230 जर्जर कक्षाओं में पढ़ने को मजबूर बच्चे

नए सत्र में भी नहीं पूरी हुई स्कूलों की मरम्मत

* जिला परिषद के 137 स्कूल खस्ताहाल
* 11.88 करोड़ के मरम्मत प्रस्ताव को मंजूरी का इंतजार
* हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा
अमरावती/दि.3 – नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन अमरावती जिले के जिला परिषद स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा अब भी भगवान भरोसे है. जिले के 1,571 जिला परिषद स्कूलों में से 137 स्कूल जर्जर स्थिति में हैं, जबकि 230 कक्षाओं को खतरनाक घोषित किया गया है. टपकती छतें, दरकती दीवारें और जर्जर भवनों के बीच विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी है, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है.
जिला परिषद के सर्वेक्षण के अनुसार इन स्कूलों की मरम्मत के लिए 11 करोड़ 88 लाख 90 हजार रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है. हालांकि प्रशासनिक मंजूरी की प्रक्रिया अभी जारी है और पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं होने से अधिकांश मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं. ऐसे में स्कूल खुलने के बावजूद कई भवन अब भी जोखिम की स्थिति में हैं. जिले के सभी 14 तालुकों, जिनमें मेलघाट के धारणी और चिखलदरा भी शामिल हैं, के स्कूलों का निरीक्षण किया गया था. गर्मी की छुट्टियों में मरम्मत पूरी करने की योजना थी, लेकिन नया सत्र शुरू होने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि कितने स्कूलों की मरम्मत पूरी हुई, कितनों का काम जारी है और कितने स्कूल अब भी जर्जर स्थिति में हैं.
इसी तरह जिला परिषद ने करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से 108 स्कूलों में 125 नए कक्षों के निर्माण का प्रस्ताव भी तैयार किया था. हालांकि मार्च 2026 के अंत तक इस योजना पर बजट से कोई राशि खर्च नहीं हो सकी, जिससे नए कक्षों का निर्माण भी शुरू नहीं हो पाया. जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्यम गांधी ने बताया कि जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिए जिला नियोजन समिति से निधि की मांग की गई है. उपलब्ध निधि से प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं और अतिरिक्त धनराशि के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि जिले के सभी जर्जर स्कूल भवनों का तत्काल स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाना चाहिए. अत्यधिक जोखिम वाले भवनों में कक्षाएं तत्काल बंद कर विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए तथा सरकार विशेष निधि उपलब्ध कराकर विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों सुनिश्चित करे.

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