चौथी की अंग्रेजी किताब में शामिल हुआ कोल्हापुर का पाटगांव
‘द हनी विलेज’ पाठ से मिली नई पहचान

कोल्हापुर/दि.22 – जिले के भुदरगड तहसील स्थित पाटगांव को इस वर्ष राज्य सरकार द्वारा संशोधित चौथी कक्षा की अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक में स्थान मिला है. ‘द हनी विलेज’ शीर्षक से शामिल किए गए इस पाठ के माध्यम से पाटगांव की पहचान अब पूरे महाराष्ट्र के विद्यार्थियों तक पहुंच रही है. मधुमक्खी पालन और शुद्ध शहद उत्पादन के लिए प्रसिद्ध यह गांव अब स्कूली शिक्षा का भी हिस्सा बन गया है.
राज्य शिक्षा विभाग ने इस वर्ष दूसरी, तीसरी, चौथी और छठी कक्षाओं के पाठ्यक्रम में बदलाव किए हैं. नए पाठ्यक्रम में प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रसिद्ध पाटगांव पर विशेष पाठ शामिल किया गया है. पाठ में बताया गया है कि कोल्हापुर जिले का यह छोटा सा गांव ‘मध का गांव’ के नाम से जाना जाता है, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण मधुमक्खी पालन कर प्राकृतिक और शुद्ध शहद का उत्पादन करते हैं. पाठ के अनुसार ‘हनी विलेज’ परियोजना को विशेषज्ञों और प्रकृति प्रेमियों के सहयोग से विकसित किया गया है. इसका उद्देश्य ग्रामीणों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है. गांव चारों ओर से हरी-भरी पहाड़ियों, जंगलों और रंग-बिरंगे फूलों से घिरा हुआ है, जो मधुमक्खियों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं.
विद्यार्थियों को शहद के महत्व से भी परिचित कराया गया है. पाठ में बताया गया है कि शहद ऊर्जा और पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत है. यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भी भरपूर है. सर्दी-खांसी में राहत, पाचन क्रिया में सुधार और दैनिक आहार में इसके उपयोग की जानकारी भी विद्यार्थियों को दी गई है. शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा के स्तर पर विद्यार्थियों को शहद के स्वास्थ्य लाभ और पर्यावरण संरक्षण के महत्व से अवगत कराने के उद्देश्य से यह पाठ शामिल किया गया है. चौथी की पाठ्यपुस्तक में स्थान मिलने से पाटगांव की पहचान अब राज्यभर में और अधिक मजबूत हुई है तथा ‘मध का गांव’ की मिठास लाखों विद्यार्थियों तक पहुंच रही है.