दो ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने में सीपी ओला की भूमिका रही जबर्दस्त

दोनों घटनास्थलों का कई बार किया दौरा

* ग्राउंड इंस्पेक्शन पर दिया पूरा जोर
* कई बार क्राइम ब्रांच के ऑफीस में बैठे
* जांच अधिकारियों के साथ रखा पूरा फालोअप
* जांच के प्रत्येक पहलू को खुद जांचा व परखा
* जांच की दिशा तय करने में निभाई जबर्दस्त भूमिका
* बिना सबूत व सुराग वाली दोनों हत्याकांडो की गुल्थी को सुलझाया
अमरावती/दि.17- विगत एक माह के दौरान अमरावती शहर में दो ऐसे हत्याकांड घटित हुए थे, जिन्हें ‘ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री’ कहा जा सकता है. क्योंकि हत्या के दोनों मामले उजागर होने के बाद पुलिस के सामने सबसे बडी चुनौती मृतकों की शिनाख्त करना था, क्योंकि दोनों घटनाओं में लाशों की स्थिति कुछ ऐसी थी कि मृतक कौन था व कौन थी, यही सवाल पुलिस के सामने लंबे समय तक बना रहा. जिसके साथ ही इस बात को लेकर भी माथापच्ची करनी थी कि आखिर उन दोनों को किसने और क्यों मारा. उल्लेखनीय बात यह भी है कि दोनों घटना स्थलों पर पुलिस को मृतकों एवं हत्यारों सहित वारदात से संबंधित कोई सबूत या सुराग भी प्राथमिक जांच के दौरान नहीं मिला था. लेकिन कमाल की बात यह है कि 15 दिनों के अंतराल में घटित इन दोनों हत्याकांडों की गुत्थी को पुलिस ने अगले कुछ दिनों के भीतर एक-एक करते हुए सुलझा लिया तथा दोनों ही वारदातों में लिप्त आरोपियों को हिरासत में लेते हुए दोनों हत्याकांडों की वजह को भी उजागर किया. जिसके लिए मामले की जांच करनेवाले नागपुरी गेट पुलिस थाने व गाडगेनगर पुलिस थाने सहित अपराध शाखा का दल तो बधाई और अभिनंदन का पात्र है ही. साथ ही साथ इन दोनों अनसुलझे मामलों की गुत्थी को सुलझाने का पूरा श्रेय अमरावती के शहर पुलिस आयुक्त राकेश ओला को भी दिया जा सकता है.
बता दें कि विगत 13 मई को नागपुरी गेट पुलिस थाना क्षेत्र अंतर्गत एक धर्मार्थ संस्था के बरसों से बंद पडे अस्पताल की छत पर रखी पानी की टंकी में से एक अज्ञात व्यक्ति का बुरी तरह से सडा गला शव बरामद हुआ था. प्राथमिक अनुमान के मुताबिक उस व्यक्ति की मौत हुए 15-20 दिनों से अधिक का समय बीत चुका था. इस दौरान शव की अवस्था इतनी अधिक खराब हो चुकी थी कि मृतक की पहचान करना अपने आप में काफी मुश्किल काम था. हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के जरिए यह स्पष्ट हो गया था कि उक्त व्यक्ति की मौत प्राकृतिक नहीं थी, बल्कि उसके सिर और सीने पर किसी वजनदार वस्तु से वार करते हुए उसकी हत्या की गई थी. जाहीर सी बात है कि हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद शव को लाकर बंद पडे अस्पताल की पानी की टंकी में डाला गया था. ताकि वारदात एवं सबूत को छिपाया जा सके.
लगभग इससे ही मिलती झुलती दूसरी घटना 2 जून को सामने आयी थी. जब तपोवन परिसर की टेकडी के पीछे सुनसान रहनेवाले जंगल क्षेत्र से होकर बहनेवाले नाले के पास स्थित गढ्ढे से एक युवती की अधजली लाश बरामद हुई थी. उस लाश की भी स्थिति कुछ ऐसी थी कि पहली नजर में मृतका की शिनाख्त करना काफी मुश्किल काम था. ऐसे में दोनों मृतकों की शिनाख्त करने के साथ ही उनकी हत्या करनेवाले आरोपियों को खोजने एवं हत्या की वजह को उजागर करने की चुनौती शहर पुलिस के सामने थी. वहीं खास बात यह भी थी कि दोनों घटनास्थलों के आसपास कोई सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे. साथ ही घटनास्थल से पुलिस को मृतकों व आरोपियों से संबंधित कोई सबूत या सुराग भी नहीं मिले थे. जिसके चलते दोनों मामलों को ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री माना गया था और कमाल की बात यह रही कि अमरावती शहर पुलिस ने दोनों ही अनसुलझी गुत्थियों को बडी कुशलता के साथ सुलझाने में सफलता हासिल की.
खास बात यह रही कि जैसे ही एक-एक कर इन दोनों हत्याकांडों की जानकारी मिलते ही शहर पुलिस आयुक्त राकेश ओला अपने कक्ष को छोडकर सीधे ‘ग्राउंड ड्यूटी’ पर उतर आए तथा उन्होंने एक दो बार नहीं बल्कि दर्जनों बार दोनों घटनास्थलों का दौरा करते हुए मौक-ए – वारदात का बडी बारिकी के साथ मुआयना किया तथा एक-एक बात पर ध्यान देते हुए दोनों वारदातों से जुडे प्रत्येक पहलु को जर्बदस्त ढंग से खंगाला. जिसके तहत उन्होंने दोनों मृतकों के पारिवारिक व सामाजिक जीवन से जुडी बातों को खंगालते हुए मृतकों के संपर्क व संबंध में रहनेवाले लोगों की जानकारी को हासिल किया. साथ ही मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों को तकनीकी पहलुओं की जांच करते समय जमीनी स्तर पर भी हर बात की पडताल करने के निर्देश जारी किए. साथ ही खास बात यह भी रही कि इस दौरान पुलिस आयुक्त राकेश ओला ने कई बार अपना डेरा अपने कक्ष की बजाय अपराध शाखा के कार्यालय में ही रखा और अपराध शाखा के दल द्बारा की जा रही प्रत्येक कार्रवाई का पूरा फालोअप भी लिया. जिसके चलते सीपी राकेश ओला के मार्गदर्शन और उनके द्बारा दिए जानेवाले निर्देशो के अनुरूप अपराध शाखा के दल ने दोनों ही मामलों की गुत्थियों को शानदार ढंग से सुलझा लिया. साथ ही साथ दोनों मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए दोनों हत्याकांडो की वजह को भी उजागर करने में सफलता मिली. जिसका श्रेय काफी हद तक सीपी राकेश ओला को दिया जा सकता है.

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