‘अमरावती मंडल’ की आशंका साबित हुई सही

पहली ही बारिश में जलमग्न हुआ चांगापुर अंडरपास

* रातभर अमरावती से कटा रहा चांगापुर का संपर्क
*निर्माण की गुणवत्ता और जलनिकासी व्यवस्था पर उठे सवाल
अमरावती /दि.24- बीती रात बारिश के जारी सिझन दौरान पहली बार जबरदस्त और झमाझम पानी बरसा. जिससे जहां एक और आम जनजीवन बुरी तरह से अस्तव्यस्त हुआ, वही दूसरी और प्रशासन की और से किए गए कई कामों और दावों की पोल भी खुलती नजर आई. याद दिला दे की समय पर चांगापुर में परतवाडा रोड से चांगापुर नरेश हनुमान मंदिर की और जानेवाले रास्ते पर स्थित रेलवे क्रॉसिंग को बंद करते हुए बनाया गया. रेलवे अंडरपास के तकनिकी रूप से गलत बने रहने और आगे चलकर इस अंडर पास की वजह से बडे पैमाने पर तकलिफे होने का दावा दैनिक ‘अमरावती मंडल’ व्दारा काफी पहले किया गया था. जो बीती रात उस समय पूरी तरह से सही साबित हुआ. जब पहली ही झमाझम बारिश में यह अंडरपास पानी से लबालब भर गया. ज्ञात रहे कि, जिसमें ‘अमरावती मंडल’ ने चांगापुर रेलवे अंडर पास के मामले को उजागर करते हुए सांसद डॉ. अनिल बोंडे को मौके पर बुलाकर इस पूरे मामले से अवगत कराया था. तब रेलवे अधिकारियों ने सांसद बोंडे को आश्वस्त किया था कि, अंडरपास की वजह से लोगों को कोई परेशानी न हो इस हेतू आवश्यक उपाय किए जाएगे. परंतु कल रात हुई बारिश के बाद उपजे हालात को देखते हुए कहा जा सकता है कि, रेलवे अधिकारियों को शायद अपने ही व्दारा किया गया वादा याद नहीं रहा या फिर उन्होंने इस मामले की सुविधापूर्ण अनदेखी की. जिसके चलते कल रात से लेकर आज सुबह तक चांगापुर रेलवे अंडरपास ने लबालब पानी भरा रहा. जिसके चलते दोनों ओर से वाहनों की आवाजावी प्रभावित हुई और रात भर चांगापुर का अमरावती से संपर्क टूटा रहा.
कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि, बरसात शुरू होने से पहले जिस आशंका को लेकर स्थानीय नागरिकों और ‘अमरावती मंडल’ ने बार-बार चेतावनी दी थी, वह पहली ही तेज बारिश में सच साबित हो गई। मंगलवार रात हुई बारिश के बाद चांगापुर रेलवे अंडरपास पूरी तरह पानी से भर गया, स्थानीय नागरिकों के अनुसार अंडरपास में जलभराव की स्थिति रात में ही पैदा हो गई थी. देखते ही देखते पानी का स्तर बढ़ता गया और कुछ ही घंटों में पूरा मार्ग तालाब जैसा दिखाई देने लगा. इससे गांव के लोगों को आपातकालीन जरूरतों, नौकरी-पेशा लोगों के आवागमन तथा अन्य दैनिक कार्यों में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. कई वाहन चालकों को बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा. इस बारे में स्थानिय नागरिकों व्दारा सुचीत किए जाने के बाद बुधवार सुबह संबंधित विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे तथा मोटर पंपों की सहायता से पानी निकालने का काम शुरू किया गया. हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि हर बार बारिश के बाद पानी निकालना कोई समाधान नहीं है. समस्या का स्थायी निराकरण तभी संभव है जब अंडरपास में वैज्ञानिक और प्रभावी जलनिकासी व्यवस्था विकसित की जाए.
* पहले ही जताई गई थी आशंका
गौरतलब है कि अंडरपास निर्माण के दौरान ही इसकी ऊंचाई, ढलान और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए गए थे. अमरावती मंडल ने भी अपने समाचारों के माध्यम से इस संभावित समस्या को प्रमुखता से उजागर किया था. स्थानीय नागरिकों और जानकारों का कहना था कि यदि बरसाती पानी की निकासी के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई तो मानसून में अंडरपास जलभराव का केंद्र बन सकता है. पहली ही बारिश में सामने आए हालात ने इन आशंकाओं को सही साबित कर दिया है.
* ग्रामीणों में नाराजगी
चांगापुर के नागरिकों ने अंडरपास निर्माण में तकनीकी खामियों की जांच की मांग की है. उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस महत्वपूर्ण मार्ग का उद्देश्य गांव और शहर के बीच सुगम संपर्क स्थापित करना था, लेकिन पहली ही बारिश में इसके बंद हो जाने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि यदि भविष्य में भी यही स्थिति बनी रही तो हर वर्ष बरसात के दौरान गांव का संपर्क प्रभावित होता रहेगा. उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल स्थायी उपाय करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग की है.
* स्थायी समाधान की मांग
नागरिकों का कहना है कि अंडरपास में उच्च क्षमता की पंपिंग व्यवस्था, वर्षाजल निकासी के लिए अलग ड्रेनेज लाइन और नियमित रखरखाव की व्यवस्था किए बिना समस्या का समाधान संभव नहीं है. लोगों का मानना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आगामी दिनों में होने वाली अधिक बारिश के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो सकती है.
पहली ही बारिश में चांगापुर अंडरपास के जलमग्न होने से एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और दीर्घकालिक योजना को कितना महत्व दिया जा रहा है. अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस समस्या का स्थायी समाधान निकालता है या फिर हर मानसून में ग्रामीणों को इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा.

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