100 करोड़ की चर्चा होती रहीं, लेकिन मैं अपने विचारों के साथ खड़ा रहा

नाशिक पहुंचते ही सांसद राजाभाऊ वाजे का भव्य स्वागत, शिवसैनिकों ने फूलों की वर्षा कर जताई निष्ठा

* ठाकरे गुट में बगावत के बीच वाजे बने वफादारी का चेहरा, बोले- विचारधारा से समझौता नहीं करूंगा
नाशिक/ दि. 19- शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में छह सांसदों की बगावत के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में मचे भूचाल के बीच नाशिक से सांसद राजाभाउ वाझे शुक्रवार को नाशिक पहुंचे, जहां उनका अभूतपूर्व स्वागत किया गया. नाशिक रोड रेलवे स्टेशन पर हजारों शिवसैनिकों ने ढोल-ताशों, जोरदार नारेबाजी और पुष्पवर्षा के साथ उनका अभिनंदन किया. पूरे परिसर में शिवसेना जिंदाबाद और उद्धव साहेब आगे बढ़ो जैसे नारों की गूंज सुनाई दी. राजनीतिक हलकों में जारी ऑपरेशन टाइगर की चर्चाओं और ठाकरे गुट के छह सांसदों द्वारा अलग राह चुनने के बाद राजाभाऊ वाजे का उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े रहना उन्हें अचानक राज्य की राजनीति के केंद्र में ले आया है. नाशिक में मिला जबरदस्त जनसमर्थन इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी कार्यकर्ता अब भी वफादारी और विचारधारा की राजनीति को महत्व दे रहे हैं.
* जिस विचारधारा से जीता, उसी के साथ खड़ा हूं
मीडिया से बातचीत में राजाभाऊ वाजे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे जिस विचारधारा और नेतृत्व के भरोसे जनता के बीच पहुंचे और सांसद चुने गए, उसके साथ विश्वासघात नहीं कर सकते. उन्होंने कहा, मैं जिस विचारधारा के आधार पर चुनाव जीतकर आया हूं, उसी विचारधारा के प्रति ईमानदार हूं. मैंने जो निर्णय लिया है, वह पूरी तरह सही है. आज कार्यकर्ताओं ने जिस तरह प्रेम और सम्मान दिया है, वह मेरे फैसले पर जनता और शिवसैनिकों की मुहर है. वाजे ने कहा कि राजनीति में पद और सत्ता से ज्यादा महत्वपूर्ण विचार और निष्ठा होती है तथा उन्होंने हमेशा उसी मार्ग पर चलने का प्रयास किया है.
* मुझे किसी ऑफर की जरूरत नहीं
पिछले कुछ दिनों से ठाकरे गुट के सांसदों को कथित रूप से करोड़ों रुपये और विकास कार्यों के आश्वासन दिए जाने की चर्चाओं के बीच राजाभाऊ वाजे ने भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, मुझे कोई ऑफर नहीं मिली. मुझे जो चाहिए था, वह पहले से ही मिला हुआ है और वही मेरे लिए सबसे बड़ी पूंजी है. उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में उन चर्चाओं के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिनमें बागी सांसदों को कथित तौर पर भारी आर्थिक और राजनीतिक प्रस्ताव मिलने की बातें सामने आ रही थीं.
* ठाकरे गुट के लिए बने निष्ठा का प्रतीक
गौरतलब है कि ठाकरे गुट के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने हाल ही में दावा किया था कि कुछ सांसदों को बड़े आर्थिक प्रस्ताव और विकास कार्यों के वादे देकर पक्ष बदलने का दबाव बनाया गया. ऐसे माहौल में राजाभाऊ वाजे का अपने पुराने रुख पर कायम रहना ठाकरे गुट के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा संकट के दौर में राजाभाऊ वाजे, अरविंद सावंत और अनिल देसाई जैसे नेताओं का पार्टी के साथ बने रहना कार्यकर्ताओं के मनोबल को मजबूत करने वाला है.
* दिल्ली में भावुक हुए थे वाजे
बागी सांसदों के प्रकरण के बाद दिल्ली में आयोजित पत्रकार परिषद के दौरान जब संजय राऊत शिवसेना, बालासाहेब ठाकरे और शिवसैनिकों के रिश्ते पर बोल रहे थे, तब राजाभाऊ वाजे भावुक हो गए थे. उस दृश्य की चर्चा पूरे महाराष्ट्र में हुई थी. पार्टी पर आए संकट और सहयोगियों की बगावत का जिक्र होते ही उनकी आंखें नम हो गई थीं.
* नाशिक में शक्ति प्रदर्शन के मायने
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नाशिक में हुआ यह स्वागत केवल एक सांसद के आगमन का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि ठाकरे गुट की ताकत और कार्यकर्ताओं की निष्ठा का सार्वजनिक प्रदर्शन भी था. बड़ी संख्या में जुटे शिवसैनिकों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि पार्टी के भीतर संकट जरूर है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का भरोसा अभी भी नेतृत्व के साथ कायम है.
अब पूरे महाराष्ट्र की नजर बागी सांसदों की आगामी रणनीति, लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत दावों और उसके बाद होने वाली राजनीतिक हलचलों पर टिकी हुई है. ऐसे समय में नाशिक में राजाभाऊ वाजे को मिला जनसमर्थन ठाकरे गुट के लिए राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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