अब गर्भवती महिलाओं की होगी विशेष निगरानी
आशा और अंगणवाडी सेविकाओं को सौंपी गई जिम्मेदारी

अमरावती/दि.7– कन्या भ्रूण हत्या और भू्रण के लिए निर्धारण जैसी सामाजिक बुराईयों पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी शुरु की है. इस अभियान के तहत उन गर्भवती महिलाओं को प्रसूति तक ट्रैक किया जा रहा है. जिनके पहले से एक या अधिक बेटियां है. मार्च से शुरु हुई इस पहल को अब 4 महीने पूरे हो चुके है.
सरकार के निर्देशानुसार आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी सेविकाएं ऐसी गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण होने से लेकर प्रसव तक हर महीने नियमित फॉलो-अप कर रही हैं. विशेष रूप से उन मामलों पर नजर रखी जा रही है, जहां परिवार में पहली या दूसरी संतान बेटी है, क्योंकि ऐसे मामलों में अवैध लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या की आशंका अधिक मानी जाती है. इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है. वरिष्ठ अधिकारी ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों की नियमित समीक्षा कर रहे हैं. साथ ही सोनोग्राफी केंद्रों की भी कड़ी निगरानी और जांच की जा रही है, ताकि भ्रूण के लिंग की अवैध जांच पर रोक लगाई जा सके.
सरकार का कहना है कि सख्त कानून लागू होने के बावजूद आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग कर कुछ स्थानों पर अब भी अवैध लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या की घटनाएं सामने आती हैं. इसी को रोकने के उद्देश्य से कानून के साथ-साथ प्रत्यक्ष निगरानी की यह व्यवस्था लागू की गई है. स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी से कन्या भ्रूण हत्या पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा और बेटियों के जन्म को सुरक्षित व प्रोत्साहित करने की दिशा में यह अभियान महत्वपूर्ण साबित होगा.





