कर्जमाफी पर जयंत पाटिल का सरकार पर हमला

हाईवे के लिए लाखों करोड़, लेकिन किसानों की कर्जमाफी के लिए पैसा नहीं?

* महंगाई, खाद की बढ़ती कीमतों और किसान आत्महत्याओं का मुद्दा भी उठाया
मुंबई/दि.24- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने विधानसभा के मानसून सत्र में किसानों के मुद्दों को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला. नियम 293 के तहत कृषि संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने कर्जमाफी, बढ़ती महंगाई, खाद की कीमतों में वृद्धि, कृषि उत्पादन लागत और किसान आत्महत्याओं जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा.
राकांपा विधायक जयंत पाटिल ने कहा कि सरकार बड़े-बड़े एक्सप्रेस-वे, राजमार्गों और आधारभूत ढांचा परियोजनाओं पर लाखों करोड़ रुपये खर्च कर रही है, लेकिन संकट में फंसे किसानों की कर्जमाफी के लिए संसाधनों की कमी का हवाला दिया जाता है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब विकास परियोजनाओं के लिए धन उपलब्ध है, तो किसानों को कर्ज के बोझ से मुक्त करने के लिए सरकार ठोस निर्णय क्यों नहीं ले रही. चर्चा के दौरान उन्होंने वर्ष 2008 में केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई किसान कर्जमाफी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों को राहत देने के लिए राजनीतिक श्रेय लेने की बजाय प्रभावी निर्णय लेने की जरूरत है. उनके अनुसार आज भी बड़ी संख्या में किसान कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं और उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद उन्हें फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है.
* खाद और कृषि लागत में बढ़ोतरी पर चिंता
विधायक जयंत पाटिल ने कहा कि बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि आदानों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जबकि कृषि उत्पादों के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़े हैं. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है और खेती का व्यवसाय घाटे का सौदा बनता जा रहा है. उन्होंने कपास उत्पादक किसानों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र की आयात नीति का असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है. सस्ते आयात के कारण स्थानीय किसानों को कपास का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने मांग की कि कृषि उपज के मूल्य निर्धारण में उत्पादन लागत और किसानों के लाभ को ध्यान में रखा जाना चाहिए.
* किसान आत्महत्याओं पर जताई चिंता
विधायक जयंत पाटिल ने राज्य में बढ़ रही किसान आत्महत्याओं पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि कर्ज, फसल नुकसान, प्राकृतिक आपदाएं और आर्थिक संकट किसानों को आत्महत्या जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने सूखे की समस्या से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजना, सिंचाई परियोजनाओं और जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई. उन्होंने कहा कि मौसम में बदलाव, प्राकृतिक आपदाओं और बाजार की अनिश्चितता के कारण फल उत्पादक किसान भी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं. ऐसे किसानों के लिए प्रभावी राहत और मुआवजा व्यवस्था की जरूरत है.

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