जिजाऊ बैंक अध्यक्ष अविनाश कोठाले का इस्तीफा

आरबीआई की 10 वर्ष सीमा के तहत

* हर वर्ष मिलेगा नया अध्यक्ष
अमरावती/दि.6- विदर्भ की अग्रणी सहकारी बैंक जिजाऊ कमर्शियल को-ऑपरेटिव बैंक के संस्थापक अध्यक्ष अविनाश कोठाले ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की नई नीति के अनुरूप अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. बैंक प्रबंधन ने नए नेतृत्व को अवसर देने और संगठनात्मक एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से हर वर्ष नए अध्यक्ष के चयन की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है.
बैंक के अनुसार आर्थिक वर्ष 2025-26 के अंत तक बैंक की जमा राशि 497 करोड़ रुपये, ऋण वितरण 326 करोड़ रुपये, निवेश 232 करोड़ रुपये, सीआरएआर 15.83 प्रतिशत, कुल लाभ 3.14 करोड़ रुपये तथा नेट एनपीए 1.83 प्रतिशत दर्ज किया गया है. बैंक अमरावती जिले की सहकारी बैंकों में अग्रणी स्थान रखती है. अविनाश कोठाले वर्ष 2000 से 2011 तथा 2017 से 2026 तक अध्यक्ष पद पर रहे. उनके कार्यकाल में बैंक की चार मंजिला इमारत का निर्माण हुआ और बैंक को आर्थिक मजबूती एवं स्थायित्व प्राप्त हुआ. उन्होंने कहा कि बैंक की सफलता सभी संचालकों, कर्मचारियों, सदस्यों और जमाकर्ताओं के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है.
हाल ही में बैंक को राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक ऑफ द ईयर सम्मान मिला, जबकि अविनाश कोठाले को बेस्ट चेयरपर्सन ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया. आरबीआई के नए निर्देशों के अनुसार सहकारी बैंकों में कोई भी संचालक लगातार 10 वर्ष से अधिक समय तक पद पर नहीं रह सकता. इसी नीति का सम्मान करते हुए जिजाऊ बैंक ने नए नेतृत्व को अवसर देने का निर्णय लिया है. बैंक के संस्थापक उपाध्यक्ष राजेंद्र जाधव ने बताया कि महाराष्ट्र में इस नीति को स्वेच्छा से स्वीकार करने वाली जिजाऊ बैंक पहली सहकारी बैंक है. सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय के अनुसार बैंक में अध्यक्ष पद का दायित्व चरणबद्ध तरीके से सौंपा जाएगा. पहले वर्ष बबन आवारे, दूसरे वर्ष अनिल बंड तथा उसके बाद श्रीकांत टेकाडे अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालेंगे.
नवनिर्वाचित अध्यक्ष बबन आवारे ने कहा कि बैंक में सहकार, पारदर्शिता और एकता को मजबूत करते हुए सभी सदस्यों के आर्थिक विकास के लिए कार्य किया जाएगा. वहीं अविनाश कोठाले ने विदर्भ में प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए आर्थिक साक्षरता को आवश्यक बताते हुए इस दिशा में व्यापक जनजागरण की जरूरत पर बल दिया. इस अवसर पर उपाध्यक्ष प्रदीप चौधरी, अरविंद गावंडे सहित बैंक के सभी संचालक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरीश नाशिरकर उपस्थित थे. बैंक प्रबंधन का कहना है कि नई व्यवस्था से संगठन में नेतृत्व का विस्तार होगा, युवा संचालकों को अवसर मिलेगा तथा बैंक के 10 हजार से अधिक सदस्यों और जमाकर्ताओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा.

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