दो दशकों से प्रति नियुक्ति पर रहनेवाले आखिरकार हटाए गये !

सरकार के निर्णय की अनदेखी कर चल रहा था कामकाज, आदेश से बढा संभ्रम

अमरावती /दि.8 – स्थानीय विभागीय आयुक्त कार्यालय की विकास शाखा में विगत दो दशकों से जिला परिषद के कर्मचारी प्रति नियुक्ति पर थे. इस नियमबाह्य कामकाज का मामला उजागर होते ही अब उन कर्मचारियों की ‘घर वापसी’ कर दी गई है. साथ ही खास बात यह रही कि उनके स्थान पर एक बार फिर जिला परिषद के कर्मचारी ही प्रतिनियुक्ति पर लिए गये. जिससे संबंधित आदेश अपर आयुक्त द्बारा जारी किया गया है.
ज्ञात रहे कि विभागीय आयुक्त कार्यालय की विकास शाखा में करीब दो-ढाई दशकों से जिप के कर्मचारी प्रतिनियुक्ति कार्यरत रहने की बात जनता दरबार में रखी गई थी. जिसके बाद उन सभी कर्मचारियों को उनकी मूलस्थापना में वापिस भेज दिया गया और उनके स्थान पर विभागीय आयुक्तालय की आस्थापना के कुछ कर्मचारियों सहित जिला परिषद के कुछ कर्मचारियों को उनके वेतन व भत्तों के साथ मूल आस्थापना में कायम रखाते हुए प्रतिनियुक्ति पर लिया गया.
बता दे कि सामान्य प्रशासन विभाग द्बारा 17 दिसंबर 2026 को जारी निर्णय के अनुसार किसी भी कर्मचारी को कम से कम एक वर्ष के लिए प्रतिनियुक्ति पर लिया जा सकता है और उसे अधिकतम 5 वर्ष की समयावृध्दि दी जा सकती है. यह कालावधि पूर्ण होने के बाद संबंधित कर्मचारी को उसकी मूूल आस्थापना में वापस जाना होता है.

* कर्मचारियों में काफी हद तक संभ्रम
खास बात यह है कि अपर आयुक्त द्बारा 3 जून को जारी किए गये आदेश में किसी भी शासन निर्णय का संदर्भ नहीं दिया गया है. शासन निर्णय के जरिए ही किसी अन्य कार्यालय के कर्मचारियों की सेवा केवल प्रति नियुक्ति के जरिए ली जा सकती है. इसके अलावा कर्मचारियों की सेवा को वर्ग करते हुए हासिल करने का कोई प्रावधान नहीं है. जिसके चलले अपर आयुक्त के आदेश को लेकर खुद कर्मचारियों में काफी हद तक संभ्रमवाली स्थिति है.

* यह उठापटक क्यों ?
वेतन सहित कर्मचारियों की सेवा लेना एक हद तक ठीक है. परंतु वेतन के मूल आस्थापना पर रखकर कर्मचवारियों की सेवा ली गई. यानी पद मंजूर नहीं रहने के बावजूद विभागीय आयुक्त कार्यालय द्बारा अतिरिक्त कर्मचारी लिए गये. जिसके चलते जिला परिषद में उस कर्मचारी के जिम्मे रहनेवाला काम किसी अन्य कर्मचारी को करना पडेगा. जिससे जिप के कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ पडेगा.

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