लाडकी बहन योजना में बड़ा घोटाला उजागर
12 हजार से अधिक सरकारी कर्मचारियों ने लिया लाभ

* 165 करोड़ रुपये की वसूली की प्रक्रिया शुरू, विधानसभा में सरकार ने दी जानकारी
मुंबई/दि.24 – महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहन’ योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है. विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए लिखित उत्तर में बताया गया है कि इस योजना का लाभ लेने वालों में 12,415 सरकारी कर्मचारी शामिल पाए गए हैं. इन अपात्र लाभार्थियों को लगभग 165 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ मिला, जिसकी वसूली की प्रक्रिया अब शुरू कर दी गई है. विपक्ष की ओर से लंबे समय से योजना के क्रियान्वयन में गड़बड़ियों के आरोप लगाए जा रहे थे. अब सरकार की ओर से विधानसभा में दी गई जानकारी के बाद इन आरोपों को बल मिला है.
लाडकी बहन योजना आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद महिलाओं को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी. लेकिन जांच में सामने आया कि 12,415 सरकारी कर्मचारियों ने भी इस योजना का लाभ लिया. सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारी योजना की पात्रता के दायरे में नहीं आते, इसके बावजूद लाभ प्राप्त करना गंभीर अनियमितता माना जा रहा है. जांच में कुछ पुरुष लाभार्थियों के नाम भी सामने आए हैं. महिलाओं के लिए बनाई गई योजना में पुरुषों को लाभ कैसे मिला, इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
165 करोड़ रुपये की वसूली शुरू
सरकार के अनुसार, अपात्र लाभार्थियों को कुल मिलाकर करीब 165 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. इस राशि की वसूली के लिए संबंधित जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं. राज्यभर में लाभार्थियों का पुनः सत्यापन किया जा रहा है और नियमों के विरुद्ध लाभ लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
* केवाईसी नहीं करने वालों की सहायता राशि रोकी गई
सरकार ने यह भी बताया कि कई लाभार्थियों ने अनिवार्य केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की थी. ऐसे मामलों में अनुदान राशि रोक दी गई है. सरकार का कहना है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक पात्र महिलाओं तक पहुंचे, इसके लिए जांच और सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त किया जा रहा है.
* सरकार की विश्वसनीयता पर उठे सवाल
महायुति सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल लाडकी बहन योजना में हजारों अपात्र लोगों के लाभ लेने का मामला सामने आने से सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. विपक्ष के लिए यह मुद्दा सरकार को घेरने का बड़ा आधार बन सकता है. राज्य की लाखों महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली इस योजना में हुई गड़बड़ियों ने सरकार के सामने विश्वसनीयता की चुनौती खड़ी कर दी है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वसूली की प्रक्रिया कितनी प्रभावी साबित होती है और दोषी लाभार्थियों तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है.





