अमरावती विधान परिषद के चुनाव में

मनपा के 11 कांग्रेसी पार्षदों ने नहीं डाला वोट

* पार्टी व्हिप के मुताबिक तटस्थ रहने का लिया निर्णय
अमरावती/दि.18- विधान परिषद हेतु अमरावती के स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर आज जहां एक ओर जिले भर के जनप्रतिनिधियों में मतदान करने हेतु अच्छी खासी गहमागहमी रही. वही दूसरी ओर अमरावती महानगरपालिका के 11 कांग्रेस पार्षदों ने तटस्थ रहते हुए खुद को इस मतदान की प्रक्रिया से अलग रखा. जिसके जरिए कांग्रेस के इन 11 पार्षदों ने पार्टी के गटनेता एवं सभागृह के नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले की ओर से जारी व्हिप का पालन किया.
बता दें कि विधान परिषद के चुनाव हेतु कांग्रेस की ओर से हर्षजीत देशमुख को अपना प्रत्याशी बनाया गया था. परंतु नामांकन प्रक्रिया के बाद हर्षजीत देशमुख अचानक ही चुनावी परिदृश्य से पूरी तरह गायब हो गये और पता चला कि वे बीमार होकर अस्पताल में भर्ती है. कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने इसे विपक्ष की चाल बताते हुए आरोप लगाया था कि हर्षजीत देशमुख ने राजनीतिक दबाव का शिकार होकर अपने आपको चुनावी मैदान से बाहर किया है. जिसके बाद शहर सहित जिला कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने इस बार के विधान परिषद चुनाव में तटस्थ रहने का निर्णय लेते हुए अपनी पार्टी के प्रत्याशी हेतु विधान परिषद के चुनाव में वोटिंग नहीं करने का व्हिप जारी किया था. जिसका शहर सहित जिले में कांग्रेस के कई निकाय सदस्यों द्बारा जमकर उल्लंघन किया गया और अमरावती मनपा के सदस्य रहनेवाले 6 कांग्रेसी पार्षदों ने भी आज तहसील कार्यालय पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया. परंतु अमरावती मनपा के 11 कांग्रेसी पार्षद ऐसे भी रहे, जिन्होंने पार्टी की ओर से जारी व्हिप का बेहद कडाई के साथ पालन किया और वे वोट डालने ही नहीं पहुंचे.
विधान परिषद के चुनाव में वोट नहीं डालते हुए खुद को तटस्थ रखनेवाले अमरावती मनपा के कांग्रेसी पार्षदों में नेता प्रतिपक्ष व पूर्व महापौर विलास इंगोले, कांग्रेस शहराध्यक्ष व पार्षद बबलू शेखावत, स्वीकृत पार्षद अनिल अग्रवाल, स्वीकृत पार्षद व पूर्व महापौर मिलिंद चिमोटे सहित प्रभाग क्रमांक 3 की कांग्रेस पार्षद अनिता काले, प्रभाग क्रमांक 8 की कांग्रेस पार्षद मालती गवई, अर्चना आत्राम व असमा फिरोज खान तथा प्रभाग क्रमांक 14 की कांग्रेस पार्षद सुनीता भेले, ललिता रतावा व डॉ. संजय शिरभाते का समावेश रहा. इन 11 कांग्रेसी नगरसेवकों ने एक तरह से अमरावती शहर में पार्टी द्बारा जारी व्हिप की लाज रखने का काम किया.

* पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर ने कायम रखा अपना शब्द और गढ


तिवसा में कांग्रेस के सभी 12 नगरसेवक ‘अंडर ग्राउंड’
* एक ने भी विधान परिषद के लिए वोट नहीं डाला
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि अमरावती मनपा को छोड जहां एक ओर अमरावती स्थानीय प्राधिकारी मतदार संघ की विधान परिषद चुनाव प्रक्रिया के दौरान जहां जिले के अधिकांश क्षेत्रों में कांग्रेस के कई पार्षदों ने पार्टी के निर्देशों की अनदेखी कर मतदान किया, वहीं दूसरी ओर पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर के प्रभाव वाले तिवसा क्षेत्र में बिल्कुल अलग तस्वीर देखने को मिली. यहां कांग्रेस के सभी 12 नगरसेवक पूरे दिन मतदान प्रक्रिया से दूर रहे और किसी ने भी अपना वोट नहीं डाला.
ज्ञात रहे कि चुनाव से पहले यशोमती ठाकुर ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि तिवसा क्षेत्र के कांग्रेस पार्षद पार्टी की भूमिका का पालन करेंगे. मतदान के दिन यह दावा पूरी तरह सही साबित होता दिखाई दिया. राजनीतिक हलकों में चर्चा रही कि मतदान शुरू होने के बाद से ही कांग्रेस के सभी 12 नगरसेवक सार्वजनिक गतिविधियों से दूर रहे और मतदान केंद्र पर दिखाई नहीं दिए. तिवसा-भातकुली मतदान केंद्र पर जिले का सबसे कम 68.42 प्रतिशत मतदान दर्ज होना भी इसी राजनीतिक रणनीति का परिणाम माना जा रहा है. कुल 38 मतदाताओं में से केवल 26 ने मतदान किया, जबकि कांग्रेस के 12 नगरसेवकों की अनुपस्थिति ने मतदान प्रतिशत को सीधे प्रभावित किया.
जिले के अन्य क्षेत्रों में कांग्रेस के कई पार्षदों द्वारा मतदान किए जाने और पार्टी व्हिप के उल्लंघन की चर्चाओं के बीच तिवसा कांग्रेस संगठन अनुशासित दिखाई दिया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम तिवसा क्षेत्र में यशोमती ठाकुर की संगठनात्मक पकड़ और प्रभाव को दर्शाता है. स्थानीय राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिलेभर में कांग्रेस के लिए यदि कोई क्षेत्र पूरी तरह नियंत्रण में दिखाई दिया, तो वह तिवसा ही रहा. अब मतगणना से पहले यह चर्चा तेज हो गई है कि जिले के अधिकांश क्षेत्रों में कांग्रेस के मतदाताओं के बिखराव के बीच तिवसा में पार्टी अनुशासन बनाए रखने का श्रेय सीधे यशोमती ठाकुर को जाता है. राजनीतिक गलियारों में इसे उनके प्रभाव और नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन माना जा रहा है.

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