कुंभार समाज को बड़ी सौगात, 700 ब्रास मिट्टी पर रॉयल्टी माफ

कई नई सुविधाओं की घोषणा, सीएम फडणवीस के निर्देश पर मंत्री बावनकुले का फैसला

मुंबई/ दि. 12-महाराष्ट्र सरकार ने पारंपरिक कुंभार (कुम्हार) समाज के आर्थिक सशक्तिकरण और व्यवसायिक विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कई बड़ी रियायतों की घोषणा की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कुंभार समाज को राहत देने वाले विशेष प्रावधानों की घोषणा की है. सरकार के इस फैसले से राज्यभर के हजारों कुम्हार परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है.
सरकार द्वारा जारी नई व्यवस्था के अनुसार अब पारंपरिक कुंभार परिवारों को मिट्टी के बर्तन, ईंट, कौले और अन्य मृद्भांड निर्माण के लिए प्रतिवर्ष 700 ब्रास तक मिट्टी निकालने पर किसी प्रकार की रॉयल्टी (स्वामित्व शुल्क) नहीं देनी होगी. यह निर्णय लंबे समय से कच्चे माल की बढ़ती लागत और व्यवसायिक संकट का सामना कर रहे कुम्हार समाज के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.
* तलाब, नदी और सरकारी भूमि से मिलेगी मिट्टी
राजस्व विभाग के निर्देशानुसार पात्र कुंभार परिवारों को तालाब, नदी, नाले, खाड़ी तथा सरकारी बंजर भूमि से प्रतिवर्ष 700 ब्रास तक मिट्टी लेने की अनुमति होगी. इसके लिए रॉयल्टी नहीं ली जाएगी. इसके अलावा गांव के तालाबों, बंधारों और जलस्रोतों में जमा गाद या मिट्टी यदि कुंभार परिवार स्वयं के खर्च पर निकालते हैं तो उस पर भी 700 ब्रास तक कोई रॉयल्टी लागू नहीं होगी. हालांकि इसके लिए संबंधित विभागों की अनापत्ति (एनओसी) तथा निर्धारित प्रशासनिक शुल्क का भुगतान करना आवश्यक रहेगा.
* किन्हें मिलेगा लाभ
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पारंपरिक कुंभार परिवार की श्रेणी में पति, पत्नी और 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को शामिल किया जाएगा. योजना का लाभ परिवार के केवल एक सदस्य को दिया जाएगा.
* डिजिटल पहचान पत्र और एकल खिड़की सुविधा
कुंभार समाज के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया को आसान बनाने हेतु तहसील कार्यालयों के माध्यम से डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त पहचान पत्र जारी किए जाएंगे. इन पहचान पत्रों की वैधता पांच वर्ष तक रहेगी. साथ ही जिला प्रशासन के माध्यम से वन विंडो सिस्टम यानी एकल खिड़की योजना लागू की जाएगी, जिससे मिट्टी उत्खनन, अनुमति और अन्य प्रक्रियाएं सरल हो सकेंगी.
* क्लस्टर विकास योजना का मिलेगा लाभ
सरकार ने कुंभार व्यवसाय को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए विशेष क्लस्टर विकास योजना लागू करने का निर्णय लिया है. इसके तहत पारंपरिक कुम्हार बस्तियों और उत्पादन केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाएगा. साथ ही कुंभार समाज की पारंपरिक मिट्टी खदानों पर हुए अतिक्रमण हटाने को भी प्राथमिकता दी जाएगी.
* फ्लाई ऐश भी मिलेगी रियायती दर पर
सरकार ने औद्योगिक उपयोग की फ्लाई ऐश (राख) उपलब्ध कराने की भी घोषणा की है. तापीय विद्युत केंद्रों से फ्लाई ऐश मात्र 100 रुपये प्रति टन की दर से उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे ईंट और अन्य उत्पादों के निर्माण में लागत कम होगी.
* जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद
पारंपरिक कुंभार व्यवसाय पिछले कुछ वर्षों से कच्चे माल की कमी, बढ़ती लागत और आधुनिक तकनीक के अभाव जैसी समस्याओं से जूझ रहा था. सरकार का मानना है कि नई रियायतों और सुविधाओं से कुम्हार समाज को रोजगार और व्यवसाय बढ़ाने में मदद मिलेगी. इससे न केवल उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन स्तर में भी सुधार आने की संभावना है.
कुंभार समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे समाज के पुनर्विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है. यह फैसला पारंपरिक हस्तशिल्प और मिट्टी आधारित उद्योगों को नई ऊर्जा देने वाला माना जा रहा है.

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