मेलघाट से मंत्रालय तक गूंजे बच्चू कडू के तेवर

फडणवीस का केंद्र में प्रमोशन हो, शिंदे फिर बनें मुख्यमंत्री

* प्रशासन को आंदोलन की चेतावनी, किसानों के लिए एक लाख रुपये अनुदान की मांग
* शिवसेना को दरकिनार करने वालों को दी परिणाम भुगतने की चेतावनी
* बच्चू के तेवर से महायुति में नई राजनीतिक चर्चाओं को मिला बल
अमरावती/मुंबई /दि.8- शिंदे गुट वाली शिवसेना विदर्भ विभागीय नेता एवं विधायक बच्चू कडू ने एक बार फिर अपने तीखे तेवरों से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. मेलघाट के विकास, किसानों की कर्जमाफी, दिव्यांगों के अधिकार, मुख्यमंत्री पद और महायुति के भीतर शक्ति संतुलन जैसे मुद्दों पर लगातार मुखर हो रहे विधायक बच्चू कडू ने प्रशासन और सरकार दोनों को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब केवल घोषणाओं और बैठकों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर परिणाम दिखाई देने चाहिए. एक ओर उन्होंने मेलघाट के लंबित विकास कार्यों को लेकर दिवाली में अमरावती कलेक्टर कार्यालय के घेराव की चेतावनी दी है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री पद को लेकर भी ऐसा बयान दिया है, जिसने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है. कडू ने कहा है कि हर शिवसैनिक की इच्छा है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एक बार फिर मुख्यमंत्री बनें, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाएं.
* मेलघाट में फिर गरजे बच्चू कडू
शिवसेना और प्रहार सामाजिक संगठन के संयुक्त संपर्क अभियान के अंतर्गत बच्चू कडू ने धारणी और चिखलदरा तहसील के कई गांवों का दौरा किया. गांव तिथे शाखा अभियान के माध्यम से उन्होंने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए उनकी समस्याएं सुनीं. मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायत राज अभियान में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले मोगर्दा और गडगाभांडूम गांवों में आयोजित सभाओं के दौरान ग्रामीणों ने पेयजल संकट, अनियमित बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, शिक्षा व्यवस्था की दयनीय स्थिति, खराब सड़कों, वनाधिकार और रोजगार के अभाव जैसे मुद्दे उनके सामने रखे.
पूर्व मंत्री व विधायक बच्चू कडू ने कहा कि मेलघाट संघर्ष महापदयात्रा के दौरान जिन समस्याओं को लेकर आंदोलन किया गया था, उनमें से अनेक आज भी जस की तस बनी हुई हैं. प्रशासन को पर्याप्त समय दिया गया, कई बैठकें हुईं, अनेक आश्वासन दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिवर्तन दिखाई नहीं दे रहा है.
* फाइलों में विकास, गांवों में अंधेरा
गडगाभांडूम में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए विधायक बच्चू कडू ने प्रशासन पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि अधिकारी लगातार समीक्षा बैठकें करते हैं, रिपोर्ट तैयार होती हैं, योजनाओं की घोषणाएं होती हैं, लेकिन उनका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंचता. उन्होंने कहा कि देश आज तकनीक और विकास के नए आयाम छू रहा है, लेकिन मेलघाट के कई गांव अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. कई आदिवासी बस्तियों में नियमित बिजली नहीं पहुंच पाई है. ऐसे में विकास के बड़े-बड़े दावे ग्रामीणों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसे हैं.
* दिवाली में कलेक्टर कार्यालय घेरने की चेतावनी
विधायक कडू ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि संघर्ष यात्रा के दौरान दिए गए निर्देशों का पालन नहीं हुआ और लंबित कार्यों को पूरा नहीं किया गया, तो दिवाली के दौरान हजारों ग्रामीणों को साथ लेकर अमरावती जिला कलेक्टर कार्यालय का विशाल घेराव किया जाएगा. उन्होंने यह भी घोषणा की कि मेलघाट के बिजली संकट को लेकर अलग से व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर राज्यव्यापी आंदोलन का भी विचार किया जाएगा.
* किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरा
पूर्व मंत्री व विधायक बच्चू कडू ने राज्य सरकार की कर्जमाफी योजना पर भी अपनी नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा घोषित दो लाख रुपये तक की कर्जमाफी राहतकारी कदम है, लेकिन इसमें कई कमियां हैं. उन्होंने मांग की कि नियमित रूप से ऋण चुकाने वाले किसानों को दिए जाने वाले 50 हजार रुपये के प्रोत्साहन अनुदान को बढ़ाकर एक लाख रुपये किया जाए. साथ ही ओटीएस (वन टाइम सेटलमेंट) करने वाले किसानों को भी योजना का लाभ दिया जाए. इसके साथ ही विधायक कडू ने कहा कि अभी भी बड़ी संख्या में किसान पिछली कर्जमाफी और प्रोत्साहन राशि के लाभ से वंचित हैं. जब तक किसानों को उनकी उपज का लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलता, तब तक सरकार को आर्थिक सहायता जारी रखनी चाहिए. उन्होंने दिव्यांग किसानों के संपूर्ण कर्जमाफी की मांग भी दोहराई और कहा कि किसानों तथा दिव्यांगों के मुद्दे कभी उनके राजनीतिक एजेंडे से बाहर नहीं होंगे.
* कर्जमाफी सरकार ने की है, बच्चू कडू ने नहीं
कर्जमाफी योजना को लेकर फैली राजनीतिक धारणाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक बच्चू कडू ने कहा कि जो कर्जमाफी हुई है, वह सरकार का निर्णय है, उनका व्यक्तिगत फैसला नहीं. यदि किसान योजना की खामियों को लेकर विरोध कर रहे हैं, तो उन्हें ऐसा करने का पूरा अधिकार है. उन्होंने कहा कि किसानों की नाराजगी को समझने के बजाय सरकार को उनकी वास्तविक समस्याओं का समाधान करना चाहिए.
* मुख्यमंत्री पद को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश
विधायक बच्चू कडू का सबसे चर्चित बयान मुख्यमंत्री पद को लेकर रहा. उन्होंने कहा कि अपने ही दल का मुख्यमंत्री होना हर शिवसैनिक की स्वाभाविक इच्छा है और उनके मन में आज भी एकनाथ शिंदे ही मुख्यमंत्री हैं. उन्होंने कहा कि वर्ष 2029 में एकनाथ शिंदे को फिर मुख्यमंत्री बनाने के लिए वे राज्य का कोना-कोना छान मारेंगे. साथ ही उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि देवेंद्र फडणवीस राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी संभालें और उनका प्रमोशन केंद्र में हो.
* मंत्री उदय सामंत ने भी बढ़ाया राजनीतिक तापमान
विधायक कडू के बयान के बाद उद्योग मंत्री उदय सामंत ने भी कहा कि जिस प्रकार भाजपा कार्यकर्ता फडणवीस को मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं, उसी प्रकार शिवसेना कार्यकर्ताओं की भी स्वाभाविक इच्छा है कि एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बनें. सामंत के इस बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को और अधिक हवा दे दी है तथा महायुति के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं.
* शिवसेना को दरकिनार करने की भूल महंगी पड़ेगी
हाल के दिनों में कुछ कार्यक्रमों और राजनीतिक घटनाक्रमों में एकनाथ शिंदे की उपेक्षा किए जाने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक बच्चू कडू ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि शिवसेना को कमजोर करने या दरकिनार करने की कोशिश करने वालों को भविष्य में इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे. उन्होंने कहा, शिवसेना कोई साधारण संगठन नहीं है. यह संघर्षों से बनी हुई सेना है. इसे रोकना या किनारे करना किसी के लिए आसान नहीं होगा.
* राजनीतिक संकेतों से भरपूर बयान
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधान परिषद सदस्य बच्चू कडू के हालिया बयान केवल मेलघाट, किसानों या क्षेत्रीय विकास तक सीमित नहीं हैं. उनके वक्तव्यों में आगामी राजनीतिक समीकरणों, महायुति के भीतर नेतृत्व संतुलन और शिवसेना की राजनीतिक आकांक्षाओं की स्पष्ट झलक दिखाई दे रही है. एक तरफ वे ग्रामीण, आदिवासी और किसान वर्ग की समस्याओं को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री पद को लेकर खुलकर पक्ष रखते हुए भविष्य की राजनीति के संकेत भी दे रहे हैं. ऐसे में बच्चू कडू के लगातार आक्रामक होते तेवर आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस और नए समीकरणों को जन्म दे सकते हैं.

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