बाल विवाह रोकने के लिए सरकार की बड़ी पहल
अब शादी के कार्ड पर छापनी होगी वर-वधू की जन्मतिथि!

* राजस्थान मॉडल पर महाराष्ट्र सरकार की तैयारी
मुंबई/दि.24- राज्य में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए महाराष्ट्र सरकार एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है. सरकार शादी के निमंत्रण पत्र (विवाह कार्ड) पर दूल्हा और दुल्हन दोनों की जन्मतिथि अनिवार्य रूप से छापने का नियम लागू करने की तैयारी में है. इस संबंध में प्रस्ताव अंतिम चरण में बताया जा रहा है और जल्द ही इस पर आधिकारिक निर्णय लिया जा सकता है. राजस्थान में इस व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद महाराष्ट्र सरकार भी इसी मॉडल को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है. सरकार का मानना है कि इससे बाल विवाह के मामलों की पहचान करना और उन पर कार्रवाई करना अधिक आसान हो जाएगा.
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, वर्तमान में कई मामलों में लड़के या लड़कियों की वास्तविक उम्र छिपाकर विवाह करा दिए जाते हैं. शादी के कार्ड में उम्र संबंधी कोई जानकारी नहीं होने के कारण ऐसे मामलों पर समय रहते संदेह भी नहीं हो पाता. प्रस्तावित नियम के तहत विवाह पत्रिका पर वर और वधू की जन्मतिथि दर्ज करना अनिवार्य होगा. इससे यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों की उम्र विवाह के लिए निर्धारित कानूनी सीमा के अनुरूप है या नहीं. यदि किसी को बाल विवाह की आशंका होती है तो वह कार्ड में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर पुलिस या संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत कर सकेगा.
* इन जिलों में सबसे अधिक बाल विवाह
सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार राज्य के कई जिलों में बाल विवाह की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. आंकड़ों के मुताबिक परभणी जिले में 48 प्रतिशत, बीड में 43.7 प्रतिशत, धुले में 40.5 प्रतिशत तथा सोलापुर में 40.3 प्रतिशत लड़कियों के विवाह 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले होने की जानकारी सामने आई है.
* शिक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ता है असर
विशेषज्ञों का कहना है कि बाल विवाह केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि इससे लड़कियों की शिक्षा प्रभावित होती है और उन्हें कम उम्र में वैवाहिक जिम्मेदारियां उठानी पड़ती हैं. कम उम्र में गर्भधारण और मातृत्व के कारण उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है.
* जनजागरूकता पर भी रहेगा जोर
सरकार इस नियम का मसौदा तैयार कर रही है और जल्द ही इसकी औपचारिक घोषणा होने की संभावना है. हालांकि सामाजिक क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा. बाल विवाह जैसी गहराई से जड़ें जमा चुकी सामाजिक समस्या को समाप्त करने के लिए गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाने, लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और अभिभावकों को जागरूक करने की भी आवश्यकता होगी. सरकार को उम्मीद है कि विवाह पत्रिका पर जन्मतिथि अनिवार्य करने का निर्णय बाल विवाह रोकने की दिशा में एक प्रभावी और व्यावहारिक कदम साबित होगा.





