आरटीआई नियमों में बदलाव पर अन्ना हजारे नाराज

5 जुलाई से आमरण अनशन की चेतावनी बरकरार

अहिल्यानगर/24 – वरिष्ठ समाजसेवक अण्णा हजारे ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के नियमों में किए गए बदलावों पर कड़ा विरोध जताते हुए 5 जुलाई से आमरण अनशन की अपनी चेतावनी बरकरार रखी है. बुधवार को राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद भी अन्ना हजारे ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट और ठोस आश्वासन नहीं मिला है.
बुधवार को महाराष्ट्र के मुख्य सूचना आयुक्त राहुल पांडे के नेतृत्व में अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रालेगणसिद्धि में अन्ना हजारे से मुलाकात की. बैठक में आरटीआई नियमों में किए गए संशोधनों पर चर्चा हुई, लेकिन बातचीत के बाद अन्ना हजारे ने कहा कि सरकार का रुख संतोषजनक नहीं है. उन्होंने बताया कि जल्द ही चर्चा का एक और दौर होगा, लेकिन यदि समाधान नहीं निकला तो 5 जुलाई से यादवबाबा मंदिर परिसर में आमरण अनशन शुरू किया जाएगा.
अन्ना हजारे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे पत्र में कहा है कि सूचना का अधिकार किसी सरकार की कृपा नहीं, बल्कि नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है. उनका आरोप है कि 12 जून 2026 को जारी किए गए ‘महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम-2026’ कानून की मूल भावना के विपरीत हैं और इससे पारदर्शिता कमजोर होगी. उन्होंने कहा कि 1998 से आरटीआई आंदोलन के लिए उन्होंने पूरे महाराष्ट्र में संघर्ष किया है, लेकिन नए नियम सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया को कठिन बनाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले साबित हो सकते हैं.
* इन प्रावधानों पर जताई आपत्ति
अन्ना हजारे ने नए नियमों के नौ प्रमुख प्रावधानों पर आपत्ति दर्ज कराई है. इनमें आरटीआई आवेदन के साथ पहचान पत्र अनिवार्य करना, सूचना मांगने का कारण बताने की अपेक्षा, आवेदन शुल्क में वृद्धि, ‘एक विषय-एक आवेदन’ की शर्त, दोबारा आवेदन खारिज करने का प्रावधान, सुनवाई में अनुपस्थिति पर अपील निरस्त करना, आवेदक की मृत्यु के बाद मामला बंद करना, वकीलों की सहायता पर रोक तथा धारा-4 के तहत स्वतः सूचना सार्वजनिक करने की व्यवस्था की अनदेखी शामिल है. उनका कहना है कि इन नियमों से आम नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के लिए सूचना हासिल करना कठिन हो जाएगा.
* आंदोलन की चेतावनी
अन्ना हजारे ने कहा कि महाराष्ट्र ने वर्ष 2002 में देश को आदर्श सूचना का अधिकार कानून दिया था, लेकिन नए नियम उस परंपरा को कमजोर करने वाले हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप कर विवादित प्रावधानों को वापस लेने की मांग की है. अन्यथा 5 जुलाई से रालेगणसिद्धि में आमरण अनशन शुरू किया जाएगा. अन्ना हजारे की इस घोषणा के बाद राज्य सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना है और अब सभी की निगाहें सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली अगली बैठक पर टिकी हैं.

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