यशवाड़ी मंदिर हादसा

ठेकेदार पर उठे सवाल, 3 दिन के लिए दर्शन बंद

परभणी/मानवत/दि.22 – मानवत तहसील के यशवाड़ी स्थित मंदिर में गर्भगृह की छत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे के बाद मंदिर संस्थान के अध्यक्ष शिवेंद्र स्वामी ने दुर्घटना के लिए निर्माण ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया है. उनका कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान दर्शन बंद करने का मुद्दा उठाया गया था, लेकिन राजस्थान के ठेकेदार ने इसकी आवश्यकता नहीं बताई और श्रद्धालुओं के लिए मंदिर खुला रखा गया. इसी लापरवाही के कारण यह दुर्घटना हुई.
20 जून को हुए इस हादसे में 5 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जबकि 18 लोग घायल हुए हैं. घायलों में एक व्यक्ति की हालत गंभीर होने पर उसे नांदेड़ भेजा गया था, लेकिन चिकित्सकों के अनुसार उसकी स्थिति अब स्थिर है. घटना के बाद मंदिर परिसर में सुरक्षा के लिए 10 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं.
* पांच वर्ष पहले शुरू हुआ था निर्माण
मंदिर निर्माण के लिए लगभग पांच वर्ष पहले श्रद्धालुओं से चंदा एकत्र कर राजस्थान के एक ठेकेदार को काम सौंपा गया था. कोरोना महामारी के दौरान निर्माण कार्य ठप हो गया था. इसके अलावा अयोध्या के श्रीराम मंदिर निर्माण में पत्थरों की अधिक मांग के कारण यहां निर्माण सामग्री की कमी हो गई थी, जिससे काम की गति धीमी पड़ गई. पिछले डेढ़ वर्ष से निर्माण कार्य फिर से शुरू किया गया था.
* जांच के बाद होगी कार्रवाई
रविवार को पुरातत्व विभाग और निर्माण विभाग के अभियंताओं ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. मंदिर का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के लिए पुणे और छत्रपति संभाजीनगर से विशेषज्ञ टीमों को बुलाया गया है. प्रशासन ने मंदिर को तीन दिनों के लिए श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु बंद कर दिया है और पूरे परिसर की तारबंदी कर दी गई है. जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा.
* 1.07 करोड़ रुपये का ठेका
मंदिर निर्माण का ठेका 1 करोड़ 7 लाख 6 हजार रुपये में दिया गया था. अब तक ठेकेदार को 21 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि शेष राशि चरणबद्ध तरीके से दी जानी थी. यशवाड़ी मंदिर क्षेत्र का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जहां राज्यभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं. इसलिए निर्माण कार्य को भी लगातार आर्थिक सहयोग मिलता रहा है.

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