मनपा के पशु शल्य चिकित्सक डॉ. सचिन बोंद्रे रिश्वतखोरी में धरे गये
47 लाख के देयक की मंजूरी के लिए मांगी थी 25 लाख की रिश्वत

* ंपहले चरण में 2 लाख रूपए देने की रखी थी मांग, 1 लाख में बात हुई थी सेट
* डॉ. बोंद्रे के खिलाफ पहला ट्रैप हुआ था नाकाम, तकनीकी आधार पर आरोप हुए तय
* एसीबी ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कर डॉ. बोंद्रे को हिरासत में
* पार्षद अनिल अग्रवाल ने आमसभा में पहले ही उठाए थे भ्रष्टाचार के मुद्दे, अब आरोपों पर लगी मुहर
अमरावती/ दि. 17 – अमरावती महानगरपालिका में लंबे समय से भ्रष्टाचार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए महानगरपालिका के प्रभारी पशु चिकित्सा अधिकारी एवं सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सचिन छगनअप्पा बोंद्रे को रिश्वत मांगने के मामले में गिरफ्तार कर लिया है. आरोप है कि बोंद्रे ने श्वान जनसंख्या नियंत्रण, नसबंदी और टीकाकरण कार्य का 47 लाख रुपये का भुगतान मंजूर करने के लिए ठेकेदार से 25 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी.
इस कार्रवाई के बाद महानगरपालिका के प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई है. शहर में भी इस मामले को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है, क्योंकि यह रिश्वत की मांग सामान्य नहीं बल्कि कुल भुगतान राशि के आधे से अधिक हिस्से के बराबर बताई जा रही है. इससे मनपा में ठेकेदारी व्यवस्था, भुगतान प्रक्रिया और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
* ठेकेदार की शिकायत से खुला मामला
एसीबी सूत्रों के अनुसार, शिकायतकर्ता ठेकेदार ने अमरावती महानगरपालिका के पशु चिकित्सा विभाग के अंतर्गत श्वान जनसंख्या नियंत्रण, नसबंदी तथा टीकाकरण का कार्य पूरा किया था. कार्य पूर्ण होने के बाद लगभग 47 लाख रुपये का भुगतान विभाग से प्राप्त होना था. आरोप है कि भुगतान की फाइल आगे बढ़ाने और बिल मंजूर करने के लिए प्रभारी पशु चिकित्सा अधिकारी सचिन बोंद्रे ने ठेकेदार से 25 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की. इतनी बड़ी रकम की मांग से परेशान ठेकेदार ने सीधे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का दरवाजा खटखटाया और 8 जून को औपचारिक शिकायत दर्ज कराई.
* एसीबी की जांच में सही पाए गए आरोप
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की. 10 जून को पंचों की उपस्थिति में शिकायत की सत्यता की जांच की गई. जांच के दौरान यह स्प. हुआ कि आरोपी अधिकारी भुगतान मंजूर करने के लिए रिश्वत की मांग कर रहा था. एसीबी की पड़ताल में यह भी सामने आया कि आरोपी ने पहले चरण में दो लाख रुपये देने की बात कही थी तथा तत्काल एक लाख रुपये स्वीकार करने की तैयारी भी दिखाई थी. इसके बाद एसीबी ने आरोपी को रंगेहाथ पकड़ने की योजना बनाई.
* पीछा किए जाने का संदेह, पहला ट्रैप विफल
जानकारी के मुताबिक विगत 11 जून को एसीबी ने रिश्वत लेते हुए आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया. योजना के तहत शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच मुलाकात तय की गई थी. इस दौरान डॉ. सचिन बोंद्रे शासकीय वाहन छोड़कर शिकायतकर्ता की मोटरसाइकिल पर बैठकर मनपा कार्यालय से बाहर निकले. लेकिन रास्ते में उन्हें किसी के पीछा करने का संदेह हो गया. संदेह होने पर वे तत्काल मोटरसाइकिल से उतर गये और अपने चालक को फोन कर सरकारी वाहन बुला लिया. अचानक हुए इस घटनाक्रम के कारण एसीबी का पहला ट्रैप सफल नहीं हो सका.दहालांकि आरोपी की गतिविधियों और बातचीत के दौरान जुटाए गए तकनीकी साक्ष्य, ऑडियो रिकॉर्डिंग तथा अन्य प्रमाण एसीबी के पास मौजूद थे, जिससे रिश्वत मांगने का आरोप पुष्ट हो गया.
* घर से लिया गया हिरासत में
पहले ट्रैप के विफल होने के बाद एसीबी अधिकारियों को यह विश्वास हो गया कि आरोपी अब सीधे तौर पर रिश्वत स्वीकार नहीं करेगा. इसके बाद जांच एजेंसी ने उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों और शिकायत के आधार पर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई. इसके तहत एसीबी की टीम ने डॉ. सचिन बोंद्रे को उनके निवास स्थान से हिरासत में लिया. पूछताछ और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद उसके खिलाफ सीटी कोतवाली पुलिस थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
* मनपा के लिए बड़ा झटका
अमरावती महानगरपालिका पहले भी विभिन्न कारणों से विवादों में रही है, लेकिन इस बार सीधे एक वरिष्ठ अधिकारी पर इतनी बड़ी रिश्वत मांगने का आरोप साबित होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 47 लाख रुपये के बिल के लिए 25 लाख रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी, तो इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि सार्वजनिक धन के उपयोग और भुगतान प्रक्रिया में कितनी गंभीर अनियमितताएं हो सकती हैं. इस घटना ने ठेकेदारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
* आमसभा में पहले ही उठा था मामला
इस मामले को और अधिक महत्वपूर्ण इसलिए माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में हुई महानगरपालिका की आमसभा में स्वीकृत नगरसेवक अनिल अग्रवाल ने पशु चिकित्सा विभाग के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए थे. उन्होंने विभाग में भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और संदिग्ध भुगतान प्रक्रियाओं का मुद्दा उठाते हुए संबंधित अधिकारी की कार्यप्रणाली की जांच की मांग की थी. उस समय प्रशासन की ओर से इन आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया गया, लेकिन अब एसीबी की कार्रवाई के बाद अग्रवाल द्वारा लगाए गए आरोपों की चर्चा फिर तेज हो गई है.
* एसीबी टीम ने की कार्रवाई
यह कार्रवाई एसीबी के पुलिस अधीक्षक बापू बांगर तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सचिंद्र शिंदे के मार्गदर्शन में की गई. उप अधीक्षक सुनील किनगे के पर्यवेक्षण में निरीक्षक निलीमा सातव, निरीक्षक रविंद्र सहारे, उपेंद्र थोरात और वैभव जायले सहित अन्य अधिकारियों ने कार्रवाई को अंजाम दिया.
* शहर में चर्चा का विषय बना मामला
मनपा अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद पूरे शहर में इस मामले की चर्चा है. नागरिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि सरकारी योजनाओं और जनहित के कार्यों में भी इस प्रकार की रिश्वतखोरी हो रही है, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर खतरे का संकेत है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि एसीबी की जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है और क्या इस मामले में अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आती है. फिलहाल, सचिन बोंद्रे की गिरफ्तारी ने अमरावती महानगरपालिका के प्रशासनिक ढांचे को कटघरे में खड़ा कर दिया है.

* मेरे द्बारा लगाए गये आरोप सही साबित हुए, मैने पहले ही सबूतों के साथ बात सामने रखी थी
एसीबी की कार्रवाई के बाद मनपा पार्षद अनिल अग्रवाल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने कहा कि महानगरपालिका में चल रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ उन्होंने कई बार आवाज उठाई थी और आमसभा में दस्तावेजी प्रमाणों के साथ पशु चिकित्सा विभाग के कारनामों को उजागर किया था. आज एसीबी की कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि मैंने जो आरोप लगाए थे, वे निराधार नहीं थे. जनता के पैसे से होने वाले कार्यों में इस प्रकार रिश्वत मांगना बेहद शर्मनाक है. 47 लाख रुपये के बिल के लिए 25 लाख रुपये की रिश्वत मांगना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार किस स्तर तक पहुंच चुका है. उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी जनप्रतिनिधियों को महत्व नहीं देता था और उसकी कार्यशैली शुरू से ही संदेहास्पद रही है.
पार्षद अनिल अग्रवाल ने मांग की कि इस मामले की जांच केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि इतनी बड़ी रिश्वत की मांग की गई है तो यह अकेले किसी एक व्यक्ति का काम नहीं हो सकता. उन्होंने राज्य सरकार और एसीबी से मांग की कि पशु चिकित्सा विभाग के सभी भुगतान, ठेके और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कराई जाए तथा यह पता लगाया जाए कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन शामिल है. उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की भी मांग की.