अमरावती विधान परिषद चुनाव बना कांग्रेस के लिए अबूझ पहेली
वोटिंग या तटस्थ, मामला अब भी अनिर्णित!

* कांग्रेस नेताओं की बैठक में नहीं निकला कोई भी हल
* ऐन चुनाव से एक दिन पहले तक चल रही है माथापच्ची
* कल रात नप क्षेत्रों के व आज सुबह मनपा के सदस्यों के साथ हुई बैठक
* कांग्रेस प्रत्याशी हर्षजीत देशमुख के बीच में ही मैदान छोड देने से उपजी स्थिति
अमरावती/दि.17 – कल गुरूवार 18 जून को विधान परिषद की सीट हेतु कराए जा रहे चुनाव के तहत अमरावती के स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेेत्र में मतदान होना है. परंतु इस चुनाव और मतदान को लेकर कांग्रेस अब तक संभ्रम का ही शिकार दिखाई दे रही है. क्याेंंकि विधान परिषद के चुनाव में मतदान करना है अथवा नहीं या फिर बिना मतदान किए तटस्थ रहना है. इसे लेकर स्थानीय कांग्र्रेस अब तक कोई फैसला नहीं हो पाया है. इसी एक फैसले के लिए कांग्रेस के स्थानीय नेताओं द्बारा बैठक दर बैठक की जा रही है. लेकिन तमाम चर्चाओं एवं बैठकों के बावजूद इस एक सवाल का जवाब कांग्रेस के स्थानीय नेता नहीं खोज पाए. जिसके चलते यह मामला अब तक अनिर्णित बना हुआ है.
बता दे कि यहां गत रोज जिले के विभिन्न निकायों से वास्ता रखनेवाले कांग्रेस पार्टी के गट नेताओं की स्थानीय कांग्रेस नगर रोड स्थित कांग्रेस भवन में बैठक बुलाई गई थी. वहीं आज सुबह कांग्रेस भवन मेंं अमरावती मनपा के कांग्रेस पार्षदों सहित कांग्रेस के गट में शामिल नगरसेवकों की बैठक बुलाई गई. जिसमें जिले के कांग्रेसी सांसद बलवंत वानखडे, पूवर्र् मंत्री डॉ. सुनील देशमुख व एड. यशोमती ठाकुर, मनपा के नेता प्रतिपक्ष व पूर्व महापौर विलास इंगोले, कांग्रेस शहराध्यक्ष व पार्षद बबलू शेखावत, स्वीकृत पार्षद व पूर्व महापौर मिलिंद चिमोटे एवं स्वीकृत पार्षद अनिल अग्रवाल सहित मनपा के सभी कांग्रेसी पार्षद उपस्थित थे.
सूत्रों के मुताबिक दोनों ही बैठकों में कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने अपनी पार्टी के सदस्य मतदाता के सामने विधान परिषद के चुनाव में किसी अन्य प्रत्याशी का समर्थन करने या फिर वोट ही नहीं डालते हुए चुनाव में तटस्थ रहने जैसे मुद्दे रखते हुए चर्चा की. साथ ही इन चर्चा की विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को भेजते हुए प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की ओर से मिलनेवाले निर्देशों के अनुरूप निर्णय लेने की बात कही. इसके चलते चुनावी मैदान में डटे हुए वंचित के प्रत्याशी डॉ. नीलेश विश्वकर्मा का समर्थन करने अथवा चुनाव में वोट डालने की बजाय तटस्थ रहने को लेकर आज सुबह की बैठक तक कांग्रेस पार्टी में कोई निर्णय नहीं हो पाया था.
बता दें कि विधान परिषद के चुनाव हेतु कांग्रेस पार्टी की ओर से अमरावती सीट पर हर्षजीत देशमुख व अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया था. परंतु नामांकन प्रक्रिया के तुरंत बाद कांग्रेस प्रत्याशी हर्षजीत देशमुख अमरावती के राजनीतिक परिदृश्य से पूरी तरह गायब हो गये और फिर यह खबर सामने आयी कि वे बीमार होेकर अस्पताल में भर्ती है. जिसका सीधा मतलब यह निकाला गया कि हर्षजीत देशमुख ने अप्रत्यक्ष तौर पर चुनावी मैदान से अपने कदम पीछे खींच लिए है. ऐसे में कांग्रेस के सामने यह समस्या पैदा हो गई कि आखिर विधान परिषद के चुनाव में कौन सी भूमिका अपनाई जाए. इसी एक सवाल पर विचारमंथन करने हेतु कांग्रेस के स्थानीय नेताओं व पदाधिकारियों द्बारा अब तक करीब 7 से 8 बार बैठकें की जा चुकी है. लेकिन इसके बावजूद एक सवाल का जवाब अब तक खोजा नहीं जा सका. जिसके चलते य अब तक तय नहीं हो पाया है कि कांग्रेस के पार्षदों द्बारा कल किसके पक्ष में वोट डाले जायेंगे. या फिर कांग्रेस पार्टी के मतदाता सदस्यों द्बारा वोट डालने की बजाय तटस्थ भूमिका अपनाई जायेगी. ऐसे में विधान परिषद के चुनाव को लेकर कांगे्रस की भूमिका के बारे में जबर्दस्त उत्सुकता बनी हुई है.





