कहीं आप जाने-अनजाने जहर तो नहीं खा रहे ?
खाद्य सुरक्षा नियमों का सरेआम धडल्ले के साथ हो रहा उल्लंघन

* नकली दूध व पनीर एवं केमीकल से पके फलों की हो रही विक्री
* मिठाईयों पर चांदी के वर्क और नाश्ते के लिए अखबारी कागज का प्रयोग
* आम नागरिकों पर मंडरा रहा कैंसर का खतरा, आज विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर विशेष
अमरावती /दि.8 – आज पुरी दुनिया में खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जा रहा है. इस वर्ष विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर सुरक्षित व पौष्टिक भोजन का संदेश दिया जा रहा है. लेकिन वही दूसरी ओर अमरावती शहर सहित जिले में खाद्य सुरक्षा नियमों का खुले आम बडे धडल्ले के साथ उल्लंघन किया जा रहा है. जिसके चलते आम नागरिकों के जीवन एवं स्वास्थ्य खतरा मंडराता कहा जा सकता है. साथ ही यह सोचने की नौबत भी आन पडी है कि, कहीं लोग-बाग जाने अनजाने जहर का सेवन तो नहीं कर रहे.
बता दें कि इस समय जहां एक और बाजार में की विक्री का अंदेशा बना रहता है. वहीं अधिकांश फल रासायनिक तरीके से ही पकाए गये होते है. इसके अलावा मिठाईयों पर संदिग्ध चांदी के वर्क का प्रयोग किया जाता है. साथ ही साथ सडक किनारे लगनेवाली नाश्ते की गाडियों सहित कुछ छोटे-बडे उपहारगृहों में कचोरी-समोसा व भजिए सहित अन्य तले हुए खाद्य पदार्थ अखबारी कागज में रखकर परोसे जाते है. इन सभी बातों को इंसानी स्वास्थ्य के लिए काफी तक खतरनाक बताया जा सकता है.
बता दें कि समाचार पत्रों की छपाई में प्रयुक्त होनेवाली स्याही में कई तरह के रसायन, रंगद्रव्य एवं खनिज तेल आधारित तत्व मौजूद रहते है. जब इन कागजों के संपर्क में कोई गर्म व तैलीय खाद्य पदार्थ आता है तो ये सभी हानिकारक तत्व भोजन में मिल सकते है. लंबे समय तक ऐसे खाद्य पदार्थो का सेवन पेट के रोग, हार्मोनल असंतुलन, लीवर संबंधी समस्या एवं कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है. लेकिन इसके बावजूद भी शहर में नाश्ते जैसे खाद्य पदार्थो को परोसने हेतु अखबारी कागजों का प्रयोग धडल्ले के साथ किया जाता है.
इसके अलावा शहर के अधिकांश मिष्ठान्न भंडारों द्बारा मिठाईयों को आकर्षक दिखाने के लिए उन पर चांदी के वर्क का प्रयोग किया जाता है. मानकों के अनुरूप निर्मित चांदी वर्क को सुरक्षित माना जाता है. लेकिन नकली अथवा मिलावटी धातु से बने वर्क स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकते है. कहना अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं रहेगा कि अधिकांश मिठाई विक्रेताओं द्बारा लागत मूल्य को कम रखने के लिए मिठाईयों पर हल्के दर्जे व कम गुणत्वत्ता वाले चांदी वर्क का प्रयोग किया जाता है.
इसी तरह बाजार में बिकनेवाले आम व काले सहित अन्य फलों को समय से पहले व जल्दी पकाने के लिए रासायनिक पदार्थो का उपयोग किय जाता है. यह बात किसी से छिपी नही है. ऐसे फलों का सेवन करने की वजह से स्वास्थ्य लाभ होने की बजाय कई बार स्वास्थ्य व शरीर को नुकसान भी पहुंचता है. विशेष तौर पर बच्चों व बुजुर्गो पर व गर्भवती महिलाओं पर काफी विपरित परिणाम भी पडते है. जिसके चलते विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर सुरक्षित व पौष्टिक भोजन के संदेह पर कडाई के साथ अमल किए जाने की भी सख्त जरूरत है. ताकि लोगों द्बारा सेवन किए जा रहे खाद्य की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के साथ ही उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित किया जा सके.





