 2026 में जारी की गई निविदा प्रक्रिया रद्द कर दी थी.
* अब मंत्रिमंडल की मंजूरी का इंतजार
राजस्व विभाग को भूमि हस्तांतरण की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. अब इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा. मंजूरी मिलने के बाद मॉसिकॉल की यह बहुमूल्य भूमि निजी व्यावसायिक उपयोग के बजाय स्थायी रूप से जनहित, प्रशासनिक जरूरतों और सार्वजनिक सुविधाओं के विकास के लिए उपयोग में लाई जाएगी. अमरावती के विकास की दृष्टि से इस निर्णय को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे शहर को आधुनिक प्रशासनिक अधोसंरचना, नए सरकारी कार्यालय, न्यायालयीन सुविधाएं और अन्य सार्वजनिक परियोजनाएं प्राप्त होने का मार्ग प्रशस्त होगा.




