राज्य के 304 आईटी कर्मचारियों की सेवाओं के समायोजन के निर्देश
विधायक राजेश वानखडे की मांग पर मंत्रिमंडल की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय

अमरावती/दि.9- राज्यभर के जिलास्तर पर कार्यरत 304 अनुभवी आईटी विशेषज्ञ कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने के बजाए उनका समायोजन जिलाधिकारी स्तर पर किए जाने के निर्देश जारी किए गए है. इस निर्णय से लंबे समय से अनिश्चितता का सामना कर रहे इन कर्मचारियों को बडी राहत मिली है. वर्ष 2017 के शासन निर्णय के तहत राज्य के जिलाधिकारी कार्यालयों, जिला परिषद कार्यालयों तथा उपविभागीय अधिकारी (एसडीओ) कार्यालयों में बाह्य एजेंसी के माध्यम से जिला परियोजना प्रबंधक (डीसीएम), जिला परियोजना प्रमुख (डीपीएल), वरिष्ठ नेटवर्क अभियंता (एनएसई), स्वास्थ्य और सहायक अभियंता (एसएसई) और नेटवर्क अभियंता (एनआईबी) जैसे पदों पर कुल 304 आईटी विशेषज्ञ पिछले लगभग 10 वर्षों से कार्यरत है.
हालही में इन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया गया था. जिससे सभी कर्मचारी चिंतित थे. कर्मचारियों के एक प्रतिनिधि मंडल ने विधायक राजेश वानखडे से मुलाकात कर हस्तक्षेप करने की मांग की. इसके बाद विधायक वानखडे ने सूचना प्रोद्योगिकी मंत्री को पत्र लिखकर कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त न करने और उनके समायोजन की मांग की. इस मांग के संदर्भ में मंत्रालय में राजस्व मंत्री तथा सूचना प्रोद्योगिक मंत्री आशीष शेलार की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में निर्णय लिया गया कि, इन कर्मचारियों का समायोजन जिला अधिकारी स्तर पर किया जाएगा. इस संबंध में संबंधित जिलाधिकारियों को निर्देश भी जारी किए जाएंगे.
बैठक में विधायक राजेश वानखडे, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव, आयुक्त तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे. इन आईटी विशेषज्ञों ने पिछले एक दशक में ई-ऑफीस, ई-डिस्ट्रीक्ट, आधार, आपले सरकार, आरटीएस, आरटीआई, डीबीटी, भारत नेट, पीएम किसान, पीजी पोर्टल, महापर, मुख्यमंत्री लाडली बहन योजना सहित विभिन्न डिजिटल परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इसके अलावा वेबसाइट प्रबंधन, नेटवर्क एवं सर्वर रखरखाव, तकनीकी सहायता, साईबर सुरक्षा, प्रशिक्षण तथा ई-गवर्नेस परियोजनाओं के जिला एवं तहसील स्तर पर संचालन में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है.
हालांकि 1 जुलाई 2026 को इन कर्मचारियों को सेवा समाप्ति संबंधी ई-मेल प्राप्त हुआ था. इससे राज्य सरकार को प्रशिक्षित और अनुभवी तकनीकी मानव संसाधन खोने की आशंका पैदा हो गई थी. साथ ही कर्मचारियों के रोजगार और आजीविका पर भी संकट मंडरा रहा था. कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों की मांग थी कि, सेवा समाप्ति के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए तथा इन कर्मचारियों को या तो पूर्ववत सेवा में रखा जाए अथवा इलेक्ट्रॉनिक, सूचना प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता विभाग की अन्य परियोजनाओं में उनके अनुभव का उपयोग करते हुए समायोजित किया जाए. बैठक में इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए संबंधित जिलाधिकारियों को कर्मचारियों के समायोजन के निर्देश दिए गए है. इससे राज्य के 304 अनुभवी आईटी विशेषज्ञ कर्मचारियों को बडी राहत मिली है और उनके भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक समाप्त हो गई है. निर्णय के बाद कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने उपस्थित मंत्रियों एवं विधायक राजेश वानखडे का आभार व्यक्त किया.