आरक्षण उपवर्गीकरण विरोधी कृति समिति का निकला भव्य महामोर्चा
इर्विन चौक पर सरकार के विरोध में नारेबाजी कर किया जोरदार प्रदर्शन

* कलेक्ट्रेट पर मोर्चा पहुंचने के बाद प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधीश को सौंपा ज्ञापन
अमरावती /दि.17- आरक्षण उपवर्गीकरण विरोधी कृति समिति द्वारा आज बुधवार 17 जून को सुबह 11 बजे इर्विन चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक उपवर्गीकरण विरोधी एल्गार मोर्चे का आयोजन किया गया था. इस महामोर्चे में सैकडों की संख्या में बहुजन समाजबंधु शामिल हुए. आंदोलनकर्ताओं में सरकार विरोधी नारेबाजी कर मोर्चे के दौरान जोरदार प्रदर्शन किया. मोर्चा कलेक्ट्रेट पर पहुंचने के बाद प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री के नाम अपनी विविध मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी आशीष येरेकर को सौंपा.
राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति में उपवर्गीकरण लागू करने का निर्णय लिया है. इस निर्णय का आरक्षण उपवर्गीकरण विरोधी कृति समिति ने कडा विरोध किया है. इसी बात को लेकर बुधवार 17 जून को सुबह 11 बजे उपवर्गीकरण विरोधी एल्गार महामोर्चे का आयोजन किया गया. मोर्चे में बडी संख्या में सफल बहुजन समाज के पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल हुए. डॉ. बाबासाहब आंबेडकर चौक (इर्विन चौक) पर सैकडों की संख्या में आंदोलनकर्ता इकठ्ठा हुए और सरकार के विरोध में जोरदार नारेबाजी व प्रदर्शन करते हुए मोर्चे की शुरुआत की. यह मोर्चा दोपहर 1.30 बजे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा. मोर्चे के दौरान पुलिस का तगडा बंदोबस्त तैनात था. जिलाधिकारी कार्यालय पर मोर्चा पहुंचने के बाद प्रतिनिधि मंडल ने अपनी विविध मांगों का राज्य के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन जिलाधिकारी आशीष येरेकर को सौंपा. इस भव्य मोर्चे में सांसद बलवंत वानखडे, गुणवंत देवपारे, डॉ. देविलाल आठवले, प्रा. डॉ. प्रफुल्ल गवई, रविकांत गवई, संजय आठवले, मदन गायकवाड, नयन मोंढे, प्रा. प्रकाश बोरकर, भिक्खु सुखतानंद, भंते गिरीमानंद, डॉ. कमल राउत, अशांत रंगारी, गणपतराव तिडके, पद्माकर मांडवधरे, सेवानंद वाकोडे, रमेश गजभिये, राजेश ठवरे, डी. एम. रामटेके, रमेश कटके, अशोक रंगारी, रविकुमार गजभिये, रणजीत चव्हाण, डॉ. अश्विनी गोंडाणे, प्रा. सीमा मेश्राम, आशा इंगले, विनोद ढवले, संजय भोवते, प्रा. डॉ. संतोष बनसोड, धनराज तेलमोरे, ओंकारराव मेश्राम, गौतम प्रधान, सुरेश नितनवरे, गणेश पहुलकर, मोरेश्वर पवार, चरणदास इंगोले, रणजीत मोहोड, नरेश सोनवणे, पंजाब मनवरे, सुरेंद्र सिरसाट, भारत डोंगरे, सिद्धार्थ दामोधरे, पंकज मेश्राम, राजेश वानखडे, वसु महाराज, शिवलाल गवली, कल्पना खंडारे, सुनीता पगारे, वनिता वानखडे, निलिमा भुजाडे, पूजा वानखडे, रेखा इंगले, नंदा ढोणे, लिलावती चौरपगार, पुष्पा मेश्राम, शिला मोहोड, सावित्रीबाई बोरकर, सुनंदा पांडे, कुसुम गवई, सुनंदा गेडाम, लता तायडे, पल्लवी वानखडे, वच्छलाबाई गायकवाड, अर्चना तंतरपाले, रत्ना गायकवाड, सुनील टेंभ्रुणे, राहुल दुधे, सन्नी आठवले, सुरेश वरघट, गोपाल थोरात, सोपान चौरपगार समेत अनेक लोगों का समावेश था.
* यह थी प्रमुख मांगे
प्रतिनिधि मंडल द्वारा सौंपे गये ज्ञापन में अनुसूचित जातियों के उपवर्गीकरण की प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने, न्यायमूर्ति अनंत बदर समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा सरकारी एवं अर्ध-सरकारी विभागों में अनुसूचित जातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के रिक्त पदों का बैकलॉग विशेष अभियान चलाकर भरने की मांग की. साथ ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कर्मचारियों के लिए पदोन्नति में आरक्षण तत्काल लागू करने, जातिवार जनगणना कराने तथा एससी-एसटी समुदायों पर लागू नॉन-क्रीमी लेयर की शर्त समाप्त करने की भी मांग की गई है. इसके अलावा, प्रतिनिधियों ने नीट, सीबीसीएस और सीयूईटी जैसी परीक्षाओं में कथित घोटालों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है. प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी संवैधानिक और न्यायसंगत मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती तथा उपवर्गीकरण का निर्णय वापस नहीं लेती, तो महाराष्ट्र की 59 अनुसूचित जातियां एकजुट होकर लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू करेंगी. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी.




