दुकानों के बाहर चिप्स-कुरकुरे की सजावट पर नियंत्रण की मांग
तुकाराम मुंढे को लिखे पत्र की सोशल मीडिया पर चर्चा

नागपुर/दि.24 – खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंढे को संबोधित एक पत्र इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. एक अभिभावक द्वारा लिखे गए इस पत्र में किराना दुकानों, सुपरमार्केट और अन्य बिक्री केंद्रों पर चिप्स, कुरकुरे तथा अन्य जंक फूड उत्पादों की बच्चों को आकर्षित करने वाली सजावट पर नियंत्रण लगाने की मांग की गई है. यह पत्र तुकाराम मुंढे के समर्थकों के विभिन्न सोशल मीडिया समूहों में साझा किए जाने के बाद नागपुर समेत महाराष्ट्र के कई हिस्सों में चर्चा का विषय बन गया है.
पत्र में कहा गया है कि अधिकांश किराना दुकानों और सुपरमार्केट में चिप्स, कुरकुरे तथा अन्य प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के पैकेट दुकान के बाहर या प्रवेश द्वार के पास आकर्षक तरीके से लटकाए जाते हैं. इससे बच्चों का ध्यान आसानी से इन उत्पादों की ओर जाता है और वे अपने अभिभावकों से इन्हें खरीदने की जिद करने लगते हैं. पत्र लेखक का कहना है कि जंक फूड के लगातार सेवन से बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. इससे पौष्टिक भोजन की आदतें भी प्रभावित होती हैं.
पत्र में इन उत्पादों की बिक्री पर किसी प्रकार का प्रतिबंध लगाने की मांग नहीं की गई है. इसके बजाय दुकानों में उनके प्रदर्शन और सजावट को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने का सुझाव दिया गया है. पत्र में सुझाव दिया गया है कि चिप्स, कुरकुरे और इसी प्रकार के अन्य जंक फूड उत्पादों को दुकान के अंदरूनी हिस्से में रखा जाए तथा बच्चों को आकर्षित करने वाले अत्यधिक प्रचारात्मक प्रदर्शन से बचा जाए. पिछले कुछ वर्षों में बच्चों में बढ़ते जंक फूड सेवन, मोटापे, पोषण की कमी और असंतुलित आहार को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चिंता व्यक्त करते रहे हैं. ऐसे में बच्चों की खाद्य आदतों को प्रभावित करने वाले व्यावसायिक तरीकों पर भी चर्चा तेज हो रही है. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए इसे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक कदम बताया है. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि इस तरह के कदम उपभोक्ताओं की पसंद की स्वतंत्रता और व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं. फिलहाल खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. हालांकि, सोशल मीडिया पर इस मांग को लेकर बहस जारी है और भविष्य में जंक फूड के प्रदर्शन तथा विपणन से जुड़े दिशा-निर्देशों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है.