22 जून से महाराष्ट्र विधानमंडल का पावससत्र

सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के पास कई मुद्दे

मुंबई/दि.10- महाराष्ट्र विधानमंडल का आगामी मानसून सत्र 22 जून से मुंबई में शुरू होगा. विधानसभा और विधान परिषद के इस सत्र के दौरान किसानों की कर्जमाफी, ओबीसी आरक्षण, बढ़ती कानून-व्यवस्था की समस्याएं, खाद-बीज संकट, महंगाई तथा विभिन्न राजनीतिक विवादों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी टक्कर देखने को मिल सकती है. राज्य की वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए यह सत्र काफी हंगामेदार रहने की संभावना जताई जा रही है.
विधानमंडल सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार विधानसभा की कार्यवाही 22 जून को सुबह 11 बजे शुरू होगी, जबकि विधान परिषद की बैठक दोपहर 12 बजे से प्रारंभ होगी. राज्यपाल विष्णु देव वर्मा की मंजूरी के बाद सत्र की औपचारिक अधिसूचना जारी की गई है.
* विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में
विपक्षी दलों ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि वे कई अहम मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा करेंगे. विधानसभा चुनाव के दौरान किसानों का पूरा कर्ज माफ करने का वादा किया गया था, लेकिन सरकार द्वारा केवल दो लाख रुपये तक की कर्जमाफी की घोषणा किए जाने पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है. विपक्ष का आरोप है कि दो लाख रुपये से अधिक कर्ज वाले किसानों को पहले अतिरिक्त राशि जमा करनी होगी, तभी उन्हें कर्जमाफी का लाभ मिलेगा. इससे बड़ी संख्या में आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को राहत नहीं मिल पाएगी. कर्जमाफी के लिए धनराशि की व्यवस्था और अन्य योजनाओं पर इसके प्रभाव को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा.
* किसान, खाद-बीज और प्याज उत्पादकों के मुद्दे
मानसून सत्र में किसानों से जुड़े कई मुद्दे प्रमुखता से उठने की संभावना है. प्याज उत्पादकों की समस्याएं, खाद और बीजों की उपलब्धता, खरीफ सीजन की तैयारियां तथा कृषि क्षेत्र की चुनौतियां विपक्ष के प्रमुख हथियार बन सकती हैं. साथ ही मानसून पूर्व विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा जा सकता है.
* ओबीसी आरक्षण और जनगणना का मुद्दा भी गरमाएगा
घर-घर जनगणना में ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम न होने पर विभिन्न ओबीसी संगठनों ने नाराजगी जताई है. समानांतर आरक्षण समाप्त करने के प्रस्ताव तथा अनुसूचित जातियों के उपवर्गीकरण का मुद्दा भी सत्र के दौरान चर्चा का केंद्र बन सकता है. राज्य सरकार ने समानांतर आरक्षण से जुड़े विषय को विधि एवं न्याय विभाग के पास भेजा है, जिसके कारण इस विषय पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है.
* कानून-व्यवस्था और अपराध भी बनेंगे बड़ा मुद्दा
राज्य में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर भी विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है. हाल के महीनों में हुई हत्या, लूट, साइबर अपराध और अन्य गंभीर घटनाओं को लेकर सरकार से जवाब मांगा जा सकता है. विपक्ष का आरोप है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है.
* गिरीश महाजन के बयान पर भी हो सकता है हंगामा
मंत्री गिरीश महाजन द्वारा ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर दिए गए बयान के राजनीतिक प्रभाव भी मानसून सत्र में दिखाई दे सकते हैं. विपक्ष इस मुद्दे को उठाकर सरकार को असहज करने की कोशिश कर सकता है.
* नागपुर विधान भवन के नए परिसर को मिली मंजूरी
इस बीच नागपुर में नए विधान भवन के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है. लगभग एक हजार करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है. माना जा रहा है कि निर्माण कार्य इसी वर्ष शुरू हो सकता है. यदि ऐसा हुआ तो इस वर्ष नागपुर में होने वाले पारंपरिक शीतकालीन सत्र को लेकर भी नई परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसानों, आरक्षण, कानून-व्यवस्था और विभिन्न प्रशासनिक मुद्दों के कारण यह मानसून सत्र सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. वहीं सत्ता पक्ष भी विपक्ष के आरोपों का जवाब देने और अपने कामकाज का पक्ष रखने की तैयारी में जुटा हुआ है.

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