विधान परिषद चुनाव में खर्च की कोई सीमा नहीं

उम्मीदवार कितना भी खर्च कर सकते हैं

* लोकसभा और विधानसभा चुनावों से अलग हैं नियम
* निर्वाचन आयोग ने खर्च की अधिकतम सीमा तय नहीं की
अमरावती/ दि. 9 – चुनावों में बढ़ते खर्च और कथित धनबल के उपयोग को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है. लोकसभा, विधानसभा, नगर निगम और ग्राम पंचायत चुनावों में उम्मीदवारों के लिए खर्च की अधिकतम सीमा निर्धारित होती है, लेकिन महाराष्ट्र विधान परिषद के स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र के चुनावों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. यही कारण है कि इन चुनावों में उम्मीदवारों द्वारा बड़े पैमाने पर खर्च किए जाने की चर्चा अक्सर सामने आती रहती है.
बता दे कि इस समय महाराष्ट्र में विधान परिषद की 17 सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है, जिनमें 16 नियमित सीटों के साथ नागपुर की एक सीट पर उपचुनाव भी शामिल है. इन चुनावों में उम्मीदवारों को प्रचार और मतदाताओं से संपर्क के लिए पर्याप्त संसाधन खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन निर्वाचन आयोग ने इनके लिए कोई अधिकतम व्यय सीमा निर्धारित नहीं की है.
* कौन होते हैं मतदाता?
स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद सीटों के चुनाव में आम नागरिक मतदान नहीं करते. इन चुनावों में नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत, जिला परिषद और पंचायत समितियों के निर्वाचित सदस्य मतदाता होते हैं. महाराष्ट्र में कुछ जिला परिषदों के चुनाव अभी तक नहीं हुए हैं, इसलिए वहां के सदस्य मतदान प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन पाएंगे.
* लोकसभा और विधानसभा चुनावों में तय है खर्च सीमा
निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए खर्च की स्पष्ट सीमा निर्धारित की जाती है. हाल के चुनावों में लोकसभा उम्मीदवारों के लिए 95 लाख रुपये तक और विधानसभा उम्मीदवारों के लिए 40 लाख रुपये तक खर्च की अनुमति थी. उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार, सभाओं, वाहनों, भोजन, नाश्ता तथा अन्य चुनावी गतिविधियों पर किए गए खर्च का पूरा हिसाब निर्वाचन आयोग को देना पड़ता है. निर्धारित सीमा से अधिक खर्च पाए जाने पर निर्वाचित प्रतिनिधि की सदस्यता तक खतरे में पड़ सकती है. वहीं चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों पर भविष्य में चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है.
* विधान परिषद चुनाव में नहीं है कोई व्यय सीमा
विशेषज्ञों के अनुसार स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद चुनाव प्रक्रिया में खर्च को लेकर अलग व्यवस्था है. चुनाव संबंधी नियमावली में उम्मीदवारों के खर्च की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की गई है. यही वजह है कि उम्मीदवार अपनी क्षमता और रणनीति के अनुसार खर्च कर सकते हैं. राजनीतिक हलकों में अक्सर यह चर्चा होती रही है कि इन चुनावों में मतदाताओं को साधने के लिए भारी धनराशि खर्च की जाती है. कई बार एक-एक वोट के लिए लाखों रुपये खर्च होने के आरोप भी सामने आते रहे हैं. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं होती.
* घोड़ा-व्यापार के आरोपों से गरमाई राजनीति
विधान परिषद चुनावों के दौरान धनबल के उपयोग को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है. कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने भी हाल ही में आरोप लगाया था कि चुनावों में बड़े पैमाने पर घोड़ा-व्यापार हो रहा है. उनके आरोपों के बाद चुनावी प्रक्रिया में धन के बढ़ते प्रभाव को लेकर बहस तेज हो गई है.
* कई सीटों पर चुनाव हुए निर्विरोध
इस बार राज्य की 17 सीटों पर चुनाव घोषित हुए थे, लेकिन कई स्थानों पर मुकाबला बनने से पहले ही राजनीतिक समीकरण बदल गए. कुछ जगहों पर कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के उम्मीदवारों ने नामांकन वापस ले लिया, जिसके बाद संबंधित सीटों पर चुनाव निर्विरोध हो गए. इन घटनाक्रमों के कारण विधान परिषद चुनाव एक बार फिर राजनीतिक और चुनावी खर्च के मुद्दों को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं. हालांकि कानूनी रूप से स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनावों में उम्मीदवारों के लिए खर्च की कोई सीमा निर्धारित नहीं होने से निर्वाचन आयोग के सामने निगरानी की चुनौती भी बनी हुई है.

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