लोक न्यायालय में देश के 4 करोड मामलों का निपटारा

3.46 करोड दाखलपूर्व एवं 59.51 प्रलंबित मामलों का समावेश

अमरावती /दि.8 – विगत कुछ वर्षो के दौरान प्रभावी न्याय दान व्यवस्था के तौर पर अपनी पहचान बना चुके लोक न्यायालय उपक्रम के चलते नियमित न्यायालयों पर काम का बोझ काफी हद तक हलका होने लेगा है. विगत 14 मार्च को हुए राष्ट्रीय लोक न्यायालय उपक्रम में देा के करीब 4 करोड 6 लाख 39 हजार मुकदमों का निपटारा हुआ है. जिनमें 3 करोड 46 लाख 87 हजार दाखल पूर्व तथा 59 लाख 51 हजार प्रलंबित मामलों का समावेश रहा.
बता दे कि विविध तरह के समझौता योग्य मुकदमों का आपसी सहमति के साथ निपटारा करने हेतु प्रतिवर्ष लोग अदालत उपक्रम पर अमल किया जाता है और लोक अदालतों में 3 सदस्यीय पैनल के सामने मुकदमें की सुनवाई करते हुए उसका दोनों पक्षों की सहमति के साथ किया जाता है.

* कौन से मामले रखे जाते है लोक अदालत में
वाहन दुर्घटना भरपाई, भूसंपादन मुआवजा, बैंक व वित्तीय संस्थाओं के वसूली दावे, पारिवारिक विवाद एवं धनादेश अनादर जैसे विविध समझौता योग्य दिवानी व फौजदारी स्वरूप के मुकदमों का लोक अदालत में निपटारा होता है. इसके अलावा नियमित अदालत में दाखिल नहीं रहनेवाले मामलों का भी लोक अदालत में निपटारा किया जाता है. ऐसे मामलों को दाखल पूर्व मामले कहा जाता है.

* क्या है लोक अदालत ?
पहले के जमाने में समाज के आदरणीय एवं निष्पक्ष व्यक्ति एक साथ आकर किसी भी विवाद को आपसी समझौते व समझदारी के साथ मिटाया करते थे. इस व्यवस्था को गांव पंचायत कहा जाता था. इसी व्यवस्था का आधुनिक स्वरूप मौजूदा लोक अदालत की व्यवस्था है. इस व्यवस्था में कानून विशेषज्ञों का न्यायिक मंडल मामले से संबंधित पक्षकारों के बीच आपसी समन्वय के साथ समझौता कराते हुए विवाद का निपटारा करते है.
इस व्यवस्था के तहत किसी भी मामले से जुडे पक्षकारों के बीच आपसी समन्वय के साथ समझौता कराने का प्रयास किया जाता है. इस व्यवस्था के तहत आपसी सहमति से विवाद खत्म होेने के चलते यहां एक ओर किसी भी पक्षकार में अपनी हार जीत को लेकर नाराजगी की भावना तैयार नहीं होती. साथ ही इस व्यवस्था के चलते पक्षकारों का समय, पैसा व श्रम भी बचता है. जिसके चलते इन दिनों लोक अदालतों में ही विवाद को आपसी समझौते के साथ खत्म करने को प्राथमिकता दी जा रही है.

Back to top button