अवैध पैथोलॉजी लैबों पर कार्रवाई के लिए बनेंगे नए नियम

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा विस्तृत शपथ-पत्र

नागपुर /दि.20– राज्य में अवैध रूप से संचालित पैथोलॉजी लैबों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग नए नियम तैयार कर रहा है. यह जानकारी राज्य सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ को दी. इस पर अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि प्रास्ताविक नियमों की रूपरेखा और प्रावधानों का विस्तृत विवरण शपथपत्र के माध्यम से अगले सप्ताह तक अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए.
* जनहित याचिका में यह आरोप
यवतमाल के सामाजिक कार्यकर्ता दिगंबर पजगाडे ने राज्य में पैथोलॉजी लैब के अवैध संचालन को लेकर हाईकोर्ट में फौजदारी जनहित याचिका दायर की है. मामले पर गुरूवार को न्यायमुर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई. नियमों के अनुसार पैथोलॉजी लैब संचालक केवल एमबीबीएस या एमडी (पैथोलॉजी माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री) डॉक्टर ही कर सकते है. हालाकि याचिका में दावा किया गया है कि राज्य भर में हजारों पैथोलॉजी लैब डिप्लोमा इन मेडिकल लिबोरेटरी टेक्नोलॉजी और सर्टिफिकेट इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी कोर्स किए हुए तकनीशियन अवैध रूप से चला रहे है.
* कार्रवाई को लेकर पुछा था सवाल
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मौखिक सवाल करते हुए कहा था कि, राज्य में अवैध रूप से संचालित हो रही पैथोलॉजी लैब पर क्या कार्रवाई की गई है? साथ ही, अब तक उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट भी अदालत में प्रस्तृत करने का आदेश दिया था. जिसके जवाब में गुरूवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने मौखिक तौर पर बताया कि अवैध पैथोलॉजी लैबों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग नए नियम तैयार कर रहा है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता दिगंबर पजगाडे ने स्वयं पक्ष रखा. जबकि राज्य सरकार की ओर से एड. एन.एस. राव और मध्यस्थी अर्जीदार की और से एड. रोहन चांदूरकर ने पैरवी की.
* मरीजों की समस्याओं पर भी दे ध्यान- हाईकोर्ट
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि कई मामलों में पैथोलॉजी की गलत रिपोर्ट तथा आवश्यक दवाएं समय पर और उचित मात्रा में उपलब्ध नही होने के कारण मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पडता है. अदालत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग को सुझाव दिया कि नए नियम तैयार करते समय इन महत्वपूर्ण समस्याओं को भी ध्यान में रखा जाए.ताकि मरीजों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकें.

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