ब्रांडिंग और पैकेजिंग से कृषि उत्पादों को मिलेगी नई पहचान
कृषि विज्ञान केंद्र घाटखेड़ में जागरूकता कार्यक्रम संपन्न

* उद्यमिता विकास को मिलेगा बढ़ावा
अमरावती /दि.22- बदलते प्रतिस्पर्धी बाजार में कृषि उत्पादों की सफलता केवल गुणवत्ता पर निर्भर नहीं है, बल्कि प्रभावी ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. इसी उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, घाटखेड़ में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग, मुंबई के सहयोग से ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
कार्यक्रम का उद्घाटन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग के संयुक्त सचिव डॉ. सुबोध रुईकर के हाथों हुआ. इस अवसर पर सहायक संचालक अनिल माऊले, एग्रो स्मार्ट संतरा उत्पादक कंपनी के अध्यक्ष अनिल ठाकरे तथा कृषि सहयोग किसान उत्पादक कंपनी के अध्यक्ष निलेश खोंडे प्रमुख रूप से उपस्थित थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र घाटखेड़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. अतुल कलसकर ने की. अपने संबोधन में डॉ. रुईकर ने पैकेजिंग और ब्रांडिंग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग उद्योगों और उद्यमियों के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित करता है. उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों को किराये के आधार पर ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में आवश्यक ढांचा विकसित करने हेतु तकनीकी सहयोग देने का आश्वासन भी दिया.
कार्यक्रम की पृष्ठभूमि रखते हुए डॉ. अतुल कलसकर ने कहा कि अमरावती जिले में दलहन तथा संतरा आधारित मूल्य संवर्धित उद्योगों की व्यापक संभावनाएं हैं. उन्होंने किसानों से उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण और उद्यमिता की ओर कदम बढ़ाने का आह्वान किया. उनका कहना था कि कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार मूल्य दिलाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र हर संभव सहयोग प्रदान करेगा. कार्यक्रम में शंकर महाराज कृषि महाविद्यालय, पिंपळखुटा के छात्र-छात्राओं, खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय पाला के प्राध्यापकों, किसान उत्पादक कंपनियों के प्रतिनिधियों, महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याओं तथा बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया. अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया. कार्यक्रम का संचालन अमर तायडे ने किया, जबकि गृहविज्ञान विशेषज्ञ डॉ. प्रणिता कडू ने आभार व्यक्त किया. उन्होंने बताया कि भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे ताकि किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को आधुनिक बाजार व्यवस्था से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा सके.





