अल नीनो का असर बढ़ा, मानसून की रफ्तार धीमी

विदर्भ में अगले चार दिन भीषण गर्मी का अलर्ट

* अमरावती, अकोला, वर्धा और नागपुर में हीटवेव की चेतावनी
अमरावती/ दि. 12 – महाराष्ट्र में मानसून की दस्तक के बावजूद अपेक्षित बारिश नहीं होने से चिंता बढ़ गई है. इस बीच भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने विदर्भ के कई जिलों के लिए अगले चार से पांच दिनों तक भीषण गर्मी और लू (हीटवेव) का अलर्ट जारी किया है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर में सक्रिय हो रही अल नीनो की स्थिति मानसून को प्रभावित कर रही है, जिसके चलते बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ सकती हैं और तापमान में असामान्य वृद्धि देखने को मिल सकती है. अल नीनो फिलहाल कमजोर अवस्था में सक्रिय है, लेकिन जैसे-जैसे मानसून आगे बढ़ेगा, उसका प्रभाव भी बढ़ता जाएगा. इसका असर विशेष रूप से मानसून के अंतिम चरण में अधिक दिखाई देने की संभावना है.
* इन जिलों में हीटवेव का अलर्ट
मौसम विभाग ने विदर्भ के अमरावती, अकोला, वर्धा और नागपुर जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है. इन जिलों में तापमान सामान्य से चार से पांच डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज होने की संभावना है. विशेषज्ञों ने नागरिकों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने तथा धूप से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है. बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं.
* विदर्भ में अभी नहीं बने मानसून के अनुकूल हालात
मौसम विभाग का कहना है कि विदर्भ में मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने के लिए अभी अनुकूल परिस्थितियां विकसित नहीं हुई हैं. अगले चार से पांच दिनों तक भी मानसून के आगे बढ़ने के संकेत कमजोर हैं. वर्तमान में क्षेत्र में गर्म और शुष्क हवाएं चल रही हैं, जिसके कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है. अगले तीन से चार दिनों में तापमान में और वृद्धि होने की संभावना है.
* किसानों की बढ़ी चिंता
मानसून की धीमी प्रगति और बढ़ती गर्मी ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है. खरीफ सीजन की बुआई के लिए किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश नहीं हुई तो कृषि गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ सकता है. मौसम विभाग ने कहा है कि परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी चेतावनी तथा अपडेट जारी किए जाएंगे.
* अल नीनो से कम हो सकती है बारिश
सितंबर के आसपास जब सामान्यतः अच्छी बारिश होती है, उस समय अल नीनो अधिक प्रभावी हो सकता है. इसके कारण वर्षा की मात्रा में कमी आने की आशंका है. उन्होंने बताया कि मानसून सीजन के अंत तक अल नीनो का प्रभाव बना रह सकता है. वर्तमान में इंडियन ओशन डाइपोल (आईओडी) भी शुरुआती चरण में है. अल नीनो और आईओडी की संयुक्त परिस्थितियों के कारण देश के कई हिस्सों के साथ विदर्भ क्षेत्र में भी बारिश की संभावना प्रभावित हो रही है. मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार इस वर्ष मानसूनी वर्षा दीर्घकालीन औसत के लगभग 94 प्रतिशत तक रह सकती है. हालांकि बीच-बीच में कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश हो सकती है, लेकिन समग्र रूप से मानसून की सक्रियता सामान्य से कम रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है.
* क्या है अल नीनो?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो एक वैश्विक मौसमीय घटना है, जो दक्षिण अमेरिका के तटवर्ती प्रशांत महासागर में समुद्र की सतही तापमान वृद्धि के कारण उत्पन्न होती है. समुद्र का तापमान सामान्य से अधिक होने पर वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होता है और भारत सहित कई देशों में वर्षा के पैटर्न में बदलाव देखने को मिलता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो का प्रभाव सामान्यतः दो से सात वर्ष के अंतराल में दिखाई देता है. पिछले आंकड़ों के अध्ययन से भी यह सामने आया है कि अधिकांश अल नीनो वर्षों में भारत में वर्षा सामान्य से कम दर्ज की गई है.

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