मुझे और मेरे परिवार को बदनाम करने की साजिश हुई
अब कानूनी लड़ाई लड़ूंगी - रुपाली चाकणकर

मुंबई/दि.10 – महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की नेता रुपाली चाकणकर ने अशोक खरात प्रकरण में अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि उन्हें और उनके परिवार को बिना किसी सबूत के बदनाम करने की साजिश रची गई. उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वह इस पूरे मामले में कानूनी रास्ता अपनाकर जवाब देंगी.
रुपाली चाकणकर ने कहा कि अशोक खरात से उनका कोई आर्थिक, व्यावसायिक या जमीन संबंधी लेन-देन नहीं था. न ही उन्होंने किसी महिला को खरात के पास भेजा और न ही उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का समर्थन करने वाला कोई आपत्तिजनक फोटो या वीडियो सामने आया है. इसके बावजूद पिछले डेढ़-दो महीनों में उनके और उनके परिवार के खिलाफ अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करते हुए गंभीर आरोप लगाए गए, जिससे उन्हें और उनके परिजनों को मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी.
उन्होंने कहा कि अशोक खरात को उनके परिवार सहित अनेक लोगों ने आध्यात्मिक गुरु के रूप में सम्मान दिया था. सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पाद्यपूजन का वीडियो भी काफी पुराना है और उस समय वह महिला आयोग की अध्यक्ष नहीं थीं. इसके बावजूद मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने महिला आयोग के अध्यक्ष पद और पार्टी के महिला प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था.
* एआई वीडियो बनाकर छवि खराब करने का आरोप
चाकणकर ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ सुनियोजित तरीके से दुष्प्रचार किया गया. उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक का उपयोग कर फर्जी वीडियो तैयार किए गए और उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया. उनके अनुसार यह केवल राजनीतिक हमला नहीं, बल्कि एक महिला के सम्मान और प्रतिष्ठा पर हमला है. उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से हो, इसके लिए उन्होंने स्वयं पद छोड़ा, लेकिन इसके बाद भी उनके खिलाफ लगातार आरोप लगाए जाते रहे और उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया गया.
* आशा मिरगे को भेजी कानूनी नोटिस
रुपाली चाकणकर ने बताया कि आशा मिरगे नामक महिला ने एक टीवी बहस के दौरान उनके खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक और निराधार टिप्पणियां की थीं. इसके बाद उन्होंने 4 अप्रैल को पहली कानूनी नोटिस भेजी. नोटिस स्वीकार नहीं किए जाने पर दो और नोटिस डाक के माध्यम से भेजी गईं, लेकिन वे भी वापस लौट आईं. उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्हें न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा. मामले पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने आशा मिरगे को 2 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है. चाकणकर ने कहा कि वह स्वयं भी उस दिन अदालत में उपस्थित रहेंगी.
यह स्त्री सम्मान की लड़ाई है
रुपाली चाकणकर ने कहा कि यह लड़ाई केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और गरिमा की रक्षा की लड़ाई है. उन्होंने कहा, किसी भी महिला के चरित्र पर बिना किसी प्रमाण के कीचड़ उछालना उचित नहीं है. महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज, जिजाऊ, रमाई और भीमाई के विचारों की भूमि है. एक सम्मानपूर्वक जीवन जी रही महिला को सामाजिक रूप से निर्वस्त्र करने का प्रयास किया गया. मैं इस विकृत मानसिकता के खिलाफ कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से लड़ाई लड़ूंगी.
* अन्य लोगों को भी भेजी गई नोटिस
चाकणकर ने बताया कि आशा मिरगे के अलावा कुछ अन्य महिलाओं ने भी बिना किसी साक्ष्य के उनके खिलाफ आरोप लगाए हैं. ऐसे सभी लोगों को कानूनी नोटिस भेजी जा रही है. उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो उनके खिलाफ भी न्यायालय में कार्रवाई की जाएगी.
* गुवाहाटी यात्रा पर भी दी सफाई
गुवाहाटी में अशोक खरात के साथ वायरल हुई तस्वीरों पर प्रतिक्रिया देते हुए चाकणकर ने कहा कि वह अपने परिवार के साथ धार्मिक दर्शन के लिए वहां गई थीं. उसी दौरान अशोक खरात भी अपने परिवार और अनुयायियों के साथ वहां मौजूद था. उन्होंने कहा, उस समय तक हमें यह जानकारी नहीं थी कि अशोक खरात किसी आपराधिक मामले में आरोपी है. उसकी गिरफ्तारी के बाद ही उसके खिलाफ लगे आरोपों की जानकारी सामने आई. उससे पहले अनेक क्षेत्रों के लोग उसे आध्यात्मिक गुरु मानते थे और उसके कार्यक्रमों में शामिल होते थे.
रुपाली चाकणकर ने दोहराया कि उनका अशोक खरात के किसी भी कथित गैरकानूनी कार्य से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि सत्य उनके साथ है और न्यायालय में सभी तथ्य सामने आएंगे. मैंने कोई गलत काम नहीं किया है, इसलिए पूरे विश्वास के साथ कानून की चौखट पर न्याय की लड़ाई लड़ रही हूं, उन्होंने कहा.





