मानधन के लिए बुजुर्ग कलाकारों को फिर दिखानी होगी अपनी कला

साहित्यिक व कलाकार मानधन योजना

* नए नियम का विरोध, अनेक लोग रहेंगे लाभ से वंचित
अमरावती /दि.8- राजर्षि शाहू महाराज वरिष्ठ साहित्यकार एवं कलाकार मानधन सम्मान योजना के तहत मिलने वाले मासिक मानधन के लिए अब बुजुर्ग कलाकारों को चयन समिति के सामने अपनी कला का प्रदर्शन करना होगा. सरकार की इस नई शर्त का कलाकारों और चयन समिति के सदस्यों ने विरोध जताया है. उनका कहना है कि जीवनभर कला और सामाजिक जागरूकता के लिए काम करने वाले वरिष्ठ कलाकारों को बुढ़ापे में अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए मंच पर प्रदर्शन करना अपमानजनक है.
योजना के तहत पात्र वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को प्रतिमाह 5 हजार रुपये का मानधन दिया जाता है. हालांकि, नए नियम के अनुसार लाभ लेने के इच्छुक कलाकारों को चयन समिति के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर अपनी कला का प्रदर्शन करना अनिवार्य होगा. सरकार का तर्क है कि इससे वास्तविक और पात्र कलाकारों की पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी.

* कलाकारों ने जताई नाराजगी
कलाकार चयन समिति ने इस शर्त को वापस लेने की मांग करते हुए सरकार और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है. उनका कहना है कि जिन कलाकारों ने वर्षों तक ढोल, नगाड़े, नृत्य, संगीत, लोककला और साहित्य के माध्यम से समाज की सेवा की, उन्हें वृद्धावस्था में फिर से प्रदर्शन करने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है.
* 626 आवेदनों पर होगी प्रक्रिया
वर्ष 2025-26 के लिए प्राप्त 626 आवेदनों की जांच और चयन प्रक्रिया जल्द शुरू होगी. पात्र उम्मीदवारों का चयन 9 गैर-सरकारी और 5 सरकारी सदस्यों वाली समिति करेगी.

* पात्रता की प्रमुख शर्तें
आवेदक की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक हो, संबंधित कला या साहित्य क्षेत्र में 15 से 20 वर्ष का योगदान हो, वार्षिक आय सरकार द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर हो, आयु प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र और कला संबंधी प्रमाण सहित आवश्यक दस्तावेज जिला परिषद के पंचायत विभाग में जमा करना अनिवार्य है. इस योजना का उद्देश्य सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को वृद्धावस्था में सम्मानपूर्वक जीवनयापन के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है. हालांकि, नई शर्तों को लेकर कलाकारों में असंतोष बढ़ता जा रहा है.

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