मनपा प्रशासन को आखिर और कितनी बच्चियों का खून चाहिए?

पार्षद अनिल अग्रवाल ने प्रशासन पर बोला हमला

* आवारा कुत्तों के लगातार बढते आतंक पर जताया रोष
* मनपा की कार्यप्रणाली पर उठाए सवालिया निशान
अमरावती/दि.17- अमरावती शहर में आवारा कुत्तों का आतंक अब जानलेवा रूप लेता जा रहा है. ताजा घटना में रुक्मिणी नगर क्षेत्र में एक 10 वर्षीय मासूम बच्ची पर आवारा कुत्ते ने इतना भयावह हमला किया कि उसके चेहरे को गंभीर रूप से नोच डाला. बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई है और उसका उपचार एक निजी अस्पताल के आयसीयू में जारी है. इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे शहर में आक्रोश का माहौल है. वहीं, पार्षद अनिल अग्रवाल ने सीधे तौर पर अमरावती महानगरपालिका प्रशासन को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए तीखा हमला बोला है और जानना चाहा है कि, आखिर अमरावती मनपा प्रशासन को शहर के कितने बच्चों व नागरिकों के खून की प्यास है और कितने लोगों का खून बहने के बाद मनपा प्रशासन की निंद खुलेगी. साथ ही शहर की सडकों पर दिन-रात आवारा तरीके से भटकनेवाले आवारा कुत्तों का बंदोबस्त आखिर कब किया जाएगा.
* मासूम सनिदी पर टूटा कहर
जानकारी के अनुसार, रुक्मिणी नगर स्थित साई हॉस्पिटल के समीप चालक के रूप में कार्यरत सचिन कावरे की 10 वर्षीय पुत्री सनिदी कावरे पर एक आवारा कुत्ते ने अचानक हमला कर दिया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुत्ता बेहद आक्रामक था और उसने बच्ची के चेहरे पर कई जगह गहरे घाव कर दिए. हमले के समय मासूम सनिदी खुद का बचाव भी नहीं कर सकी. गंभीर रूप से घायल अवस्था में उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत को देखते हुए खउण में भर्ती किया गया. चिकित्सकों के अनुसार बच्ची को चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं और उसका उपचार जारी है.
* तस्वीरें सामने आते ही फूटा जनाक्रोश
घटना के बाद बच्ची की घायल अवस्था की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं. तस्वीरों ने लोगों को झकझोर कर रख दिया. नागरिकों ने सवाल उठाया कि आखिर शहर में लगातार बढ़ रहे आवारा कुत्तों के आतंक पर मनपा प्रशासन कब कार्रवाई करेगा? शहर के विभिन्न इलाकों में पहले भी आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है.
* आमसभा में पहले ही चेताया था – अनिल अग्रवाल
इस पूरे मामले को लेकर अपनी संतप्त प्रतिक्रिया देते हुए मनपा पार्षद अनिल अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने पहले ही मनपा की आमसभा में पशुवैद्यकीय विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे. उन्होंने आवारा कुत्तों के नियंत्रण, नसबंदी और टीकाकरण पर खर्च किए गए लाखों रुपये का हिसाब मांगा था. पार्षद अनिल अग्रवाल ने कहा कि यदि नसबंदी कार्यक्रम प्रभावी ढंग से चलाया गया होता, तो आज शहर में आवारा कुत्तों की संख्या इतनी नहीं बढ़ती. उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारी सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे, जबकि जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई.
* रिश्वतखोरी प्रकरण का भी उठाया मुद्दा
पार्षद अनिल अग्रवाल ने मनपा के पशुवैद्यकीय विभाग में सामने आए कथित भ्रष्टाचार का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले विभाग के प्रभारी पशुवैद्यकीय अधिकारी डॉ. सचिन बोंद्रे को भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया था. आरोप था कि श्वान नसबंदी से संबंधित 47 लाख रुपये के बिल को मंजूरी देने के लिए ठेकेदार से बड़ी रकम की रिश्वत मांगी गई थी. पार्षद अनिल अग्रवाल ने कहा कि विभाग में भ्रष्टाचार उजागर होने के बावजूद प्रशासन ने व्यवस्था सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया.
* सनिदी के इलाज का पूरा खर्च मनपा उठाए
पार्षद अनिल अग्रवाल ने मांग की है कि सनिदी कावरे के परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसके उपचार का संपूर्ण खर्च अमरावती महानगरपालिका वहन करे. उन्होंने कहा, यदि पशुवैद्यकीय विभाग समय पर कार्रवाई करता, तो आज यह मासूम बच्ची अस्पताल में जिंदगी और मौत से संघर्ष नहीं कर रही होती. इसलिए इस घटना की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी मनपा प्रशासन की है. महापौर और आयुक्त को विशेष अधिकारों का उपयोग कर बच्ची के इलाज के लिए तत्काल आर्थिक सहायता देनी चाहिए.
* आवारा कुत्तों के मुद्दे पर फिर घिरा प्रशासन
रुक्मिणी नगर की यह घटना एक बार फिर शहर में आवारा कुत्तों की समस्या को केंद्र में ले आई है. नागरिकों का कहना है कि जब तक व्यापक स्तर पर नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रण अभियान नहीं चलाया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं. अब सवाल यह है कि एक मासूम बच्ची के चेहरे पर पड़े इन जख्मों के बाद भी क्या प्रशासन जागेगा, या फिर किसी और बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जाएगा?

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